📘 🐦 📸
तेज़, सटीक और भरोसेमंद खबरें
🔴 Breaking
Loading news...

Pages

'3.73 करोड़ उपभोक्ता पर मात्र 30 हजार कर्मी': अवकाश के दिन ड्यूटी लगाने पर विद्युत संघर्ष समिति ने पावर कॉरपोरेशन को घेरा

अवकाश और त्योहारों पर बिजली कर्मचारियों-इंजीनियरों को ड्यूटी पर बुलाना अनुचित: विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति ने पावर कॉरपोरेशन प्रबंधन को घेरा

📍 स्थान: लखनऊ, उत्तर प्रदेश | 📅 दिनांक: 19 अगस्त 2026 | श्रेणी: ऊर्जा एवं कर्मचारी समाचार

लखनऊ: विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति, उत्तर प्रदेश ने उत्तर प्रदेश पावर कारपोरेशन प्रबंधन द्वारा अवकाश, साप्ताहिक अवकाश और प्रमुख त्योहारों के दिनों में भी बिजली कर्मचारियों और इंजीनियरों को नियमित रूप से ड्यूटी पर बुलाए जाने की कार्यप्रणाली पर कड़ी आपत्ति दर्ज कराई है। संघर्ष समिति ने स्पष्ट कहा है कि यह व्यवस्था कर्मियों पर मानसिक व शारीरिक दबाव डालने वाली है, जिसे तत्काल प्रभाव से बंद किया जाना चाहिए।

📌 संघर्ष समिति की मुख्य आपत्तियां एवं मांगें:

  • नियमित प्रथा पर रोक: आपात स्थिति में ड्यूटी स्वीकार्य है, लेकिन छुट्टी के दिन दफ्तर खोलने को स्थायी नियम बनाना अनुचित।
  • कर्मचारियों की भारी कमी: साल 2000 में 60 लाख उपभोक्ताओं पर 1.20 लाख कर्मी थे, आज 3.73 करोड़ उपभोक्ताओं पर मात्र 30 हजार कर्मी बचे हैं।
  • प्रतिकर अवकाश या डबल वेतन: अपरिहार्य परिस्थितियों में अवकाश के दिन बुलाए जाने पर Compensatory Off या दोगुना वेतन दिया जाए।
  • रिक्त पदों पर भर्ती: फायर-फाइटिंग व्यवस्था के बजाय सभी रिक्त पदों को तत्काल भरा जाए और नए पद सृजित हों।

उपभोक्ता 6 गुना बढ़े, नियमित कर्मचारी घटकर 25% रह गए

संघर्ष समिति ने तुलनात्मक आंकड़े रखते हुए बताया कि वर्ष 2000 में जब उत्तर प्रदेश राज्य विद्युत परिषद (UPSEB) का विघटन हुआ था, तब प्रदेश में लगभग 60 लाख बिजली उपभोक्ता थे और उन्हें सेवाएं देने के लिए 1 लाख 20 हजार नियमित कर्मचारी तैनात थे।

वर्तमान में प्रदेश में उपभोक्ताओं की संख्या 6 गुना से अधिक बढ़कर 3 करोड़ 73 लाख पहुंच चुकी है, जबकि नियमित कर्मचारियों की संख्या लगातार घटकर मात्र 30 हजार के आसपास सिमट गई है। इस भारी असंतुलन के कारण संचालन (Operation), अनुरक्षण (Maintenance), उपभोक्ता सेवा, राजस्व वसूली, मीटरिंग और कमर्शियल कार्यों का अतिरिक्त बोझ मुट्ठी भर कर्मियों पर आ गया है।

"फायर फाइटिंग एक्शन को स्थायी व्यवस्था न बनाए प्रबंधन"

समिति ने कहा कि अक्सर जिस दिन शासन द्वारा सार्वजनिक अवकाश घोषित किया जाता है, उसी दिन प्रबंधन कार्यालय खुले रखने और कर्मचारियों को ड्यूटी पर उपस्थित होने का फरमान जारी कर देता है।

"बिजली कर्मचारियों के भी परिवार और सामाजिक दायित्व हैं। त्योहारों और छुट्टियों के दिन उन्हें अपने परिवार के साथ समय बिताने का बुनियादी अधिकार है। प्रबंधन अपनी मैनपावर की विफलता को छिपाने के लिए छुट्टियों के दिन कर्मचारियों को बुलाकर 'फायर-फाइटिंग' करता है, जिससे कर्मियों में गहरा असंतोष फैल रहा है।"
— विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति, उप्र

संघर्ष समिति की प्रमुख मांगें

  • नियमों के तहत मुआवजा: यदि किसी अनिवार्य और आपात स्थिति में कर्मचारियों को छुट्टी के दिन बुलाया जाता है, तो उन्हें नियमानुसार प्रतिकर अवकाश (Compensatory Off) या दुगना वेतन दिया जाए।
  • नई भर्तियों का सृजन: 3.73 करोड़ उपभोक्ताओं के अनुपात में सभी संवर्गों के खाली पदों पर नियमित भर्तियां तत्काल प्रभाव से शुरू की जाएं।
  • निजीकरण की नीति पर रोक: समिति का आरोप है कि निजीकरण की मंशा से पदों को समाप्त किया जा रहा है, जो विद्युत तंत्र और उपभोक्ता सेवा दोनों के लिए अत्यंत नुकसानदेह साबित होगा।
निष्कर्ष: संघर्ष समिति ने प्रबंधन को आगाह किया है कि कर्मचारियों पर अत्यधिक काम का दबाव डालकर गुणवत्तापूर्ण 24x7 विद्युत आपूर्ति सुनिश्चित नहीं की जा सकती। प्रबंधन को तुरंत कर्मचारी हितैषी नीतियां अपनाते हुए कार्यसंस्कृति में सुधार करना चाहिए।

एक टिप्पणी भेजें

0 टिप्पणियाँ

📢 WhatsApp से जुड़ें