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लखनऊ में 88 गांवों में अब पहुँचेगा नगर निगम

568 वर्ग मीटर तक फैला लखनऊ नगर निगम का एरिया


लखनऊ। नगर निगम सीमा में 88 गांव शामिल होने के बाद चुनौतियां भी काफी होंगी। पांच साल तक सभी सुविधाएं देने के बाद ही टैक्स वसूल सकेंगे। वहीं नगर निगम पर सड़क, नाली, सफाई और मार्ग प्रकाश व्यवस्था दुुरुस्त करने का दबाव बढेÞगा। 32 साल में शहर का क्षेत्रफल काफी बढ़ गया है। हालांकि नगर निगम सिफारिशों पर यहां विकास कार्य कराता रहता है। नगर निगम में अभी शामिल गांवों की संख्या 124 है। 88 नए गांवों के शामिल होने के बाद यह संख्या 212 हो गई है। इससे पहले वर्ष 1959 व 1987 में विस्तार हुआ था। तब शहर का क्षेत्रफल बढ़कर 310 वर्ग किमी हो गया था। नगर निगम का क्षेत्रफल बढ़कर 568 वर्ग किमी हो गया है। अधिसूचना जारी होने के बाद वार्ड परिसीमन करना होगा।



सीमा विस्तार होने से सीतापुर रोड नगर निगम की सीमा मिजार्पुर तक पहुंच जाएगी। वहीं सुलतानपुर रोड पर सरसवां और फैजाबाद रोड पर चिनहट से पांच किमी और आगे आकाशवाणी से बढ़कर शारदा नहर तक नगर निगम का फैलाव होगा। इसी प्रकार कानपुर रोड पर दारोगा खेड़ा से आगे बंथरा के पास लीडा के क्षेत्र तक और कुर्सी रोड पर गुंडबा के कई गांव निगम में शामिल होंगे। सदर के कुल 32 गांव, मोहनलालगंज के 6, सरोजनीनगर के 24 तथा बक्शी का तालाब के 18 गांवों को नगर निगम की प्रस्तावित सीमा में सम्मिलित होंगे। सीमा विस्तार से संबंधित गांवों के आंकड़े जुटाए गए हैं। नगर निगम के संपत्ति अधिकारी के मुताबिक इन गांवों में कृषि क्षेत्रफल, अकृषिक क्षेत्रफल, कुल क्षेत्रफल तथा नेशनल हाइवे की स्थिति का आंकड़ा लेखपालों के जरिए इकाठ्ठा किया गया है। गांवों तक निगम के पहुंचने से ग्राम सभाओं, तालाबों और खलिहान की जमीन पर निगम का स्वामित्व होगा। इससे करीब 2000 बीघा भूमि नगर निगम को मिलेगी। यहां कई योजनाएं विकसित हो सकेंगी। अभी नगर निगम में 5.50 लाख मकान हैं। 88 गांव शामिल होने के बाद इनकी संख्या दो गुना से ज्यादा बढ़ जाएगी। टैक्स वसूली से जहां निगम की आय बढ़ेगी। वहीं गांवों में भी नगरीय सुविधाएं मुहैया हो सकेंगी। 

ये गांव होंगे शामिल
सीतापुर रोड- मौरा, जेहटा, सैंथा, सरौरा, अली नगर, घैला, नरहरपुर, अल्लू नगर डिगुरिया, मुबारकपुर, मुतक्कीपुर, तरहिया, रामपुर, कमलाबाद बढ़ौली, तिवारीपुर, भिठौली खुर्द, मोहिउदीनपुर, खरगपुर, जागीर, सैदपुर जागीर और मिजार्पुर।
कुर्सी रोड- रसूलपुर कायस्थ, अजहाबाद, मिश्रपुर, गुडंबा, बरखुरदारपुर, आधार खेड़ा, बसहा, दसौली, मोहम्मपुर मजरा और रसूलपुर सादात।
अयोध्या रोड- गोइला, नौबस्ता कलां, धावा, गणेशपुर रहमानपुर, सेमरा, उत्तरधौना, शाहपुर, सराय शेख, टेरा खास, निजामपुर मल्हौर, लौलाई, हासेमऊ, भरवारा, खरगापुर, भैसोरा, लोनापुर, चंदियामऊ, मकदूमपुर, मलेसेमऊ, बाघामऊ। 
सुल्तानपुर रोड- सरसवां, अदरौनामऊ, अहमामऊ, हरिहरपुर, मलाक, मुजफ्फर नगर घुसवल, युसुफ नगर, चक कजेहरा, निजामपुर मझिगवां और देवामऊ, माढरमऊ कला, माढरमऊ खुर्द, सोनई कंजेहरा व सेवई।
रायबरेली रोड- घुसवल कलां, बरौली खलीलाबाद, कल्ली पश्चिम, अशरफ नगर और रसूलपुर इठूरिया, हरिकंशगढ़ी, पुरसैनी।
कानपुर रोड- बिजनौर, नटकुर, मिरानपुर पिनवट, पिपरसंड, अनौरा, कलिया खेड़ा, अमौसी-अवशेष, अली नगर सुनहरा-अवशेष और सदरौना।
मोहान रोड- प्यारेपुर, डिघिया, सरोसा भरोसा और नरौना।
हरदोई रोड- सलेमपुर पतौरा, सिकरौरी, लाल नगर, सरांय प्रेमराज और महिपतमऊ, अमेठिया सलेमपुर। 
नए भवनों का कर निर्धारण करना होगा। मार्ग प्रकाश व्यवस्था, सफाई, सड़क व नाली निर्माण एवं अतिक्रमण आदि की गतिविधियों पर निगरानी रखना निगम के लिए मुश्किल होगा। अवैध डेरियों को अभी हटाकर बाहर किया गया है। विस्तार होने पर इन्हें और बाहर करना होगा। पार्षदों की ओर से विकास के लिए दबाव बनाया जाएगा। इसके लिए नगर निगम को आय के साधन बढ़Þाने होंगे। 

