अटल वन परियोजना से हरित पर्यावरण का संदेश, संत श्री सोमवारी महाराज सेवा संस्थान की अनूठी पहल
- संत श्री सोमवारी महाराज सेवा संस्थान द्वारा बैकुंठ धाम ( भैंसाकुंड) में खाली पड़ी भूमि पर "अटल वन" विकसित करने की योजना।
- परिसर में लगेंगे छायादार वृक्ष, हरे-भरे लॉन और सजावटी पौधे; सुरक्षित की जाएगी उत्कृष्ट जल निकासी व्यवस्था।
- प्रदूषण नियंत्रण, तापमान में कमी और जल संरक्षण के माध्यम से आने वाली पीढ़ियों को मिलेगा स्वस्थ भविष्य।
लखनऊ: पर्यावरण संरक्षण और स्वच्छ परिवेश को बढ़ावा देने के उद्देश्य से संत श्री सोमवारी महाराज सेवा संस्थान ने "अटल वन" विकसित करने की एक बेहद सराहनीय और महत्वाकांक्षी योजना प्रस्तुत की है। इस अनूठी पहल का मुख्य उद्देश्य अनुपयोगी या खाली पड़ी भूमि को हरियाली से आच्छादित कर एक सुंदर, स्वच्छ और पूरी तरह पर्यावरण अनुकूल परिसर का निर्माण करना है।
संस्थान द्वारा जारी प्रस्तावित डिज़ाइन में वर्तमान स्थिति और हरित विकास के बाद की संभावित तस्वीर को बेहतरीन ढंग से दर्शाया गया है। योजना के अनुसार, चिन्हित परिसर के दोनों ओर बड़े व छायादार वृक्ष लगाए जाएंगे, जबकि बीच के हिस्से में सुंदर व हरे-भरे लॉन का विकास किया जाएगा। पूरे क्षेत्र को आकर्षक बनाने के लिए विभिन्न प्रकार के सजावटी पौधों और रंग-बिरंगे पुष्पों का रोपण किया जाएगा।
"इस परियोजना के तहत हरियाली विकसित करने के साथ-साथ जल निकासी व्यवस्था को भी पूरी तरह सुरक्षित और सुदृढ़ रखा जाएगा, ताकि पर्यावरण संरक्षण के मूल उद्देश्यों पर विशेष ध्यान दिया जा सके।"
परियोजना के बहुआयामी लाभ
संस्थान का मानना है कि इस 'अटल वन' परियोजना से न केवल संबंधित क्षेत्र की प्राकृतिक सुंदरता में अभूतपूर्व वृद्धि होगी, बल्कि इसके कई पर्यावरणीय लाभ भी मिलेंगे। बड़े पैमाने पर पौधारोपण होने से स्थानीय स्तर पर प्रदूषण नियंत्रण में मदद मिलेगी, ग्रीष्मकाल में तापमान में कमी आएगी और भूजल स्तर को सुधारने के लिए जल संरक्षण को बढ़ावा मिलेगा। यह स्वच्छ वातावरण आम लोगों के स्वास्थ्य के लिए भी अत्यंत लाभकारी सिद्ध होगा।
नागरिकों से सहभागिता की अपील
संस्थान के पदाधिकारियों ने इस बात पर जोर दिया कि यह पहल आने वाली पीढ़ियों के लिए एक हरित, सुरक्षित एवं स्वस्थ भविष्य सुनिश्चित करने की दिशा में एक मील का पत्थर साबित होगी। संस्थान ने लखनऊ और आसपास के सभी जागरूक नागरिकों से इस पुनीत अभियान में सक्रिय सहभागी बनने की भावुक अपील की है। साथ ही लोगों से अपने स्तर पर भी अधिक से अधिक पौधारोपण करने और प्रकृति के संरक्षण का संकल्प लेने का आह्वान किया है।


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