असम में समान नागरिक संहिता (UCC) विधेयक पास: उत्तराखंड और गुजरात के बाद ऐसा करने वाला देश का तीसरा राज्य बना!
⚖️ कानून की 5 सबसे बड़ी बातें
- बहुविवाह पर पूरी रोक: राज्य में अब कोई भी व्यक्ति एक से अधिक शादी नहीं कर पाएगा। इसका उल्लंघन करने पर 7 साल तक की जेल हो सकती है।
- लिव-इन रिलेशनशिप का रजिस्ट्रेशन: लिव-इन में रहने वाले जोड़ों को एक महीने के भीतर रजिस्ट्रेशन कराना अनिवार्य होगा, वरना 3 महीने की जेल हो सकती है।
- शादी की उम्र तय: विवाह के लिए पुरुषों की न्यूनतम उम्र 21 वर्ष और महिलाओं की 18 वर्ष निर्धारित की गई है।
- बेटियों को समान अधिकार: पैतृक और अर्जित संपत्ति में अब बेटियों को बेटों के बराबर कानूनी अधिकार मिलेगा।
- समान कानूनी ढांचा: शादी, तलाक, गोद लेना और उत्तराधिकार जैसे मामलों के लिए सभी धर्मों पर एक ही कानून लागू होगा।
किन्हें दी गई है छूट? 👤
असम में रहने वाली अनुसूचित जनजातियों (ST) को इस कानून के दायरे से पूरी तरह बाहर रखा गया है। सरकार ने स्पष्ट किया है कि जनजातियों के पारंपरिक रीति-रिवाजों और उनके संवैधानिक अधिकारों की रक्षा के लिए यह कदम उठाया गया है।
विपक्ष का हंगामा और ध्वनि मत से पास
सदन में कांग्रेस और अन्य विपक्षी दलों ने इस विधेयक को चयन समिति (Select Committee) के पास भेजने की मांग की थी। विधानसभा अध्यक्ष द्वारा मांग खारिज किए जाने के बाद विपक्ष ने जमकर नारेबाजी की। भारी हंगामे के बीच विधानसभा में इस बिल को ध्वनि मत से पारित कर दिया गया।
मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने इस फैसले को सामाजिक सुधार और महिलाओं के अधिकारों के लिए एक मील का पत्थर बताया है। इसके साथ ही 'असम मुस्लिम विवाह और तलाक पंजीकरण अधिनियम, 2024' को भी निरस्त करने का प्रस्ताव शामिल किया गया है।

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