यूपी में मिलावटखोरों पर योगी सरकार का महा-एक्शन: ₹11.66 करोड़ की खाद्य सामग्री जब्त, 6 जिलों में FIR दर्ज, वाटर प्लांट सील
- ऐतिहासिक कार्रवाई: विशेष अभियान में 2,929.86 कुंतल अपमिश्रित खाद्य सामग्री जब्त, ₹63.17 लाख का माल मौके पर ही नष्ट।
- जीरो टॉलरेंस: प्रदेशभर में कुल 3,537 निरीक्षण और 2,075 ताबड़तोड़ छापेमारी; 2,965 नमूनों को जांच के लिए लैब भेजा गया।
- संगठित सिंडिकेट पर चोट: छोटे दुकानदारों को परेशान करने के बजाय नकली पनीर, रिफाइंड घी और सिंथेटिक सौंफ बनाने वाले बड़े अपराधियों पर शिकंजा।
लखनऊ: उत्तर प्रदेश में आम जनता के स्वास्थ्य से खिलवाड़ करने वाले मिलावटखोरों के खिलाफ मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की 'जीरो टॉलरेंस' नीति के तहत अब तक का सबसे बड़ा और व्यापक अभियान चलाया गया है। खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन (FSDA) द्वारा चलाए गए इस विशेष अभियान में विभाग ने कड़ा रुख अपनाते हुए ₹11.66 करोड़ मूल्य की कुल 2,929.86 कुंतल संदिग्ध खाद्य सामग्री जब्त की है। इसके साथ ही, मानव उपभोग के लिए पूरी तरह असुरक्षित पायी गई ₹63.17 लाख मूल्य की 551.71 कुंतल सामग्री को मौके पर ही बुलडोजर चलाकर या गड्ढे में दबवाकर नष्ट करा दिया गया है।
विश्व खाद्य सुरक्षा दिवस के संकल्प पर कड़ा एक्शन
यह महा-अभियान विश्व खाद्य सुरक्षा दिवस (7 जून) पर सरकार द्वारा लिए गए संकल्प के अनुरूप प्रदेश के सभी कोनों में एक साथ संचालित किया गया। एफएसडीए की आयुक्त डॉ. रोशन जैकब ने बताया कि इस कार्रवाई का मुख्य उद्देश्य केवल दंडात्मक कार्रवाई करना नहीं, बल्कि बाजार में बिक रहे खुले एवं पैक्ड मसालों, दूध, पनीर, खाद्य तेल, और पैकेज्ड पेयजल पर उपभोक्ताओं का भरोसा दोबारा कायम करना है। गंभीर अनियमितताओं के चलते विभाग ने प्रदेश भर में बड़े मिलावटखोरों के खिलाफ 6 जिलों में नामजद प्राथमिकी (FIR) भी दर्ज कराई है।
- डॉ. रोशन जैकब, आयुक्त, एफएसडीए
दूध, पनीर और खाद्य तेल के ब्रांड्स पर शिकंजा
अभियान के तहत सबसे बड़ी चोट दूध और दुग्ध उत्पादों के सिंडिकेट पर की गई। टीमों ने 572 छापों के दौरान 1,876.66 क्विंटल दूध एवं दुग्ध उत्पाद (कीमत करीब ₹10.66 करोड़) जब्त किए। वहीं, खाद्य तेलों की गुणवत्ता परखने के लिए बनाई गई 58 विशेष टीमों ने 64 बड़ी निर्माण इकाइयों का औचक निरीक्षण किया और नियमों के उल्लंघन पर 14 इकाइयों के विभिन्न ब्रांडों पर तत्काल प्रभाव से प्रतिबंध लगा दिया। इसके अलावा, घी के 11 नामचीन ब्रांडों के सैंपल फेल होने पर उनके निर्माण, भंडारण और बिक्री पर पूरी तरह से रोक लगा दी गई है।
पानी बेचने वाली कंपनियों पर गिरी गाज
पैकेज्ड पेयजल (Packaged Drinking Water) और मिनरल वाटर बनाने वाली इकाइयों की जांच में चौंकाने वाले तथ्य सामने आए। कुल 520 इकाइयों के निरीक्षण में 119 नमूने मानव स्वास्थ्य के लिए असुरक्षित और 194 नमूने मानक से बेहद कम (अधोमानक) पाए गए। त्वरित कार्रवाई करते हुए विभाग ने 57 पानी फैक्ट्रियों को पूरी तरह सील कर दिया, 41 का लाइसेंस सस्पेंड किया और 37 इकाइयों में प्रोडक्शन तुरंत बंद करा दिया है।
इन 6 जिलों में दर्ज हुई एफआईआर (प्रमुख केस)
गंभीर खाद्य अपराधों और नकली सामग्री बनाने के पुख्ता सबूत मिलने पर विभाग ने निम्नलिखित जिलों में कानूनी मुकदमा दर्ज कराया है:
| ज़िला | की गई प्रमुख कार्रवाई / अपराध का स्वरूप |
|---|---|
| शाहजहांपुर | कैमिकल और हानिकारक सिंथेटिक रंग से रंगे जा रहे 400 किलोग्राम सौंफ को जब्त कर FIR दर्ज। |
| मथुरा | पूर्व में प्रशासन द्वारा लगाई गई सील को गैर-कानूनी तरीके से तोड़कर बिना लाइसेंस डेयरी चलाने का भंडाफोड़। |
| अमरोहा | प्रतिबंधित और खतरनाक पदार्थों से बटर (मक्खन) का निर्माण; भारी मात्रा में व्हे पाउडर और स्क्रैप पाउडर बरामद। |
| अलीगढ़ | केमिकल युक्त और सेहत को नुकसान पहुंचाने वाला नकली पनीर बनाने वाली अवैध फैक्ट्री पर छापा। |
| बदायूं | रिफाइंड ऑयल, डिटर्जेंट जैसे खतरनाक अपमिश्रकों से नकली दूध एवं घी तैयार करने वाले गिरोह पर एक्शन। |
| उन्नाव | प्रशासन द्वारा पूर्व में सील की जा चुकी सॉस फैक्ट्री को दोबारा गुपचुप तरीके से संचालित करने पर मुकदमा दर्ज। |

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