UP Power Crisis: विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति का बड़ा ऐलान, रिक्त पदों को भरने और संविदा कर्मियों की बहाली की मांग
लखनऊ, 9 जुलाई 2026: विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति, उत्तर प्रदेश ने एक प्रेस विज्ञप्ति जारी कर प्रदेश की बिजली व्यवस्था पर गंभीर चिंता व्यक्त की है। समिति ने आरोप लगाया है कि पावर कॉरपोरेशन प्रबंधन की लापरवाही के कारण नियमित भर्तियां रुकी हुई हैं और अनुभवी संविदा कर्मियों को निजीकरण के नाम पर हटाया गया है, जिससे उपभोक्ता सेवाओं पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा है।
📊 बिजली विभाग: तब और अब का तुलनात्मक डेटा
| विवरण | वर्ष 2000 | वर्ष 2026 |
|---|---|---|
| उपभोक्ताओं की संख्या | 60 लाख | 373 लाख |
| नियमित कर्मचारियों की संख्या | 1,20,000 | 30,000 (से कम) |
📢 संघर्ष समिति की 3 मुख्य मांगें
- ✅ रिक्त पदों पर भर्ती: पावर कॉरपोरेशन में विभिन्न श्रेणियों के रिक्त पड़े 73,000 पदों को तत्काल भरा जाए। विशेषकर सहायक अभियंता (विद्युत एवं यांत्रिकी) के स्वीकृत 1427 पदों में से 518 रिक्त पदों पर भर्ती प्रक्रिया शुरू हो।
- ✅ संविदा कर्मियों की वापसी: निजीकरण और वर्टिकल रिस्ट्रक्चरिंग के नाम पर पिछले दो वर्षों में हटाए गए 25,000 से अधिक अनुभवी संविदा कर्मियों को पुनः कार्य पर लिया जाए।
- ✅ अनुशासनात्मक कार्रवाई वापस: मार्च 2023 के आंदोलन के बाद कर्मचारियों और अभियंताओं पर की गई उत्पीड़नात्मक कार्रवाइयों को समाप्त किया जाए। समिति का कहना है कि ऊर्जा मंत्री श्री अरविंद कुमार शर्मा के 19 मार्च 2023 के निर्देशों का प्रबंधन द्वारा अब तक पालन नहीं किया गया है।
अधूरा पालन: "मार्च 2023 के आंदोलन के उपरांत कर्मचारियों और अभियंताओं पर की गई अनुशासनात्मक कार्रवाइयों को वापस लेने के लिए 19 मार्च 2023 को ऊर्जा मंत्री श्री अरविंद कुमार शर्मा द्वारा स्पष्ट निर्देश जारी किए गए थे, लेकिन पावर कॉरपोरेशन प्रबंधन ने आज तक उनका पूर्ण पालन नहीं किया है, जिससे कर्मचारियों में असंतोष व्याप्त है।"
— विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति
संघर्ष समिति ने स्पष्ट किया है कि भीषण गर्मी के बीच बिजली की बढ़ती मांग को देखते हुए सरकार को युद्धस्तर पर इन समस्याओं का समाधान करना होगा। केवल नियमित भर्ती और कर्मचारियों के सम्मानजनक कार्य वातावरण से ही प्रदेश की बिजली व्यवस्था को सुदृढ़, सुरक्षित और उपभोक्ता हित में बनाया जा सकता है।


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