'राजनीतिक स्वार्थ के लिए लोकतांत्रिक मूल्यों को कमजोर करने की साजिश कर रही कांग्रेस': विपक्षी दलों पर बरसे सीएम योगी; बोले— 'संवैधानिक संस्थाओं से मांगें माफी'
लखनऊ: उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने रविवार को अपने सरकारी आवास पर पत्रकारों से बातचीत करते हुए कांग्रेस समेत पूरे विपक्षी खेमे पर अब तक का सबसे तीखा हमला बोला। मुख्यमंत्री ने आरोप लगाया कि कांग्रेस, समाजवादी पार्टी (सपा) और राष्ट्रीय जनता दल (राजद) अपने संकीर्ण राजनीतिक स्वार्थ के लिए देश की संवैधानिक संस्थाओं की साख गिराने और लोकतांत्रिक मूल्यों को खोखला करने की सुनियोजित साजिश रच रहे हैं। विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर/SIR) और चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर विपक्ष द्वारा खड़े किए जा रहे सवालों को निराधार बताते हुए सीएम योगी ने कहा कि विपक्ष अपनी गैरजिम्मेदाराना बयानबाजी पर लगाम लगाए और देश की जनता से अविलंब माफी मांगे।
📌 मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के संबोधन के मुख्य बिंदु:
- एसआईआर पहली बार नहीं: देश में इससे पहले 1952, 1957, 1961, 1965-66 और 2003 में भी एसआईआर की प्रक्रियाएं सफलतापूर्वक संपन्न हो चुकी हैं।
- विपक्ष पर दोहरा मापदंड: चुनाव जीतने पर इसे अपना ‘पुरुषार्थ’ बताते हैं, लेकिन जब जनता भ्रष्टाचार व कुनीति के चलते नकारती है, तो चुनाव आयोग और ईवीएम पर दोष मढ़ते हैं।
- संवैधानिक संस्थाओं की अवमानना: राहुल गांधी द्वारा विदेश में न्यायपालिका पर सवाल उठाने, कैग की राफेल रिपोर्ट को नकारने और सेना के शौर्य पर संदेह करने का किया उल्लेख।
- सुप्रीम कोर्ट की मुहर: फॉर्म-6 और मतदाता पुनरीक्षण पर उच्चतम न्यायालय ने चुनाव आयोग के निर्णय को सही ठहराया है; तीनों चुनाव आयुक्तों ने मीडिया के सामने स्थिति साफ की।
- सार्वजनिक माफी की मांग: लोकतांत्रिक संस्थाओं को बदनाम करने के कुत्सित प्रयास के लिए कांग्रेस और उसके सहयोगी दलों को देश से माफी मांगनी चाहिए।
📊 मतदाता पुनरीक्षण (SIR) का इतिहास एवं विपक्ष के दावों की पड़ताल
| मुद्दा / पहलू | विपक्षी दलों (कांग्रेस/सपा/राजद) का रुख | तथ्य एवं मुख्यमंत्री का पक्ष |
|---|---|---|
| विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) | प्रक्रिया को असंवैधानिक और नई साजिश बताकर भ्रम फैलाना | 1952, 1957, 1961, 1965-66 और 2003 में भी हुआ; नियमित प्रशासनिक सुधार प्रक्रिया |
| मतदाता सूची व फॉर्म-6 | मतदाताओं के नाम जानबूझकर काटने का आरोप | सुप्रीम कोर्ट द्वारा प्रक्रिया मान्य; चुनाव के एक दिन पहले तक फॉर्म-6 से नाम जोड़ने की सुविधा |
| ईवीएम (EVM) व जनादेश | हारने पर ईवीएम को 'ब्लैक बॉक्स' कहकर कठघरे में खड़ा करना | इसी ईवीएम से कई राज्यों व केंद्र में विपक्ष जीता; पराजय भ्रष्टाचार व कुशासन की देन |
"जीतें तो पुरुषार्थ, हारें तो ईवीएम और चुनाव आयोग दोषी"
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने विपक्ष के राजनीतिक पाखंड पर तंज कसते हुए कहा कि लंबे समय तक देश पर शासन करने वाली कांग्रेस पार्टी आज संवैधानिक संस्थाओं को नष्ट करने पर तुली है।
"सपा, कांग्रेस और राजद यदि कहीं चुनाव जीत जाएं तो उसे अपने नेताओं का पुरुषार्थ बताते हैं, लेकिन जब अपनी कुनीतियों, घोर भ्रष्टाचार, आर्थिक कदाचार और अराजकता के कारण जनता उन्हें सिरे से खारिज कर देती है, तो उसका ठीकरा निष्पक्ष चुनाव आयोग और ईवीएम पर फोड़ते हैं। इन दलों को अपनी बचकानी हरकतों से बाहर निकलकर गंभीर आत्मचिंतन और आत्मावलोकन करना चाहिए।"
— योगी आदित्यनाथ (मुख्यमंत्री, उत्तर प्रदेश)
विदेश में न्यायपालिका पर सवाल और सेना के शौर्य पर संदेह
मुख्यमंत्री ने कांग्रेस नेतृत्व के इतिहास की याद दिलाते हुए कहा कि कांग्रेस का कभी भी लोकतांत्रिक और संवैधानिक व्यवस्थाओं में विश्वास नहीं रहा है। 25 जून 1975 को आपातकाल लगाकर संविधान का गला घोंटने वाली कांग्रेस ने दर्जनों बार राज्य की चुनी हुई सरकारों को गैरकानूनी ढंग से बर्खास्त किया।
सीएम ने कहा कि कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष और वर्तमान नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने कैंब्रिज की धरती पर जाकर भारत की निष्पक्ष न्यायपालिका की साख पर प्रश्नचिह्न लगाया। वर्ष 2019 में जब कैग (CAG) ने राफेल सौदे पर पारदर्शी रिपोर्ट दी, तब भी कांग्रेस ने उस पर सवाल उठाए। यहां तक कि जब देश के जांबाज सैनिकों ने बालाकोट एयर स्ट्राइक और सीमाओं पर शौर्य का प्रदर्शन किया, तब भी इस दल ने सबूत मांगकर देश की सुरक्षा का मजाक बनाया।
पारदर्शी चुनावी प्रक्रिया को कमजोर करने की चेष्टा अस्वीकार्य
मुख्यमंत्री ने कहा कि स्वतंत्र भारत के संविधान ने हर नागरिक को जाति, भाषा, लिंग और क्षेत्र के भेदभाव के बिना सार्वभौमिक मताधिकार दिया है। चुनाव आयोग ने स्पष्ट किया है कि कोई भी पात्र मतदाता छूटा न रहे, इसके लिए फॉर्म-6 भरने का अधिकार मतदान से ठीक एक दिन पूर्व तक उपलब्ध रहता है।
तीनों चुनाव आयुक्तों द्वारा प्रेस के सामने सभी संशयों का निवारण किए जाने और देश की शीर्ष अदालत द्वारा प्रक्रिया को वैध ठहराए जाने के उपरांत भी 'बाल की खाल निकालने' की विपक्षी राजनीति केवल भारत के वैश्विक लोकतांत्रिक सम्मान को ठेस पहुंचाने का प्रयास है।


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