UP Sugar Mills News: घटिया खाद-कीटनाशक बांटने वाली चीनी मिलों पर योगी सरकार सख्त, नियम तोड़ा तो जब्त होगी बैंक गारंटी
लखनऊ: उत्तर प्रदेश के गन्ना किसानों को अब केवल प्रमाणित और उच्च गुणवत्ता जांच से गुजर चुके उर्वरक, जैव उर्वरक, सूक्ष्म पोषक तत्व और कीटनाशक ही मिल सकेंगे। गन्ना आयुक्त मिनिस्ती एस द्वारा जारी नए आधिकारिक दिशा-निर्देशों के अनुसार, कृषि निवेश की गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिए प्रत्येक बैच की जांच एनएबीएल (NABL) मान्यता प्राप्त प्रयोगशालाओं में कराना अनिवार्य कर दिया गया है।
📋 नए शासनादेश के तहत निर्धारित कानूनी एवं तकनीकी मानक
| विषय | लागू नियम व मानक |
|---|---|
| 🔬 प्रयोगशाला जांच | प्रत्येक बैच की गुणवत्ता जांच NABL मान्यता प्राप्त लैब से कराना अनिवार्य। |
| 📜 अनिवार्य अधिनियम | उर्वरक (नियंत्रण) आदेश-1985 और कीटनाशक अधिनियम-1968 के मानकों का पालन। |
| 🚫 प्रतिबंधित सामग्री | भारत सरकार द्वारा प्रतिबंधित सभी कीटनाशकों के वितरण पर पूर्ण रोक। |
| 🔍 निगरानी अधिकारी | जिला गन्ना अधिकारी (DCO) और उप गन्ना आयुक्त द्वारा नियमित निरीक्षण। |
🎯 गन्ना आयुक्त द्वारा जारी गाइडलाइंस की 5 बड़ी बातें:
- 🤝 किसान की सहमति अनिवार्य: अब किसी भी किसान को उसकी मांग और लिखित सहमति के बिना जबरन कोई भी खाद या कीटनाशक नहीं थमाया जा सकेगा। मिलों द्वारा अपना व्यावसायिक लक्ष्य पूरा करने के लिए किया जाने वाला अनावश्यक वितरण अब प्रतिबंधित होगा।
- 📏 क्षेत्रफल के अनुसार ही वितरण: कृषि सामग्री केवल किसान की वास्तविक आवश्यकता और उसके पास उपलब्ध कुल गन्ना क्षेत्रफल के रिकॉर्ड के अनुरूप ही दी जाएगी।
- 🏢 चीनी मिलों की सीधी जवाबदेही: बांटे जाने वाले उत्पादों की गुणवत्ता की पूरी जिम्मेदारी संबंधित चीनी मिल की होगी, चाहे वे वितरण खुद करें या किसी बाहरी वेंडर अथवा एजेंसी के माध्यम से करवाएं।
- 📉 रिकवरी सुविधा होगी बंद: यदि कोई मिल घटिया सामग्री बांटती है, तो उससे गन्ना मूल्य से कृषि निवेश की धनराशि वसूलने या समायोजित (Adjustment) करने की सरकारी सुविधा तुरंत छीन ली जाएगी।
- 📱 सोशल मीडिया और भ्रामक विज्ञापनों पर नजर: गन्ना एवं कृषि विभाग संयुक्त रूप से बाजारों में सैंपलिंग करेगा। साथ ही सोशल मीडिया या विज्ञापनों के जरिए भ्रामक प्रचार करने वाले विक्रेताओं पर कानूनी केस दर्ज होगा।
"खेती की लागत घटेगी और बढ़ेगी किसानों की आय"
"राज्य सरकार का स्पष्ट मानना है कि इस नई और पारदर्शी व्यवस्था से गन्ने की खेती अधिक वैज्ञानिक और पारदर्शी बनेगी। जब किसानों को समय पर केवल लैब-प्रमाणित और वैज्ञानिकों (आईसीएआर व उत्तर प्रदेश गन्ना शोध परिषद) द्वारा अनुशंसित फसल सुरक्षा उत्पाद मिलेंगे, तो उनकी लागत नियंत्रित होगी, जिससे फसल की उत्पादकता बढ़ेगी और अंततः किसानों की आय में सीधे तौर पर वृद्धि सुनिश्चित होगी।"
— गन्ना विकास विभाग, उत्तर प्रदेश शासन
विभाग की इस सख्त चेतावनी के बाद प्रदेश भर की चीनी मिलों और कृषि इनपुट सप्लाई करने वाली निजी एजेंसियों में हड़कंप मच गया है। सरकार के इस कदम से उन लाखों गन्ना किसानों को बड़ी राहत मिलेगी जिन्हें अक्सर मिलों के स्तर पर बिना जरूरत के या कम गुणवत्ता वाले महंगे कृषि उत्पाद थमा दिए जाते थे।

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