📘 🐦 📸
तेज़, सटीक और भरोसेमंद खबरें
🔴 Breaking
Loading news...
Voice of Capital को Google पर पसंदीदा स्रोत बनाएं
ताजा खबरों के लिए हमें Google पर Follow करें

Pages

CSIR-NBRI National Seminar: लखनऊ के NBRI में पादप विज्ञान पर राष्ट्रीय संगोष्ठी संपन्न, जानिए नई हरित क्रांति का पूरा रोडमैप

CSIR-NBRI में पादप विज्ञान और हार्मोनल क्रॉस-टॉक पर राष्ट्रीय संगोष्ठी संपन्न: नई हरित क्रांति और बायो-ई3 नीति पर मंथन

पादप विज्ञान में क्रांति लाएगी जीन प्रौद्योगिकी: CSIR-NBRI लखनऊ में 'हार्मोनल क्रॉस-टॉक' पर राष्ट्रीय संगोष्ठी संपन्न; 'BioE3' नीति पर हुआ विशेष मंथन

📍 लखनऊ | 📅 16 जुलाई, 2026
  • सीएसआईआर-एनबीआरआई में दो दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी का सफल समापन; देशभर के शीर्ष वैज्ञानिक और शोधार्थी हुए शामिल।
  • NABI मोहाली के निदेशक डॉ. अश्विनी पारिक का आह्वान: जीनोम विज्ञान और जीन प्रौद्योगिकी से होकर गुजरेगा नई हरित क्रांति का रास्ता।
  • तनाव जीवविज्ञान, स्मॉल पेप्टाइड्स और भारत सरकार की महत्वाकांक्षी 'बायो-ई3 (BioE3)' नीति पर हुआ गहन वैज्ञानिक विचार-विमर्श।

लखनऊ: सीएसआईआर-राष्ट्रीय वनस्पति अनुसंधान संस्थान (CSIR-NBRI), लखनऊ में आयोजित दो दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी "पादप विकास एवं तनाव अनुक्रियाओं के नियमन में हार्मोनल क्रॉस-टॉक" का आज सफलतापूर्वक समापन हो गया। इस प्रतिष्ठित समागम में देशभर के प्रमुख विश्वविद्यालयों, अनुसंधान संस्थानों और सीएसआईआर प्रयोगशालाओं से आए वैज्ञानिकों, शिक्षकों और युवा शोधार्थियों ने हिस्सा लिया। दो दिनों तक चले इस सत्र में पादप हार्मोन सिग्नलिंग, जीनोमिक्स, जैव प्रौद्योगिकी, तनाव जीवविज्ञान तथा सतत कृषि से जुड़े नवीनतम अनुसंधानों पर गहन वैज्ञानिक मंथन किया गया।

युवा वैज्ञानिकों से पूर्ण समर्पण और वैज्ञानिक दृष्टिकोण का आह्वान

कार्यक्रम के आरम्भ में सीएसआईआर-एनबीआरआई के निदेशक डॉ. अजीत कुमार शासनी ने सभी गणमान्य अतिथियों का स्वागत किया। उन्होंने युवा शोधार्थियों को प्रेरित करते हुए कहा कि वे अपने शोध को पूर्ण समर्पण और वैज्ञानिक दृष्टिकोण के साथ आगे बढ़ाएँ। डॉ. शासनी ने इस बात पर जोर दिया कि केवल गुणवत्तापूर्ण अनुसंधान ही भविष्य की वैज्ञानिक एवं कृषि संबंधी चुनौतियों का प्रभावी समाधान प्रस्तुत कर सकता है और राष्ट्र की प्रगति में मील का पत्थर साबित हो सकता है।

नई हरित क्रांति और भारत की 'बायो-ई3 (BioE3)' नीति

समापन समारोह के मुख्य अतिथि ब्रिक-नेशनल एग्री-फूड एंड बायोमैन्युफैक्चरिंग इंस्टीट्यूट (NABI), मोहाली के कार्यकारी निदेशक डॉ. अश्विनी पारिक रहे। उन्होंने "खोजों से आगे: बायोमैन्युफैक्चरिंग के ज़रिए पादप विज्ञान में बदलाव लाने के लिए युवाओं को सशक्त बनाना" विषय पर विशेष व्याख्यान दिया।