नगरीय शुल्क देना होगा, मिलेंगी सुविधाएं
गांव वालों को गृहकर देना होगा। जन्म और मृत्यु प्रमाण पत्र नगर निगम से बनेंगे, जिसके लिए निर्धारित शुल्क का भुगतान करना होगा। यहां पक्की सड़क, नाली, पानी जैसी सुविधाएं मिल सकेंगी। यहां प्रधान के स्थान पर पार्षद चुने जाएंगे। लेकिन इसके बदले में गांव वालों जो कि बाद में नगर निकाय में शामिल होंगे, को गृहकर देना होगा। इसके अलावा अन्य नगरीय शुल्क गांवावासियों को देना होगा। 
जनगणना के नए आंकड़ों के बाद परिसीमन
जनगणना 2011 के आधार पर वार्डों का परिसीमन किया गया था। जनगणना 2021 शुरू होने वाली है। ऐसे में 2021 के बाद सारे आंकडे आने के बाद ही परिसीमन हो सकेगा। नगर निगम में अभी आठ जोन और 110 वार्ड हैं। विस्तारित क्षेत्र शामिल होने पर वार्डों का नए सिरे से परिसीमन करना होगा। हालांकि वार्डों की संख्या 110 ही रहेगी। आठ जोन में 110 वार्ड होने से यहां सभासदी व्यवस्था लागू है। एलडीए और आवास विकास से विकसित कालोनियां भी नगर निगम को हैंडओवर हो रही हैं, इससे भी निगम का कार्यक्षेत्र काफी बढ़ गया है। 
दो नगर निगम बनाने की मांग
नगर निगम सीमा को दो हिस्सों में बांटने का प्रस्ताव है। सीमा विस्तार के बाद सिस नगर व ट्रांस नगर निगम बनाकर लोगों को बेहतर सुविधाएं मुहैया कराने का प्रस्ताव बनाया जाएगा। सीमा विस्तार में शामिल लगभग दर्जनों गांवों में एलडीए व आवास विकास ने अपनी योजनाएं विकसित कर दी हैं। पार्षद भी दो नगर निगम बनाने की वकालत कर रहे हैं। उनका कहना है कि अभी विकसित व अविकसित वार्डों में एक समान वार्ड विकास निधि का बजट तैयार होता है जबकि दो नगर निगम बनने से अलग अलग बजट पास होंगे। 
पहले से शामिल 124 गावों को सुविधाओं का इंतजार
नगर निगम में शामिल 124 गांवों समेत दूसरे इलाकों में अभी तक अवस्थापना सुविधाएं नहीं मिल सकी हैं। हाल यह है कि 5.50 लाख मकानों में से ढाई लाख ही गृहकर जमा कर रहे हैं। वहीं दो लाख से अधिक मकानों में रहने वाले लोगों को सरकारी पाइप लाइनों से पानी की सप्लाई नहीं मिल पाई है। करीब बारह लाख लोग अपने निजी संसाधनों से पानी पी रहे हैं। ये सभी इलाके नगर निगम सीमा में शामिल हो चुके हैं। यहां न तो सीवर की लाइन है और न ही पानी की। जलकल विभाग के महाप्रबंधक एसके वर्मा के मुताबिक चार लाख पांच हजार मकानों को पानी कनेक्शन दिये गये हैं। करीब 705 एमएलडी पानी सप्लाई पाइप लाइनों से की जा रही है। इस प्रकार से लगभग 23 लाख लोग सरकारी पाइप लाइनों से पानी की सुविधा ले रहे हैं। ऐसे में आज भी 12 लाख की आबादी और दो लाख 95 हजार मकानों में पानी कनेक्शन नहीं हो पाये हैं। 


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