सीएम योगी का सख्त रुख: "अपराधियों पर कार्रवाई में शिथिलता बर्दाश्त नहीं", 'जनता दर्शन' में फरियादियों की सुनीं समस्याएं; कप्तानों की जवाबदेही तय करने के निर्देश
लखनऊ। सावन के पहले सोमवार को धार्मिक अनुष्ठान और मानसून सत्र के शासकीय दायित्वों की व्यस्तता के बीच भी मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के लिए जनसेवा सर्वोपरि रही। सोमवार सुबह मुख्यमंत्री ने लखनऊ स्थित अपने सरकारी आवास पर 'जनता दर्शन' आयोजित कर प्रदेश के विभिन्न जनपदों से आए दर्जनों फरियादियों की समस्याएं एक-एक कर खुद सुनीं और उनके प्रार्थना पत्रों पर समयबद्ध कार्रवाई के कड़े निर्देश जारी किए।
🚨 लापरवाह पुलिस कप्तानों पर तय होगी जवाबदेही
'जनता दर्शन' में पुलिस से जुड़ी शिकायतें (जैसे आरोपियों की गिरफ्तारी न होना और मुकदमों में दबाव बनाना) मिलने पर मुख्यमंत्री ने भारी नाराजगी व्यक्त की। उन्होंने शासन स्तर के वरिष्ठ अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिया कि **जिन जनपदों से पुलिस से जुड़ी शिकायतें अधिक आ रही हैं, वहां के पुलिस कप्तान (SP/SSP) की सीधी जवाबदेही तय की जाए।**
“किसी भी पीड़ित के साथ अन्याय नहीं होना चाहिए। हर शिकायतकर्ता के साथ संवेदनशील व्यवहार अपनाते हुए उसकी समस्या का पारदर्शी, गुणवत्तापूर्ण और त्वरित निस्तारण किया जाए। अपराधियों पर कार्रवाई और आरोपियों की गिरफ्तारी में कोई ढिलाई बर्दाश्त नहीं की जाएगी।”
— योगी आदित्यनाथ, मुख्यमंत्री (उत्तर प्रदेश)📌 जनता दर्शन में दिए गए प्रमुख निर्देश:
- त्वरित निस्तारण: पुलिस और राजस्व से जुड़े मामलों पर प्राथमिकता के आधार पर त्वरित कार्रवाई की जाए।
- पारिवारिक विवादों में संवाद: पारिवारिक मामलों के निस्तारण के लिए पहले आपसी बातचीत व मध्यस्थता कराई जाए, तत्पश्चात विधिक प्रक्रिया अपनाई जाए।
- संवेदनशीलता और संतुष्टि: अधिकारियों को निर्देश दिया गया कि शिकायतों का समाधान केवल कागजों पर न हो, बल्कि फरियादी पूरी तरह संतुष्ट होना चाहिए।
🏛️ मानसून सत्र और धार्मिक अनुष्ठान के बीच जनसेवा
सावन के प्रथम सोमवार पर एक ओर जहां प्रदेश भर के मंदिरों में जलाभिषेक और अनुष्ठान जारी थे, वहीं दूसरी ओर यूपी विधानमंडल का मानसून सत्र भी शुरू हो रहा था। इन सभी शासकीय व धार्मिक कार्यक्रमों के बीच तड़के ही मुख्यमंत्री का फरियादियों से मिलना और मौके पर ही अधिकारियों को कड़े निर्देश देना उनकी प्रशासनिक प्रतिबद्धता को दर्शाता है।


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