UP EV Subsidy Scheme: यूपी में इलेक्ट्रिक वाहनों की मची धूम, आवेदन में लखनऊ नंबर-1; मिल रही है ₹20 लाख तक की सब्सिडी
- 🌱 योगी सरकार की बड़ी राहत: इलेक्ट्रिक वाहनों को बढ़ावा देने के लिए ₹5,000 से लेकर ₹20 लाख तक की भारी सब्सिडी दी जा रही है।
- 📍 लखनऊ सबसे आगे: ईवी क्रय सब्सिडी योजना का लाभ उठाने के लिए राजधानी लखनऊ से सबसे ज्यादा आवेदन मिले हैं, जबकि नोएडा, आगरा और गाजियाबाद भी टॉप पर हैं।
- 📉 कच्चे तेल की बचत: सरकार का लक्ष्य वर्ष 2030 तक देश में कच्चे तेल के आयात में करीब ₹1 लाख करोड़ तक की बचत करना है।
लखनऊ, 8 जुलाई: मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश सरकार की 'इलेक्ट्रिक वाहन विनिर्माण एवं मोबिलिटी प्रोत्साहन नीति-2022' का असर अब जमीन पर दिखने लगा है। परिवहन विभाग के ताजा आंकड़ों के अनुसार, प्रदेश के बड़े शहरों के साथ-साथ छोटे जिलों में भी लोग पेट्रोल-डीजल की जगह इलेक्ट्रिक वाहनों (EV) पर तेजी से भरोसा जता रहे हैं।
📊 EV Subsidy के लिए किस शहर से आए कितने आवेदन?
| शीर्ष शहर / आरटीओ (RTO) | प्राप्त आवेदन |
|---|---|
| 👑 लखनऊ (ट्रांसपोर्ट नगर RTO) | 12,520 |
| 📍 आगरा | 10,752 |
| 📍 गौतमबुद्ध नगर (नोएडा) | 6,088 |
| 📍 गाजियाबाद | 5,556 |
| 📍 वाराणसी | 4,059 |
| 📍 कानपुर नगर | 3,895 |
| 📍 लखनऊ महानगर (ARTO) | 3,839 |
छोटे शहरों में भी बढ़ा क्रेज: बड़े महानगरों के अलावा मऊ (817), गाजीपुर (750), कुशीनगर (547), उन्नाव (387), महाराजगंज (170), संत कबीर नगर (101) और सिद्धार्थनगर (74) जैसे जिलों में भी लोग तेजी से इलेक्ट्रिक वाहन अपना रहे हैं।
💰 EV खरीदारों को क्या मिल रहे हैं फायदे?
- 💸 टैक्स में भारी छूट: इलेक्ट्रिक वाहनों की खरीद पर रोड टैक्स (Road Tax) और पंजीकरण शुल्क (Registration Fee) में 100% की पूरी छूट मिल रही है।
- 💸 ₹18,000 तक की सीधी बचत: राज्य सब्सिडी के साथ-साथ स्मार्ट कार्ड आरसी और एचएसआरपी नंबर प्लेट शुल्क में राहत मिलने से एक दोपहिया ईवी पर करीब 18 हजार रुपये तक की बचत हो रही है।
- 💸 कम परिचालन लागत: पेट्रोल और डीजल की तुलना में इलेक्ट्रिक वाहनों को चलाने का खर्च (Per KM Cost) बेहद कम है, जिससे हर साल आम जनता के हजारों रुपये बच रहे हैं।
"यूपी सरकार की योजना के तहत गैर-सरकारी ई-बसों पर 20 लाख रुपये तक, चार पहिया गाड़ियों (Cars) पर 1 लाख रुपये तक और दोपहिया वाहनों पर 5 हजार रुपये तक की छूट दी जा रही है। आम जनता को इस सब्सिडी का ज्यादा से ज्यादा लाभ उठाना चाहिए ताकि हम 'ज़ीरो एमिशन' (Zero Emission) के लक्ष्य को पाकर पर्यावरण को स्वच्छ रख सकें।" - दयाशंकर सिंह (परिवहन मंत्री, उत्तर प्रदेश)
🌍 पर्यावरण संरक्षण और ₹1 लाख करोड़ की बचत का लक्ष्य
सरकार की इस नीति का मकसद सिर्फ आर्थिक लाभ देना नहीं बल्कि पर्यावरण को प्रदूषण मुक्त बनाना भी है। परिवहन विभाग के अनुसार, यदि वर्ष 2030 तक देश में इलेक्ट्रिक वाहनों की कुल हिस्सेदारी 20% तक पहुंच जाती है, तो विदेशों से मंगाए जाने वाले कच्चे तेल (Crude Oil) के आयात बिल में लगभग एक लाख करोड़ रुपये तक की ऐतिहासिक बचत होगी। इस महा-लक्ष्य में उत्तर प्रदेश अपनी सबसे महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है।

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