उत्पीड़न के बल पर बिजली व्यवस्था चलाना संभव नहीं: विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति ने पावर कॉरपोरेशन प्रबंधन को दी बड़ी चेतावनी, लगाए गंभीर आरोप
- भीषण गर्मी और रिकॉर्ड मांग के बीच काम कर रहे बिजली कर्मियों के लगातार उत्पीड़न से कर्मचारियों में भारी आक्रोश।
- राजधानी लखनऊ में ही करीब 40 प्रतिशत संविदा कर्मचारियों की कर दी गई कमी, सीमित कर्मचारियों पर बढ़ा दबाव।
- वर्टिकल री-स्ट्रक्चरिंग के नाम पर बिखरी व्यवस्था; फॉल्ट, मेंटेनेंस और बिलिंग अलग होने से उपभोक्ता हो रहे परेशान।
लखनऊ: विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति, उत्तर प्रदेश के केंद्रीय पदाधिकारियों ने पावर कॉरपोरेशन के शीर्ष प्रबंधन पर गंभीर आरोप लगाए हैं। संघर्ष समिति का कहना है कि प्रदेश में पड़ रही भीषण गर्मी और रिकॉर्ड बिजली मांग के बीच दिन-रात मेहनत कर बिजली व्यवस्था को संभाल रहे कर्मचारियों का सहयोग लेने के बजाय प्रबंधन द्वारा उनका लगातार उत्पीड़न किया जा रहा है। इससे बिजली कर्मियों में भारी आक्रोश व्याप्त है।
- विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति
संसाधनों की कमी और बढ़ते हादसों पर चिंता
संघर्ष समिति ने कहा कि एक तरफ प्रदेश में बिजली की मांग लगातार नए रिकॉर्ड बना रही है, तो दूसरी तरफ कर्मचारियों और संविदा कर्मियों की संख्या में भारी कमी कर दी गई है। फॉल्ट बढ़ने, लगातार ओवरलोडिंग होने और बिना पर्याप्त सुरक्षा संसाधनों के जल्दबाजी में फॉल्ट ठीक करने के दबाव के कारण बिजली कर्मी आए दिन हादसों और मौत का शिकार हो रहे हैं।
राजधानी लखनऊ में 40% संविदा कर्मियों की कटौती
संघर्ष समिति के अनुसार, अकेले राजधानी लखनऊ में ही लगभग 40 प्रतिशत संविदा कर्मियों की कमी कर दी गई है। पहले के वर्षों में गर्मियों के दौरान अतिरिक्त गैंग और संविदा कर्मियों की विशेष व्यवस्था की जाती थी, लेकिन इस बार उल्टा कर्मचारियों की संख्या ही घटा दी गई। समिति ने सवाल उठाया कि ऐसे सीमित संसाधनों और कम कर्मचारियों के भरोसे चौबीसों घंटे निर्बाध बिजली आपूर्ति बनाए रखने की अपेक्षा करना पूरी तरह से अव्यावहारिक और अन्यायपूर्ण है।
'वर्टिकल री-स्ट्रक्चरिंग' से बिखरी व्यवस्था, बढ़े विवाद
पदाधिकारियों ने आरोप लगाया कि तथाकथित वर्टिकल री-स्ट्रक्चरिंग के नाम पर 11 केवी और 33 केवी मेंटेनेंस, सप्लाई, बिलिंग और मीटरिंग कार्यों को अलग-अलग कर दिया गया है। इस प्रयोग से व्यवस्था पूरी तरह बिखर गई है। आम उपभोक्ताओं को यह तक समझ में नहीं आ रहा है कि कोई समस्या होने पर वे किस विभाग या अधिकारी से संपर्क करें। इसका नतीजा यह हो रहा है कि उपभोक्ताओं का गुस्सा सीधे फील्ड में तैनात कर्मचारियों पर उतर रहा है। कई स्थानों पर बिजली घरों का घेराव, कर्मचारियों के साथ अभद्रता और मारपीट की घटनाएं लगातार बढ़ रही हैं।
जनता और जनप्रतिनिधियों से सहयोग की अपील
संघर्ष समिति ने वर्तमान अव्यवस्था के लिए सीधे तौर पर पावर कॉरपोरेशन प्रबंधन को जिम्मेदार ठहराया है। उन्होंने कहा कि आम जनता और जनप्रतिनिधियों को इस बात की सही जानकारी नहीं दी जा रही है कि संकट के इस दौर में स्टाफ बढ़ाया नहीं गया, बल्कि कम कर दिया गया है। समिति ने प्रदेश की जनता से अपील की है कि सीमित संसाधनों और अत्यधिक मानसिक दबाव के बीच सेवाएं दे रहे बिजली कर्मचारियों का सहयोग करें।
इसके साथ ही उन्होंने प्रदेश के सांसदों और विधायकों से भी गुहार लगाई है कि वे सरकार तक बिजली कर्मचारियों की वास्तविक समस्याओं को पहुंचाएं। समिति ने याद दिलाया कि मार्च 2023 के आंदोलन के बाद उत्पीड़नात्मक कार्रवाइयां वापस लेने का जो आश्वासन दिया गया था, उसे पूरा करने के बजाय अब नई दमनात्मक कार्रवाइयां की जा रही हैं, जिसे बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।


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