नगर निगम के चतुर्थ श्रेणी और सेवानिवृत्त कर्मियों को ऑनलाइन चिकित्सा दावा प्रक्रिया से मिले छूट: कर्मचारी यूनियन ने सीएम योगी से की ऑफलाइन व्यवस्था लागू करने की मांग
लखनऊ: नगर निगम एवं स्थानीय निकायों में कार्यरत चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों तथा बुजुर्ग सेवानिवृत्त पेंशनर्स को चिकित्सा प्रतिपूर्ति (Medical Reimbursement) के दावे ऑनलाइन प्रस्तुत करने की बाध्यता से राहत देने की मांग उठी है। लखनऊ नगरमहापालिका कर्मचारी यूनियन के अध्यक्ष ओम प्रकाश उप्रेती ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को औपचारिक पत्र भेजकर तकनीकी जटिलताओं का हवाला दिया है और इस वर्ग के कर्मचारियों के लिए पूर्व की भांति ऑफलाइन आवेदन की व्यवस्था बहाल करने का पुरजोर आग्रह किया है।
📌 प्रमुख मांगें एवं संदर्भ
- शासनादेश से समस्या: 18 सितंबर 2026 के शासनादेश के तहत स्थानीय निकायों में चिकित्सा प्रतिपूर्ति दावों को पूरी तरह ऑनलाइन अनिवार्य किया गया है।
- तकनीकी जटिलताएं: चतुर्थ श्रेणी कार्मिकों और उम्रदराज पेंशनर्स के पास डिजिटल संसाधनों व तकनीकी ज्ञान का अभाव, जिससे क्लेम अटक रहे हैं।
- ऑफलाइन व्यवस्था की मांग: मानवीय आधार पर इस विशेष वर्ग के लिए पूर्ववत कागजी/ऑफलाइन आवेदन स्वीकार करने की छूट दी जाए।
- शीर्ष स्तर पर निर्देश की अपील: मुख्य सचिव, अपर मुख्य सचिव, प्रमुख सचिव नगर विकास और स्वास्थ्य विभाग को आवश्यक आदेश जारी करने की गुहार।
📊 चिकित्सा प्रतिपूर्ति दावा प्रक्रिया: मुख्य तथ्य
| मानक / बिंदु | विवरण एवं यूनियन का पक्ष |
|---|---|
| संबद्ध शासनादेश | शासनादेश सं. 227/2026/आईओ/1469413/2026-5-6099/993/2026-6 (दिनांक: 18.09.2026) |
| प्रभावित संवर्ग | समस्त नगर निकायों के चतुर्थ श्रेणी (Class-IV) कार्मिक एवं सेवानिवृत्त पेंशनर्स |
| मुख्य समस्या | ऑनलाइन पोर्टल की तकनीकी जटिलता, बिल अपलोडिंग में दिक्कतें और साइबर कैफे पर निर्भरता |
| यूनियन की मांग | ऑनलाइन अनिवार्यता से छूट देकर पूर्व की भांति ऑफलाइन आवेदन की सुविधा देना |
'डिजिटल प्रक्रिया बुजुर्गों और चतुर्थ श्रेणी कर्मियों के लिए असुविधाजनक': ओम प्रकाश उप्रेती
यूनियन अध्यक्ष ओम प्रकाश उप्रेती ने पत्र में उल्लेख किया है कि 18 सितंबर 2026 को जारी शासनादेश का उद्देश्य प्रक्रिया को पारदर्शी बनाना हो सकता है, लेकिन जमीनी हकीकत इसके उलट है। सफाईकर्मी, माली, चौकीदार और अन्य चतुर्थ श्रेणी कर्मियों सहित वयोवृद्ध पेंशनर्स के पास न तो पर्याप्त डिजिटल संसाधन हैं और न ही वे कंप्यूटर व पोर्टल के संचालन में सक्षम हैं।
“चिकित्सा प्रतिपूर्ति जीवनरक्षक इलाज के खर्च की भरपाई होती है। ऑनलाइन पोर्टल पर विभिन्न दस्तावेज, वाउचर और पर्चियां अपलोड करने की बाध्यता के कारण ये कर्मचारी साइबर कैफे के चक्कर काटने को विवश हैं। तकनीकी गलतियों के चलते कई बार क्लेम समय पर स्वीकृत नहीं हो पाते, जिससे आर्थिक तंगी का सामना करना पड़ता है।”
— ओम प्रकाश उप्रेती (अध्यक्ष, लखनऊ नगरमहापालिका कर्मचारी यूनियन)
उच्चाधिकारियों को तत्काल संशोधन आदेश जारी करने का आग्रह
यूनियन ने मुख्यमंत्री से अपील की है कि कर्मचारियों की इन व्यावहारिक एवं वास्तविक दिक्कतों को प्राथमिकता पर लिया जाए। संगठन ने मांग की है कि:
- वैकल्पिक व्यवस्था: जब तक कर्मचारी डिजिटल व्यवस्था के पूरी तरह अभ्यस्त न हों, तब तक ऑनलाइन के साथ-साथ ऑफलाइन दावे जमा करने का विकल्प अनिवार्य रूप से खुला रखा जाए।
- समयबद्ध भुगतान: नगर निकायों में ऑफलाइन जमा होने वाले दावों के सत्यापन और भुगतान की एक निश्चित समय सीमा तय की जाए।
- विभागीय निर्देश: मुख्य सचिव, अपर मुख्य सचिव कार्मिक, प्रमुख सचिव नगर विकास एवं प्रमुख सचिव चिकित्सा एवं स्वास्थ्य को शासनादेश में आवश्यक शिथिलीकरण (Relaxation) प्रदान करने हेतु निर्देशित किया जाए।


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