चातुर्मास कल से: चार माह तक नहीं गूंजेगी शादी की शहनाई, देवशयनी एकादशी पर योगनिद्रा में जाएंगे भगवान विष्णु
लखनऊ। देवशयनी एकादशी के साथ ही 25 जुलाई से चार माह के चातुर्मास का औपचारिक शुभारंभ हो रहा है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस दिन भगवान श्रीहरि विष्णु क्षीरसागर में योगनिद्रा में चले जाते हैं। इसके साथ ही विवाह समेत सभी प्रकार के मांगलिक और शुभ कार्यों पर चार महीने के लिए विराम लग जाता है। इस अवधि में पूजा-पाठ, जप, तप और दान का विशेष महत्व माना गया है।
📅 एकादशी तिथि एवं व्रत पारण मुहूर्त
ज्योतिषाचार्य डॉ. आकाश दुबे के अनुसार:
- एकादशी तिथि प्रारंभ: 24 जुलाई, सुबह 9:12 बजे।
- एकादशी तिथि समाप्त: 25 जुलाई, सुबह 11:34 बजे।
- व्रत तिथि (उदयातिथि): उदयातिथि के आधार पर देवशयनी एकादशी का व्रत 25 जुलाई को रखा जाएगा।
- व्रत का पारण: 26 जुलाई की सुबह किया जाएगा।
🔱 सृष्टि का संचालन संभालेंगे भगवान शिव
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, भगवान विष्णु के योगनिद्रा में रहने के दौरान सृष्टि के संचालन का कार्य भगवान शिव संभालते हैं। इसी अवधि में सावन का पवित्र महीना भी आता है। एक अन्य मान्यता के अनुसार, भगवान विष्णु इस दौरान राजा बलि के द्वार पर निवास करते हैं और कार्तिक शुक्ल एकादशी को पुनः जागृत होते हैं।
इस्कॉन मंदिर अध्यक्ष अपरिमेश श्याम प्रभु ने बताया कि एकादशी व्रत में दशमी का लेशमात्र भी मिश्रण नहीं होना चाहिए, इसलिए हमेशा द्वादशी प्रधान एकादशी का ही व्रत रखना चाहिए। यह एकादशी कृष्ण भावनामृत को बढ़ाने में सहायक होती है। इस अवसर पर मंदिरों में विशेष आयोजन किए जाएंगे।
✨ शुभ योगों का दुर्लभ संयोग और पूजन विधि
ज्योतिषाचार्य एसएस नागपाल के अनुसार, इस वर्ष देवशयनी एकादशी पर ब्रह्म योग, इंद्र योग, पुष्य नक्षत्र तथा सूर्य और उच्च के गुरु का अत्यंत शुभ संयोग बन रहा है।
- पूजन विधि: भगवान विष्णु का पंचामृत, केसर मिश्रित दूध या गंगाजल से अभिषेक कर उन्हें पीले वस्त्र, पीले पुष्प और फल अर्पित करें।
- तुलसी पूजन: शाम को तुलसी के पौधे के सामने घी का दीपक जलाकर ‘ॐ नमो भगवते वासुदेवाय’ मंत्र का जाप और 11 परिक्रमा करें।
- विशेष दान: चना दाल, हल्दी, केला, पीतल और पीले वस्त्र का दान करने से सुख-समृद्धि, मानसिक शांति और आर्थिक बाधाओं से मुक्ति मिलती है।
देवशयनी एकादशी के साथ शुरू होने वाला चातुर्मास चार महीने की धार्मिक साधना और आस्था का विशेष काल माना जाता है। 20 नवंबर (हरि प्रबोधिनी एकादशी) से पुनः शादी-ब्याह जैसे शुभ कार्य शुरू हो सकेंगे।

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