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स्वतंत्रता दिवस पर वन्यजीव संरक्षण की मिसाल: वनतारा के सहयोग से बन्नी ग्रासलैंड में छोड़े गए 20 काले हिरण

स्वतंत्रता दिवस पर वन्यजीव संरक्षण की बड़ी पहल: वनतारा के सहयोग से कच्छ के बन्नी में छोड़े गए 20 काले हिरण

📍 स्थान: कच्छ / जामनगर, गुजरात | 🌿 श्रेणी: पर्यावरण एवं वन्यजीव संरक्षण

जामनगर/कच्छ: देश के 80वें स्वतंत्रता दिवस के ऐतिहासिक अवसर पर गुजरात वन विभाग ने ग्रीन्स जूलॉजिकल रेस्क्यू एंड रिहैबिलिटेशन सेंटर (GZRRC - वनतारा) के तकनीकी सहयोग से कच्छ के बन्नी घास के मैदानों में 20 काले हिरणों (ब्लैकबक) को उनके प्राकृतिक आवास में सफलतापूर्वक पुनर्वासित किया है। यह कदम स्थानीय जैव विविधता को समृद्ध करने और पारिस्थितिकी संतुलन को सशक्त बनाने की दिशा में अत्यंत महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

📌 पुनर्वास अभियान के प्रमुख बिंदु:

  • पुनर्वासित वन्यजीव: 20 काले हिरण (5 नर और 15 मादा)।
  • प्रक्रिया: केंद्रीय चिड़ियाघर प्राधिकरण (CZA) और गुजरात के मुख्य वन्यजीव प्रतिपालक की मंजूरी के बाद स्थानांतरण।
  • सुरक्षा मानक: पूर्ण स्वास्थ्य परीक्षण, क्वारंटीन और विशेष वाहनों व पोर्टेबल बाड़ों के जरिए सुरक्षित परिवहन।
  • दीर्घकालिक योजना: 500 काले हिरणों और 100 चिंकारों के बड़े संरक्षण व पुनर्वास कार्यक्रम का हिस्सा।

बन्नी के पारिस्थितिकी तंत्र को मिलेगा नया जीवन

कच्छ का बन्नी क्षेत्र एशिया के सबसे बड़े घास के मैदानों में से एक है, जो पारंपरिक रूप से पशुपालक समुदायों और स्थानीय शाकाहारी वन्यजीवों जैसे काले हिरण, चिंकारा, नीलगाय व जंगली सूअरों का प्राकृतिक आवास रहा है।

काले हिरणों के पुनर्वास से न केवल शाकाहारी जीवों की आबादी संतुलित होगी, बल्कि पूरे ग्रासलैंड का प्राकृतिक पर्यावरण चक्र भी मजबूत होगा। यह पहल चीता पुनर्वास परियोजना जैसे भविष्योन्मुखी संरक्षण कार्यक्रमों के लिए भी भोजन व पर्यावास की दृष्टि से अनुकूल आधार तैयार करेगी।

विशेषज्ञों और अधिकारियों का दृष्टिकोण

"स्थानीय वन्यजीवों को दोबारा उनके प्राकृतिक परिवेश में बसाना एक स्वस्थ पर्यावरण के लिए अनिवार्य है। वैज्ञानिक पद्धति, निरंतर ट्रैकिंग और हितधारकों के सहयोग से ही ऐसे अभियान सफल होते हैं। वनतारा द्वारा उपलब्ध कराई गई तकनीकी सहायता सराहनीय है।"
— डॉ. जयपाल सिंह, IFS (मुख्य वन्यजीव प्रतिपालक, गुजरात)
"स्वतंत्रता दिवस पर भारतीय वन्यजीवों को उनके प्राकृतिक पर्यावास में सुरक्षित और समृद्ध बनाना राष्ट्र निर्माण में एक मूल्यवान योगदान है। वन्यजीवों का स्थानांतरण केवल एक स्थान से दूसरे स्थान ले जाना नहीं, बल्कि वैज्ञानिक योजना, आवास की तैयारी और स्थानीय समुदायों की सहभागिता का समग्र कार्य है।"
— अजीत कुलकर्णी (स्पेशल डायरेक्टर, कंप्लायंस एंड ड्यू डिलिजेंस, वनतारा)

वन विभाग और वनतारा की तकनीकी साझेदारी

इस अभियान को सुचारू बनाने के लिए वनतारा ने विशेषीकृत वन्यजीव परिवहन वाहन, अनुकूलित पोर्टेबल बाड़े (Corrals) और अनुभवी वन्यजीव पशु चिकित्सकों की तकनीकी टीम उपलब्ध कराई।

उल्लेखनीय है कि इससे पहले भी गुजरात वन विभाग और वनतारा ने मिलकर बारडा वन्यजीव अभयारण्य में लगभग 80 चीतल हिरणों को प्राकृतिक वातावरण में सफलतापूर्वक पुनर्वासित करने का कार्य किया था।

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