"भारत में खाद्य और पोषण सुरक्षा आज सबसे महत्वपूर्ण विषय हैं। देश को एक नई हरित क्रांति की आवश्यकता है, जिसका मार्ग जीनोम विज्ञान एवं जीन प्रौद्योगिकी से होकर गुजरता है। पादप वैज्ञानिकों का परम उद्देश्य ऐसी नवीन तकनीकों का विकास होना चाहिए, जिससे समाज के अंतिम पंक्ति में खड़े व्यक्ति तक जैव-आधारित समाधान और आर्थिक समृद्धि पहुँचाई जा सके।"
- डॉ. अश्विनी पारिक, कार्यकारी निदेशक, NABI

डॉ. पारिक ने कृषि आधारित जैव-अर्थव्यवस्था (Bio-Economy) को भविष्य की कुंजी बताते हुए भारत सरकार की महत्वाकांक्षी 'बायो-ई3 (BioE3)' नीति की विस्तार से जानकारी दी और सतत जैव-अर्थव्यवस्था के निर्माण में NABI द्वारा किए जा रहे अत्याधुनिक नवाचारों को साझा किया।

नवीन वैज्ञानिक सत्र और नवीनतम शोध निष्कर्ष

संगोष्ठी के दौरान हुए तकनीकी सत्रों में देश के जाने-माने पादप विशेषज्ञों ने अपने शोध पत्र प्रस्तुत किए, जिनका संक्षिप्त विवरण नीचे तालिका में दिया गया है:

सत्र एवं वैज्ञानिक संस्थान शोध का मुख्य विषय (Research Focus)
डॉ. प्रबोध कुमार त्रिवेदी सीएसआईआर-सीमैप (CIMAP) पौधों की वृद्धि, तनाव अनुकूलन एवं फसल सुधार में स्मॉल पेप्टाइड्स की भूमिका।
डॉ. जितेन्द्र कुमार ठाकुर आईसीजीईबी (ICGEB), नई दिल्ली पौधों में वृद्धि एवं तनाव प्रतिक्रियाओं के संतुलन में मेडिएटर कॉम्प्लेक्स का महत्व।
प्रो. वाई. श्रीलक्ष्मी हैदराबाद विश्वविद्यालय फोटोट्रोपिन-2 द्वारा संचालित ब्लू-लाइट सिग्नलिंग पर नवीन शोध।
प्रो. सौरव दत्ता आईआईएसईआर (IISER) भोपाल ब्रैसिनोस्टेरॉइड प्रेरित BBX प्रोटीन्स की पौधों की हरियाली (ग्रीनिंग) में भूमिका।
डॉ. आशुतोष पाण्डेय एनआईपीजीआर (NIPGR) केले में साइटोकाइनिन-नियंत्रित एंथोसाइनिन जैवसंश्लेषण।
डॉ. अमर पाल सिंह एनआईपीजीआर (NIPGR) पोषक तत्वों की कमी की परिस्थितियों में हार्मोनल नेटवर्क की भूमिका।
डॉ. श्रीरामैया एन. गंगप्पा आईआईएसईआर कोलकाता तापमान आधारित वृद्धि नियमन के आणविक तंत्र।
डॉ. संतोष बी. सतभाई आईआईएसईआर मोहाली पौधों में लौह (आयरन) समस्थिति को नियंत्रित करने वाले पर्यावरणीय सिग्नलिंग तंत्र।

संगोष्ठी के अंतिम चरण में डॉ. समीर वी. सावंत (मुख्य वैज्ञानिक एवं संगोष्ठी के संयोजक) ने धन्यवाद प्रस्ताव प्रस्तुत किया। उन्होंने सभी आमंत्रित वक्ताओं, शोधार्थियों, आयोजन समिति और स्वयंसेवकों के प्रति आभार व्यक्त करते हुए इस आयोजन को कृषि चुनौतियों के समाधान की दिशा में एक ऐतिहासिक मंच बताया।

एक टिप्पणी भेजें

0 टिप्पणियाँ

📢 WhatsApp से जुड़ें