तुलसीदास जयंती पर MGAHV में विशेष व्याख्यान: कुलपति प्रो. कुमुद शर्मा ने किया नमन, वक्ताओं ने कहा- 'रामचरितमानस लोक जीवन की आचार संहिता'
वर्धा: महात्मा गांधी अंतरराष्ट्रीय हिंदी विश्वविद्यालय (MGAHV), वर्धा के हिंदी साहित्य विभाग द्वारा गोस्वामी तुलसीदास जयंती के पावन अवसर पर विशेष समारोह का आयोजन किया गया। इस दौरान विश्वविद्यालय की कुलपति प्रो. कुमुद शर्मा ने तुलसी भवन स्थित गोस्वामी तुलसीदास की प्रतिमा पर माल्यार्पण कर उन्हें श्रद्धापूर्वक नमन किया। इसके उपरांत महादेवी वर्मा सभागार में ‘तुलसीदास का सामाजिक-सांस्कृतिक बोध’ विषय पर एक राष्ट्रीय व्याख्यान आयोजित हुआ।
📌 व्याख्यान के मुख्य बिंदु:
- मुख्य वक्ता: डॉ. प्रेम शंकर त्रिपाठी (सुरेंद्रनाथ सांध्य कॉलेज, कलकत्ता विश्वविद्यालय)।
- प्रमुख संदेश: रामचरितमानस केवल काव्य नहीं, बल्कि संपूर्ण लोकजीवन की आचार संहिता है।
- प्रास्ताविक उद्बोधन: भाषा विद्यापीठ की अधिष्ठाता प्रो. प्रीति सागर द्वारा।
- अध्यक्षीय/विशेष विचार: साहित्य विद्यापीठ के अधिष्ठाता प्रो. अवधेश कुमार ने तुलसीदास के 'विवेक' और 'निर्मल' दर्शन पर प्रकाश डाला।
"तुलसीदास का साहित्य विचलित समाज को दिशा देने वाला": डॉ. प्रेम शंकर त्रिपाठी
बतौर मुख्य वक्ता संबोधित करते हुए कलकत्ता विश्वविद्यालय के हिंदी विभाग (सुरेंद्रनाथ सांध्य कॉलेज) से पधारे डॉ. प्रेम शंकर त्रिपाठी ने कहा कि गोस्वामी तुलसीदास एक विनम्र और स्वाभिमानी कवि हैं, जिनका साहित्य सामाजिक सुधार का मार्ग प्रशस्त करता है।
"गोस्वामी तुलसीदास का साहित्य और विशेष रूप से रामचरितमानस लोकजीवन की आचार संहिता है। उन्हें 'विवेक' शब्द अत्यंत प्रिय था, जो समाज को मानसिक और आध्यात्मिक रूप से जाग्रत करता है। जब आधुनिकता की अंधी दौड़ में हम अपनी सांस्कृतिक जड़ों से कट रहे हैं, तब तुलसीदास का ज्ञान रस और नीति बोध समाज के लिए सबसे बड़ा मार्गदर्शक सिद्ध होता है।"
— डॉ. प्रेम शंकर त्रिपाठी (मुख्य वक्ता)
आदर्श समाज निर्माण और भारतीय आत्मा की अभिव्यक्ति
प्रास्ताविक वक्तव्य प्रस्तुत करते हुए भाषा विद्यापीठ की अधिष्ठाता प्रो. प्रीति सागर ने कहा कि तुलसीदास के विचार एक आदर्श समाज की रचना के लिए प्रेरित करते हैं। उन्होंने लोक को संस्कृति से जोड़ने के लिए जनभाषा अवधी में रामचरितमानस की रचना की, जिससे भारतीय आत्मा को सहजता से समझा जा सकता है।
साहित्य विद्यापीठ के अधिष्ठाता प्रो. अवधेश कुमार ने कहा कि तुलसीदास लोक एवं शास्त्र दोनों के प्रकांड ज्ञाता थे। उनके आराध्य मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्रीराम शक्ति, शील और सौंदर्य के अनुपम प्रतीक हैं, जो हर युग में प्रासंगिक हैं।
गरिमामयी उपस्थिति एवं संयोजन
कार्यक्रम का शुभारंभ मां सरस्वती और गोस्वामी तुलसीदास के चित्र पर माल्यार्पण, दीप प्रज्वलन एवं कुलगीत के साथ हुआ।
- स्वागत वक्तव्य: डॉ. रूपेश कुमार सिंह (सहायक प्रोफेसर, हिंदी साहित्य विभाग)।
- मंच संचालन: डॉ. अशोक नाथ त्रिपाठी (एसोसिएट प्रोफेसर)।
- धन्यवाद ज्ञापन: डॉ. सुनील कुमार (सहायक प्रोफेसर)।
समारोह में डॉ. जयंत उपाध्याय, डॉ. शैलेश मरर्जी कदम, डॉ. जगदीश नारायण तिवारी, सूर्य प्रकाश पाण्डेय, डॉ. कोमल कुमार परदेशी, डॉ. प्रदीप, बी.एस. मिरगे सहित बड़ी संख्या में शोधार्थी, प्राध्यापक और विद्यार्थी उपस्थित रहे।


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