विकास परियोजनाओं को मिलेगी नई रफ्तार: यूपी विधानसभा में ₹59,019.54 करोड़ का अनुपूरक बजट पेश; जानिए उद्योग, एक्सप्रेसवे और जनकल्याण के लिए क्या है खास
लखनऊ। उत्तर प्रदेश विधानसभा के मानसून सत्र के दूसरे दिन राज्य के वित्त मंत्री सुरेश खन्ना ने वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए ₹59,019.54 करोड़ का अनुपूरक बजट (Supplementary Budget) सदन में प्रस्तुत किया। सरकार ने इसे प्रदेश के इंफ्रास्ट्रक्चर, औद्योगिक विकास, ऊर्जा, शिक्षा, स्वास्थ्य, ग्रामीण विकास और जनकल्याणकारी योजनाओं को रफ्तार देने वाला बजट करार दिया है।
📊 अनुपूरक बजट का गणित (बजट ब्रेकअप):
| मद (Head) | आवंटित राशि (करोड़ रुपये में) |
|---|---|
| कुल अनुपूरक बजट का आकार | ₹59,019.54 करोड़ |
| राजस्व मद (Revenue Head) | ₹17,399.49 करोड़ |
| पूंजीगत मद (Capital Head) | ₹41,620.04 करोड़ |
| राज्य की समेकित निधि पर शुद्ध वित्तीय भार (केंद्रीय सहायता समायोजन के बाद) |
₹47,778.57 करोड़ |
🚀 उद्योग और एक्सप्रेसवे परियोजनाओं पर सबसे बड़ा दांव
अनुपूरक बजट में प्रदेश को **1 ट्रिलियन डॉलर अर्थव्यवस्था** बनाने के लक्ष्य के तहत औद्योगिक विकास और इंफ्रास्ट्रक्चर पर भारी बजटीय प्रावधान किए गए हैं:
- इन्वेस्टमेंट इंसेंटिव: FDI (प्रत्यक्ष विदेशी निवेश) और फॉर्च्यून-500 कंपनियों के निवेश को प्रोत्साहन देने के लिए अतिरिक्त फंड।
- डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर: आईटी सदन, स्टेट डेटा सेंटर 2.0 और औद्योगिक क्षेत्रों के विस्तार के लिए आवंटन।
- एक्सप्रेसवे और कनेक्टिविटी: गंगा एक्सप्रेसवे, विंध्य एक्सप्रेसवे, जेवर एयरपोर्ट कनेक्टिविटी, मेरठ-हरिद्वार एक्सप्रेसवे विस्तार और औद्योगिक कॉरिडोर परियोजनाओं के लिए बड़ा बजटीय प्रावधान।
🏥 ऊर्जा, स्वास्थ्य और ग्रामीण विकास को भी मजबूती
बजट में न केवल इंफ्रास्ट्रक्चर बल्कि आम जनता से जुड़ी कल्याणकारी योजनाओं का भी विशेष ध्यान रखा गया है:
- ऊर्जा एवं पावर सेक्टर: बिजली आपूर्ति और सुदृढ़ीकरण के लिए अतिरिक्त फंड।
- स्वास्थ्य एवं शिक्षा: चिकित्सा एवं स्वास्थ्य, परिवार कल्याण, प्राथमिक शिक्षा और मेडिकल इंफ्रास्ट्रक्चर में मजबूती।
- सामाजिक सुरक्षा: महिला एवं बाल विकास, समाज कल्याण, अनुसूचित जाति व जनजाति कल्याण और प्राकृतिक आपदाओं से राहत के लिए बजट आवंटन।
“अनुपूरक अनुदान का मुख्य उद्देश्य उन योजनाओं एवं विकास परियोजनाओं के लिए अतिरिक्त संसाधन उपलब्ध कराना है, जिनके लिए मूल बजट में प्रावधान पर्याप्त नहीं थे या नई आवश्यकताएं सामने आई हैं। इससे राज्य में विकास कार्यों को अभूतपूर्व गति मिलेगी।”
— सुरेश खन्ना, वित्त मंत्री (उत्तर प्रदेश)

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