यूपी में बिजली कर्मचारियों का हुंकार: ऊर्जा क्षेत्र की ऐतिहासिक सफलताओं का श्रेय हमारा; निजीकरण का फैसला वापस ले और उत्पीड़न बंद करे प्रबंधन
- उपलब्धियों का वास्तविक श्रेय: विद्युत उत्पादन, वितरण और आधुनिकीकरण में उत्तर प्रदेश की प्रगति बिजली कर्मियों, संविदा श्रमिकों और अभियंताओं के अथक परिश्रम का नतीजा।
- निजीकरण का विरोध: पूर्वांचल और दक्षिणांचल विद्युत वितरण निगम के निजीकरण के फैसले को तत्काल वापस लेने की पुरजोर मांग।
- दंडात्मक कार्रवाई निरस्त करने की मांग: मार्च 2023 के आंदोलन के दौरान कर्मचारियों पर की गई सभी उत्पीड़नात्मक कार्यवाहियां तुरंत रद्द करे प्रबंधन।
लखनऊ: उत्तर प्रदेश सरकार के सूचना एवं जनसंपर्क विभाग द्वारा ऊर्जा क्षेत्र में प्रदेश की ऐतिहासिक उपलब्धियों पर जारी रिपोर्ट का विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति ने स्वागत किया है। संघर्ष समिति ने कहा कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के कुशल नेतृत्व एवं मार्गदर्शन में राज्य ने विद्युत उत्पादन, पारेषण और उपभोक्ता सेवाओं में नई ऊंचाइयों को छुआ है। हालांकि, समिति ने स्पष्ट किया कि इन सभी रिकॉर्डतोड़ सफलताओं के पीछे प्रदेश के लाखों बिजली कर्मचारियों, संविदा कर्मियों, तकनीशियनों और अभियंताओं की चौबीसों घंटे की कर्तव्यनिष्ठा और अथक परिश्रम ही सबसे बड़ा आधार है।
सफल वितरण निगमों के निजीकरण का कोई औचित्य नहीं
संघर्ष समिति ने सरकार को आड़े हाथों लेते हुए कहा कि जब बिजली कर्मचारियों की कार्यकुशलता से विभाग लगातार लाभ और प्रगति के नए कीर्तिमान स्थापित कर रहा है, तो ऐसे सफल विद्युत वितरण निगमों को निजी हाथों में सौंपने का कोई तार्किक औचित्य नहीं रह जाता। पूर्वांचल विद्युत वितरण निगम एवं दक्षिणांचल विद्युत वितरण निगम के निजीकरण का प्रयास न केवल रात-दिन पसीना बहाने वाले कर्मचारियों का मनोबल तोड़ेगा, बल्कि आम उपभोक्ताओं के हितों के भी पूरी तरह प्रतिकूल साबित होगा।
- विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति
मार्च 2023 आंदोलन की कार्रवाई वापस लेने की मांग
विद्युत कर्मचारी नेताओं ने याद दिलाया कि मार्च, 2023 के आंदोलन सहित विभिन्न प्रदर्शनों के दौरान बिजली कर्मचारियों, जूनियर इंजीनियरों और अधिकारियों पर प्रबंधन द्वारा कई दंडात्मक व उत्पीड़नात्मक कार्यवाहियां की गई थीं। स्वयं ऊर्जा मंत्री श्री अरविंद कुमार शर्मा ने संयुक्त प्रेस वार्ता में उत्तर प्रदेश पावर कॉरपोरेशन (UPPCL) के अध्यक्ष को इन सभी कार्यवाहियों को तत्काल वापस लेने का स्पष्ट निर्देश दिया था, लेकिन दुर्भाग्यवश आज तक उन निर्देशों का पूर्ण अनुपालन नहीं किया गया है।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से हस्तक्षेप की गुहार
संघर्ष समिति ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से सीधे हस्तक्षेप का आग्रह किया है। समिति की मुख्य मांगें हैं कि पूर्वांचल और दक्षिणांचल के निजीकरण के प्रस्ताव को पूरी तरह निरस्त किया जाए, कर्मचारियों पर लंबित सभी उत्पीड़नात्मक और दंडात्मक मुकदमों/कार्रवाइयों को समाप्त किया जाए, और ऊर्जा मंत्री द्वारा दिए गए वादों का शत-प्रतिशत अनुपालन सुनिश्चित कर विभाग के भीतर एक सकारात्मक और सौहार्दपूर्ण कार्य वातावरण स्थापित किया जाए।


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