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डेढ़ दशक बाद 23 सितंबर से बलरामपुर गार्डन में सजेगा पुस्तकों का संसार, कलाम के सपने को करेगा साकार

नई-पुरानी किताबों, लेखकों पर बहस करेंगे रचनाकार, होंगे विमोचन

लखनऊ। राजधानी के पुस्तक प्रेमियों के इंतजार की घड़ियां खत्म हो गई। 23 सितंबर से बलरामपुर गार्डन अशोक मार्ग में पुस्तकों का संसार सजेगा। करीब डेढ़ दशक बाद फिर बलरामपुर गार्डन में लौट रहा 10 दिवसीय 19वां राष्ट्रीय पुस्तक मेला गांधी जयंती के दिन तक पुस्तक प्रेमियों को देश दुनिया के लेखकों की पुस्तक से रूबरू कराएगा। वही नई-पुरानी किताबों, लेखकों पर रचनाकार बहस करेंगे और पुस्तकों के विमोचन भी होंगे। पुस्तक मेले का उद्घाटन प्रदेश के उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक 23 सितम्बर को शाम पांच बजे करेगें।  
केटी फाउंडेशन और फोर्स वन बुक्स द्वारा आयोजित मेले की जानकारी देते हुए आयोजक मनोज सिंह चन्देल ने बताया कि इस वर्ष की थीम- हर घर पुस्तकालय पूर्व राष्ट्रपति एपीजे अब्दुल कलाम के सपने को साकार करने की दिशा में एक और कदम है। सन् 2013 में 11वें पुस्तक मेले का उद्घाटन करते हुए पूर्व राष्ट्रपति ने बच्चों और नवयुवाओं से मात्र 10 पुस्तकों से ‘होम लाइब्रेरी’ बनाने का आह्वान करते हुए कहा था कि अच्छी पुस्तकें ज़िंदगी भर साथ निभाती हैं। गीता, कु़रआन व लाइट फ्रॉम मैनी लैम्प्स सहित पांच पसंदीदा किताबों के नाम गिनाते हुए मिसाइल मैन ने तब था कि माता-पिता और शुरुआती शिक्षक का बच्चों को संस्कारित करने में महत्वपूर्ण योगदान होता है। ज्ञान ही व्यक्ति को महान बनाता है और अच्छी किताबें हमारी परिकल्पना की लौ जगाती हैं कहने के संग तब उन्होंने पुस्तक प्रेमियों से सवाल जवाब का दौर भी क़ायम किया था।

उन्होंने बताया कि पुस्तक मेले की सफलता का श्रेय भागीदारों, प्रकाशकों एवं बड़ी संख्या में आने वाले पुस्तक प्रेमियों को जाता है। यहाँ आने के लिए कई भागीदार देश के अन्य स्थानों पर आयोजित पुस्तक मेलों को छोड़कर आते हैं। इस वर्ष मेले में पुरानी और दुर्लभ पुस्तकों को लेकर भी एक प्रकाशक आ रहे हैं। पुस्तक प्रेमी अपनी दुर्लभ किताबों को संरक्षित करने के लिए उनकी सेवाओं का लाभ भी मेले में ले सकते हैं। मेले में अलग-अलग क्षेत्रों की प्रमुख हस्तियों का सम्मान भी होगा।
देश के 5 प्रतिष्ठित पुस्तक मेलों में शुमार लखनऊ के राष्ट्रीय पुस्तक मेले के बारे में आस्था ढल व आकर्षण जैन ने बताया कि मेले में पुस्तक प्रेमियों को न्यूनतम 10 प्रतिशत की छूट मिलेगी। मेले में राजकमल, लोकभारती, प्रभात, किताबघर, राजपाल, प्रकाशन संस्थान, सस्ता साहित्स मण्डल, नई किताब, सेतु, सम्यक, निखिल प्रकाशन, प्रतियोगिता दर्पण, इकतारा सहित सरकारी प्रकाशकों ंमें प्रकाशन विभाग, हिन्दी संस्थान, उर्दू अकादमी, संस्कृत संस्थान सहित योगदा, रामकृष्ण मठ सहित बहुत से अन्य प्रकाशन व शिक्षण सम्बंधी वस्तुओं व खानपान के लगभग सौ स्टाल होंगे। इसके बाद भी स्टालों की मांग बराबर बनी हुई है। हमें खेद है कि जगह की कमी है।
निदेशक आकर्ष चंदेल ने जानकारी दी कि पुस्तक मेले में अंकित चड्ढा, संजीव जायसवाल संजय, वीरेन्द्र सारंग की पुस्तकों के अलावा निखिल प्रकाशन इरा पब्लिकेशन व हिन्दी वांग्मय निधि आदि की अनेक कई किताबों का विमोचन हो रहा है। अन्य प्रमुख आयोजनों में शिवमूर्ति की पुस्तक के अंशों का पाठ विप्लव-4, एलिस मुनरो, कथाकार शिवानी, स्टीफेन की जीवनी, विनोद दास व अनिल पाठक की रचनाओं पर चर्चा होगी तो काव्य व साहित्य गोष्ठियां नित्य चलेंगी। पुस्तक मेले में कोविड-19 के प्रोटोकाल का पालन भी कराया जायेगा। समापन  समारोह दो अक्टूबर को होगा। पुस्तक प्रेमी वर्ष भर बड़ी उत्सुकता से मेले की प्रतीक्षा करते हैं और 10 दिनों तक चलने वाले मेले में हजारों पाठक कई बार आते हैं। इस वर्ष भी स्थानीय लेखकों के लिए एक निःशुल्क स्टाल उनकी पुस्तकें प्रदर्शित करने और बिक्री के लिए रखवा सकते हैं। इसके साथ ही बच्चों के लिए प्रतिदिन फैंसी ड्रेस, डांस, पेण्टिंग, कार्टून मेकिंग, निबंध लेखन, गायन आदि की विभिन्न प्रतियोगिताएं स्थल पर जगह की कमी के कारण ज्योति किरन रतन के संयोजन में आनलाइन आयोजित की जा रही हैं।
पुस्तक मेले में प्रवेश निःशुल्क है और मेला पुस्तक प्रेमियों के लिए दो अक्टूबर तक प्रतिदिन प्रातः 11 बजे से रात्रि 9 बजे तक खुला रहेगा। बलरामपुर गार्डन के भीतर पार्किंग की पर्याप्त व्यवस्था है।

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