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भारत मॉरिशस के लिए भारत माता की तरह है - सर अनिरुद्ध जगन्नाथ

इंडिया-मॉरिशस बाईलेटरल सेतु वेबिनार


लखनऊ। बाइंडिंग भारत की फाउंडर कनुप्रिया जाजू का कहना है कि युवाओं द्वारा बनाया गया एक ऐसा थिंक टैंक है जो समय-समय पर राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय मुददों पर सम्मेलन आयोजित करता है। इसी कड़ी में अब बाइंडिंग भारत ने इंडिया-मॉरिशस बाईलेटरल सेतु वेबिनार का आयोजन किया। रविवार को वेबिनार में "हिंद महासागर क्षेत्र की सुरक्षा" पर चर्चा की गई। भारत और मॉरीशस दोनों देशों के पैनल लिस्टों ने कार्यक्रम को संबोधित किया। वेबिनार में बतौर मुख्य अतिथि मॉरिशस के पूर्व राष्ट्रपति व प्रधानमंत्री सर अनिरुद्ध जगन्नाथ थे। जिनके पास मॉरीशस की राजनीति व अंतर्राष्ट्रीय कूटनीति का वर्षों का अनुभव है। हरीश द्विवेदी, भारत के सांसद व भारतीय जनता पार्टी के जनरल सेकेट्री है। 



यह वेबिनार भारतीय महासागर क्षेत्र में उत्पन्न होने वाले दो राष्ट्रों के बीच सामरिक और सुरक्षा सहयोग पर केंद्रित है। परंपरागत रूप से दोनों देशों के बीच एक करीबी ऐतिहासिक, सामाजिक, आर्थिक और सांस्कृतिक संबंधों को साझा करते है। लेकिन कार्यक्रम में सभी वक्ताओं ने सहमति व्यक्त की कि दोनों देशों के लिए अपने सामाजिक-आर्थिक संबंधों को और बढ़ाने की आवश्यकता है। एक संरक्षित और सुरक्षित वातावरण आवश्यक पहलु है।


भारत और मॉरीशस के साथ भारत के संबंधों को मजबूत करने के लिए उनके अटूट समर्थन के लिए उन्हें प्रवासी भारतीय श्रम सम्मान से सम्मानित किया गया। 2020 में उन्हें भारत पदम विभूषण से सम्मानित करना 130 करोड़ भारतीयों की तरफ से स्नेह की निशानी है। जो दोनों देशों के बीच मित्रता को प्रगाढ़ करने में उनके लगातार प्रयासों के कारण उन्हें दिया गया था। कार्यक्रम को संबोधित करते हुए उन्होंने दोनों देशों के बीच संबंधों की सहजीवी प्रकृति पर जोर दिया।



उन्होंने भारत के राष्ट्रपिता महात्मा गांधी के प्रति आभार व्यक्त किया, जो तत्कालीन प्रवासी श्रमिकों के बीच शैक्षिक और स्कूली शिक्षा को बढ़ावा देने के लिए थे। जो आज आधुनिक साहित्य और विकसित मॉरिशस के अधिकांश हिस्से का निर्माण करते हैं। उन्होंने मॉरीशस के आधुनिक बुनियादी ढांचे में मदद करने वाली विभिन्न वित्तीय परियोजनाओं और निवेशों के लिए भारत को धन्यवाद दिया। अंततः उन्होंने टिप्पणी की, कि भारत मॉरीशस के लिए "भारत माता" है और दोनों देशों के बीच का संबंध वास्तव में एक रक्त संबंध है, जो चिरस्थायी होगा।



सांसद हरीश द्विवेदी ने आधुनिक भारतीय मॉरीशस में निहित गहरी संस्कृति और मूल्यों के बारे में बात की, जो भारतीय पूर्वजों द्वारा स्थापित ऐतिहासिक कड़ियों के कारण हैं। उन्होंने यह भी टिप्पणी की कि मॉरिशस में देखी गई समृद्धि और आर्थिक प्रगति आज हमारे भारतीय पूर्वजों के संघर्ष और दृढ़ता को आत्मसात करती है। राजदूत (डॉ.) नोमुव्यो नोक्वे, महासचिव, आईओआरए ने कार्यक्रम को संबोधित किया और मुख्य रूप से हिंद महासागर रिम एसोसिएशन के जनादेश पर ध्यान केंद्रित किया। उन्हें आतंकवाद पर 2017 आईओआरए घोषणा की बात कही। उन्होंने टिप्पणी की कि भारत और मॉरीशस हिंद महासागर क्षेत्र में एक-दूसरे की जरूरतों के पूरक हैं।



इस वेबिनार में ऐसे पैनलिस्ट भी थे जो समुद्री मामलों और संबंधित देशों की नीति में उचित हितधारक हैं। पैनलिस्ट की सूची में राज महावीर (निदेशक हिंद महासागर आयोग), कैप्टन सरबजीत एस. परमार (कार्यकारी निदेशक राष्ट्रीय मेरीटाइम फाउंडेशन), दीपक शेट्टी (पूर्व भारतीय नौवहन महानिदेशक) वैलेरी उप्पैया (प्रोफेसर मॉरिशस विश्विविद्यालय और अखिलेश गनपुथ (निर्देशक वैलेंस) शामिल रहे। पैनल चर्चा समुद्री सुरक्षा मुद्दों की एक श्रृंखला पर केंद्रित होगी। सुरक्षित और सुरक्षित मार्ग जैसे विषयों (फ्रीडम ऑफ नेविगेशन) (FON), उच्च समुद्रों में वैश्विक कॉमन्स तक समान पहुंच और हिंद महासागर क्षेत्र में गैर-पारंपरिक सुरक्षा खतरों से निपटने के लिए विषय पैनल चर्चा का मुख्य आधार बना। हिंद महासागर क्षेत्र में जलवायु परिवर्तन और पर्यावरण संबंधी चुनौतियों जैसे अन्य मुद्दों भी उठाए गए।



पैनल चर्चा में समुद्री सुरक्षा के कई मुद्दों पर ध्यान केंद्रित किया गया, जैसे सुरक्षित और सुरक्षित मार्ग, फ्रीडम ऑफ नेविगेशन (एफओएन), द्वीप देशों के अनन्य आर्थिक क्षेत्रों (ईईजेड) को हासिल करना, दोनों के बीच समन्वित प्रयासों और सूचना साझाकरण के माध्यम से हिंद महासागर क्षेत्र में सुरक्षा खतरों से निपटने की आवश्यकता है। हिंद महासागर क्षेत्र में पर्यावरणीय चुनौतियों जैसे IUU (अवैध, बिना लाइसेंस और अनियमित) मछली पकड़ने से संबंधित अन्य मुद्दों पर भी चर्चा की गई। 



यह भारत के द्विपक्षीय संबंधों पर आधारित बाइंडिग भारत द्वारा आयोजित दूसरा कार्यक्रम था। यह पहल एक सामूहिक युवा नेटवर्क है जिसकी स्थापना राष्ट्रों के सामने आने वाली चुनौतियों की पहचान करने और उन्हें पूरा करने के लिए की जाती है। भविष्य में इस पहल का उद्देश्य भारत और संबंधित देश से शिक्षाविदों और हितधारकों के साथ विभिन्न देशों के साथ और अधिक सम्मेलन आयोजित करना है।


  


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