विपरीत परिस्थितियों पर विजय: केजीएमयू के सर्जनों ने 3 घंटे की जटिल सर्जरी में बचाई मरीज की जान, सीने में धंसे चाकू और SVC चोट का किया सफल इलाज
लखनऊ। किंग जॉर्ज चिकित्सा विश्वविद्यालय (केजीएमयू), लखनऊ के लेवल-1 ट्रॉमा सेंटर के डॉक्टरों ने एक बार फिर चिकित्सा जगत में नया कीर्तिमान स्थापित किया है। कुशीनगर से दाहिने वक्ष (छाती) में चाकू घोंपे जाने के बाद गंभीर हालत में रेफर किए गए 57 वर्षीय मरीज का डॉक्टरों ने सफलतापूर्वक इलाज कर नया जीवन दिया है। मरीज जब इमरजेंसी पहुँचा, तब चाकू उसके सीने में ही धँसा हुआ था!
🚨 सुपीरियर वेना कावा (SVC) की अत्यंत दुर्लभ व घातक चोट
मरीज को सुपीरियर वेना कावा (SVC) में चोट लगी थी, जो शरीर के ऊपरी भाग से रक्त को सीधे दिल तक पहुँचाने वाली प्रमुख शिरा होती है। चाकू का सिरा सुपीरियर मीडियास्टिनम तक पहुँच चुका था और महाधमनी (Aorta) तथा कैरोटिड धमनियों के बेहद पास था। चाकू निकालने पर अत्यधिक रक्तस्राव का खतरा था, इसलिए ट्रॉमा टीम ने ऑपरेशन टेबल तक चाकू को उसी स्थिति में रहने दिया।
🩺 3 घंटे की जटिल सर्जरी और 6 यूनिट ब्लड का इस्तेमाल
डॉक्टरों ने सबसे पहले सुरक्षित रूप से मुख्य रक्तवाहिनियों पर नियंत्रण स्थापित किया और फिर अत्यंत सावधानीपूर्वक चाकू बाहर निकाला। चाकू निकालते ही तीव्र रक्तस्राव शुरू हुआ, जिसे तुरंत नियंत्रित कर शिरा की सफल मरम्मत की गई। लगभग 3 घंटे चली इस सर्जरी के दौरान 6 यूनिट रक्त और रक्त अवयवों की आवश्यकता पड़ी। वर्तमान में मरीज पूरी तरह स्वस्थ हो रहा है।
🏆 तीन दशकों में पहला ऐसा सफल मामला
सुपीरियर वेना कावा की ऐसी पैठने वाली (Penetrating) चोटों में मृत्यु दर 30% से 70% तक होती है और अधिकतर मरीज अस्पताल पहुँचने से पहले ही दम तोड़ देते हैं। केजीएमयू ट्रॉमा सर्जनों के 30 वर्षों से अधिक के सामूहिक अनुभव में इस प्रकार का यह पहला सफल ऑपरेशन है। गौरतलब है कि इसी टीम ने 4 जुलाई 2026 को पल्मोनरी वेन की दुर्लभ चोट का भी सफल इलाज किया था।
👨⚕️ बहुविषयक (Multidisciplinary) टीम का शानदार प्रयास
इस अत्यंत चुनौतीपूर्ण मामले का नेतृत्व डॉ. वैभव जायसवाल (अतिरिक्त प्रोफेसर, ट्रॉमा सर्जरी) ने मेजर ट्रॉमा लीड के रूप में किया। पूरी टीम ने प्रो. समीर मिश्रा के मार्गदर्शन में कार्य किया।
- सीटीवीएस (CTVS) विशेषज्ञ: डॉ. भूपेन्द्र कुमार
- ट्रॉमा सर्जरी टीम: डॉ. नरेन्द्र कुमार, डॉ. यदवेन्द्र, डॉ. चरण, डॉ. ताहिर, डॉ. रामबित, डॉ. माहेक एवं डॉ. अर्चना
- एनेस्थीसिया टीम: डॉ. नीलकमल एवं डॉ. दीपाली
- मार्गदर्शन: केजीएमयू की माननीय कुलपति प्रो. सोनिया नित्यानंद का निरंतर प्रशासनिक सहयोग रहा।
“इस मामले में सूक्ष्म योजना, सटीक निष्पादन और उत्कृष्ट टीमवर्क की आवश्यकता थी। सबसे बड़ी चुनौती धँसे हुए चाकू को सुरक्षित रूप से निकालते हुए जानलेवा रक्तस्राव को नियंत्रित करना था। यह सफलता केजीएमयू की बहुविषयक क्षमता का प्रमाण है।”
— डॉ. वैभव जायसवाल (अतिरिक्त प्रोफेसर, ट्रॉमा सर्जरी, KGMU)

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