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Wardha News: महात्मा गांधी अंतरराष्ट्रीय हिंदी विश्वविद्यालय में महिला सुरक्षा और समावेशी परिसर पर विशेष व्याख्यान

वर्धा: 'महिलाओं के लिए सुरक्षित, स्वस्थ एवं समावेशी विश्वविद्यालय' विषय पर विशेष व्याख्यान, प्रो. सुषमा यादव और प्रो. कुमुद शर्मा ने साझा किए विचार

'महिलाओं के लिए सुरक्षित, स्‍वस्‍थ एवं समावेशी विश्‍वविद्यालय' विषय पर हुआ विशिष्‍ट व्‍याख्‍यान; प्रो. सुषमा यादव बोलीं- खुले मन से संवाद का वातावरण बनाना आवश्यक

📍 वर्धा | 📅 17 जुलाई, 2026
  • मुख्य संदेश: महिलाओं के लिए सुरक्षित, स्वस्थ और समावेशी माहौल के लिए शिक्षक, विद्यार्थी और समाज की सामूहिक भागीदारी और स्वस्थ संवाद जरूरी।
  • आयोजन का उद्देश्य: शिक्षा मंत्रालय (भारत सरकार) द्वारा सुरक्षित शैक्षणिक वातावरण के निर्माण हेतु जारी दिशा-निर्देशों के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए व्याख्यान संपन्न।
  • महत्वपूर्ण दृष्टिकोण: शैक्षणिक उत्कृष्टता के साथ-साथ मानवीय मूल्यों, नैतिकता और स्वस्थ पारिस्थितिकी (Ecosystem) के निर्माण पर वक्ताओं ने दिया बल।

वर्धा: महात्मा गांधी अंतरराष्ट्रीय हिंदी विश्वविद्यालय में ‘महिलाओं के लिए सुरक्षित, स्‍वस्‍थ एवं समावेशी विश्‍वविद्यालय : चुनौतियाँ एवं समाधान’ विषय पर एक विशिष्ट व्याख्यान का आयोजन किया गया। विश्‍वविद्यालय की आंतरिक शिकायत समिति (ICC) के तत्त्वावधान में आयोजित इस कार्यक्रम में मुख्य वक्ता के रूप में यूजीसी स्टीयरिंग कमेटी की अध्यक्ष एवं बीपीएस महिला विश्वविद्यालय, खानपुर (हरियाणा) की पूर्व कुलपति प्रो. सुषमा यादव उपस्थित रहीं। उन्होंने अपने संबोधन में इस बात पर जोर दिया कि परिसरों को समावेशी और सुरक्षित बनाने के लिए खुले मन से संवाद की संस्कृति को विकसित करना समय की मांग है।

"विश्वविद्यालय केवल शोध केंद्र नहीं, अपितु युवा मन को गढ़ने का स्थान है जहां उनका भविष्य तय होता है। सुरक्षित वातावरण के लिए हमें संभावनाओं और आकांक्षाओं के साथ-साथ विद्यार्थियों की चिंताओं को भी गहराई से समझना होगा।"
- प्रो. सुषमा यादव, अध्यक्ष, यूजीसी स्टीयरिंग कमेटी

मूल्यों और राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 पर विमर्श

प्रो. सुषमा यादव ने राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP 2020) के विभिन्न प्रावधानों का उल्लेख करते हुए कहा कि विश्वविद्यालय में कदम रखने वाले नए विद्यार्थियों से नैतिकता और जीवन मूल्यों पर नियमित बातचीत होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि शिक्षकों का विद्यार्थियों के साथ संबंध माता-पिता की तरह स्नेहमयी और मार्गदर्शक का होना चाहिए। शिक्षा की शक्ति को रेखांकित करते हुए उन्होंने बाबासाहब डॉ. भीमराव आंबेडकर, सावित्रीबाई फुले, स्वामी विवेकानंद और रवीन्द्रनाथ टैगोर के विचारों का उद्धरण दिया और कहा कि सही मायनों में शिक्षा ही व्यक्ति की मानसिकता और उसके परिवेश को बदल सकती है।

कुलपति प्रो. कुमुद शर्मा का अध्यक्षीय उद्बोधन

कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रही विश्वविद्यालय की कुलपति प्रो. कुमुद शर्मा ने अपने संबोधन में कहा कि शिक्षा एक सार्वजनिक सेवा है, जो समाज में बराबरी सुनिश्चित करने का सबसे सशक्त माध्यम है। उन्होंने स्पष्ट किया कि विश्वविद्यालय परिसर को सुरक्षित और स्वस्थ बनाना किसी एक व्यक्ति का नहीं, बल्कि हम सबकी सामूहिक जिम्मेदारी है। राष्ट्रीय शिक्षा नीति के समावेशी उद्देश्यों की सराहना करते हुए उन्होंने परिसर में शैक्षणिक और व्यक्तिगत उत्कृष्टता के लिए एक सकारात्मक माहौल बनाने की बात कही। कार्यक्रम के दौरान कुलपति प्रो. शर्मा ने मुख्य अतिथि प्रो. सुषमा यादव का सूतमाला और विश्वविद्यालय का प्रतीक चिन्ह भेंट कर आदरपूर्वक स्वागत किया।

मानवीय दृष्टिकोण और सुरक्षित पारिस्थितिकी की आवश्यकता

विशिष्ट वक्ता के रूप में उपस्थित महात्मा गांधी आयुर्विज्ञान संस्थान, सेवाग्राम के मनोरोग विभाग के एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. हर्षल साठे ने तकनीकी और व्यावहारिक पहलुओं पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि नियमों और कानूनों का कड़ाई से पालन होना जितना जरूरी है, उतना ही आवश्यक समस्याओं का मानवीय और मनोवैज्ञानिक दृष्टिकोण से समाधान करना भी है। उन्होंने महिलाओं की सुरक्षा के लिहाज से एक सुदृढ़ और सुरक्षित पारिस्थितिकी (Safe Ecology) के निर्माण पर विशेष बल दिया।

कार्यक्रम का सफल संचालन और गरिमामयी उपस्थिति

इससे पूर्व, कार्यक्रम की शुरुआत मुख्य अतिथियों द्वारा दीप प्रज्ज्वलन और कुलगीत के गायन के साथ हुई। साहित्य विद्यापीठ के अधिष्ठाता प्रो. अवधेश कुमार ने सभी अतिथियों का स्वागत वक्तव्य दिया। पूरे कार्यक्रम का कुशल संचालन शिक्षा विभाग की सहायक प्रोफेसर डॉ. सीमा बर्गट ने किया, जबकि भाषा विद्यापीठ की अधिष्ठाता प्रो. प्रीति सागर ने कार्यक्रम के समापन पर सभी के प्रति आभार ज्ञापित किया। राष्ट्रगान के सामूहिक गायन के साथ इस गरिमामयी व्याख्यान का समापन हुआ। इस विशेष अवसर पर विश्वविद्यालय के शिक्षक, अधिकारी, कर्मचारी, शोधार्थी और बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएं उपस्थित रहे।

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