Meerut News: एसएसपी मेरठ द्वारा अधिवक्ता से 'मारपीट' मामले में मानवाधिकार आयोग सख्त, दर्ज किया केस
लखनऊ, 10 जुलाई 2026: मेरठ कलेक्ट्रेट पर प्रदर्शन के दौरान पुलिस वाहन में मौजूद अधिवक्ता रवि गौतम के साथ एसएसपी मेरठ अविनाश पांडेय द्वारा कथित तौर पर की गई मारपीट और पुलिसिया कार्रवाई का मामला अब मानवाधिकार आयोग पहुंच गया है। पूर्व आईपीएस और आज़ाद अधिकार सेना के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमिताभ ठाकुर की शिकायत को गंभीरता से लेते हुए उत्तर प्रदेश मानव अधिकार आयोग ने मामले को दर्ज कर अपनी प्रक्रिया शुरू कर दी है।
📋 मानवाधिकार आयोग (UPHRC) केस डायरी के मुख्य तथ्य
| ⚖️ दर्ज केस संख्या (Case No.) | 14615/24/54/2026 |
| 👤 शिकायतकर्ता का नाम | अमिताभ ठाकुर (राष्ट्रीय अध्यक्ष, आज़ाद अधिकार सेना) |
| 🧑กฎ पीड़ित अधिवक्ता का नाम | रवि गौतम |
| 👮 आरोपित पुलिस अधिकारी | अविनाश पांडेय (एसएसपी, मेरठ) |
| 📍 घटनास्थल | कलेक्ट्रेट परिसर (मेरठ पुलिस वाहन के भीतर) |
🎯 निष्पक्ष जांच के लिए आयोग से की गई 3 प्रमुख मांगें
- 📹 साक्ष्यों को सुरक्षित करना: घटना से संबंधित सभी प्रकार के वीडियो फुटेज और इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों को तत्काल सुरक्षित कराया जाए, ताकि उनके साथ किसी प्रकार की छेड़छाड़ न हो सके।
- 🗣️ स्वतंत्र बयान दर्ज हो: पीड़ित अधिवक्ता रवि गौतम का बिना किसी स्थानीय पुलिसिया दबाव के पूरी तरह से स्वतंत्र और निष्पक्ष बयान दर्ज कराया जाए।
- 🔍 मेरठ पुलिस से अलग जांच: चूंकि मामला जिले के कप्तान (SSP) से जुड़ा है, इसलिए इस पूरे प्रकरण की मेरठ पुलिस के प्रभाव से बाहर किसी स्वतंत्र एजेंसी से निष्पक्ष जांच कराई जाए।
"गंभीर मानवाधिकार उल्लंघन का मामला"
"पुलिस के प्रभावी नियंत्रण (Custody) में मौजूद किसी भी व्यक्ति या नागरिक के साथ स्वयं जिले के एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी द्वारा कथित तौर पर मारपीट किया जाना बेहद गंभीर मामला है। यह न केवल मानवाधिकारों का खुला उल्लंघन है, बल्कि पुलिस जवाबदेही पर भी एक बड़ा प्रश्नचिह्न लगाता है। मानवाधिकार आयोग को इस प्रकरण की निष्पक्ष जांच कराकर उत्तरदायित्व निर्धारित करना चाहिए और दोषी पर समुचित दंडात्मक कार्रवाई करनी चाहिए।"
— अमिताभ ठाकुर, राष्ट्रीय अध्यक्ष (आज़ाद अधिकार सेना)
मानवाधिकार आयोग द्वारा इस मामले में औपचारिक केस दर्ज करने के बाद अब उत्तर प्रदेश के प्रशासनिक और विधिक हलकों में हलचल तेज हो गई है। अधिवक्ताओं और सामाजिक संगठनों ने आयोग के इस कदम का स्वागत किया है और उम्मीद जताई है कि पीड़ित वकील को जल्द से जल्द न्याय मिलेगा तथा दोषी अधिकारियों की जवाबदेही तय होगी।

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