स्थानीय निकाय कर्मचारियों की 10 सूत्रीय मांगों को लेकर सीएम योगी से लगाई गुहार: हाईकोर्ट के आदेश के बाद भी कार्रवाई न होने का आरोप, बड़े आंदोलन की चेतावनी
लखनऊ: उत्तर प्रदेश के नगर निगमों, नगर पालिकाओं, नगर पंचायतों और जलकल संस्थानों में कार्यरत हजारों कर्मचारियों की नौ वर्षों से लंबित समस्याओं को लेकर स्थानीय निकाय कर्मचारी महासंघ ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से हस्तक्षेप की गुहार लगाई है। महासंघ के अध्यक्ष शशि कुमार मिश्र ने मुख्यमंत्री को विस्तृत पत्र प्रेषित कर उच्च न्यायालय के स्पष्ट आदेशों के बावजूद विभागीय स्तर पर हो रही हीलाहवाली पर गहरी नाराजगी जताई है और 10 सूत्रीय मांगों पर तत्काल शासनादेश जारी कराने की मांग की है।
📌 निकाय कर्मचारी महासंघ: प्रमुख मांगें व मुद्दे
- विनियमितीकरण का अमल: 31 दिसंबर 2001 तक कार्यरत दैनिक वेतन, संविदा व तदर्थ (धारा-108) कर्मचारियों के नियमितीकरण आदेशों का अनुपालन।
- हाईकोर्ट के आदेश की अनदेखी: रिट संख्या 6329/2026 में 27 जुलाई 2026 को दिए गए समयबद्ध निस्तारण के आदेश के 3 माह बाद भी ठोस कदम नहीं।
- अकेन्द्रियत सेवा नियमावली: वर्ष 2021 में अधिसूचना जारी होने के बावजूद अभी तक सेवा नियमावली का गठन न होना।
- कैशलेस स्वास्थ्य सुविधा: राज्य कर्मचारियों की तर्ज पर निकाय व जलकल कर्मियों को कैशलेस चिकित्सा योजना से जोड़ना।
- वेतन विसंगति का समाधान: लिपिक, राजस्व एवं चालक संवर्ग को छठे वेतन आयोग की संस्तुतियों के अनुरूप ढांचा उपलब्ध कराना।
📊 स्थानीय निकाय कर्मचारियों के प्रमुख लंबित प्रकरण: एक नजर में
| लंबित मांग / संदर्भ | विभागीय स्थिति एवं शासनादेश संदर्भ |
|---|---|
| दैनिक वेतन व संविदा विनियमितीकरण | 31 दिसंबर 2001 तक के कर्मियों हेतु 24 फरवरी 2016 के आदेश का अनुपालन शेष। |
| तदर्थ (धारा-108) कर्मचारी समायोजन | कार्मिक विभाग के 21 नवंबर 2021 के आदेश का क्रियान्वयन लंबित। |
| अकेन्द्रियत सेवा नियमावली | वर्ष 2021 में अधिसूचना के 5 वर्ष बीतने के बाद भी नियमावली अधूरी। |
| वेतन संरचना विसंगति | लिपिकीय, राजस्व और चालक संवर्ग को छठे वेतन आयोग का ढांचा अप्राप्त। |
| चिकित्सा सुरक्षा | अन्य राज्यकर्मियों की तरह कैशलेस इलाज का लाभ निकाय कर्मियों को नहीं। |
न्यायालय के स्पष्ट निर्देशों के बाद भी विभागीय शिथिलता का आरोप
महासंघ अध्यक्ष शशि कुमार मिश्र ने पत्र में उल्लेख किया है कि वर्ष 2019 से 2025 के मध्य प्रमुख सचिव नगर विकास, अपर मुख्य सचिव कार्मिक तथा विभागीय मंत्रियों के स्तर पर अनगिनत बैठकें हुईं और उनके कार्यवृत्त (Minutes) भी जारी हुए, किंतु धरातल पर परिणाम शून्य रहा।
“6 अप्रैल 2026 को अंतिम अनुस्मारक देने के उपरांत संगठन को विवश होकर उच्च न्यायालय की शरण लेनी पड़ी। रिट संख्या 6329/2026 पर सुनवाई करते हुए माननीय न्यायालय ने 27 जुलाई 2026 को नगर विकास विभाग को सभी लंबित प्रकरणों के समयबद्ध निस्तारण का स्पष्ट आदेश दिया था। इस आदेश के तीन माह बीत जाने के बाद भी कोई ठोस शासनादेश जारी नहीं किया गया।”
सेवा नियमावली और आउटसोर्सिंग कर्मियों के हित संरक्षण की मांग
महासंघ ने मुख्यमंत्री का ध्यान आकृष्ट कराते हुए कहा कि नगर निकायों में अकेन्द्रियत सेवा के कर्मियों के लिए 2021 में जारी अधिसूचना के बाद भी सेवा नियमावली न बनने से पदोन्नति और एसीपी के लाभ रुके पड़े हैं। इसके अतिरिक्त:
- कैशलेस उपचार: नगर निगमों, नगर पालिकाओं और जलकल कर्मियों को गंभीर बीमारियों के समय आर्थिक तंगी से बचाने के लिए पंडित दीनदयाल उपाध्याय राज्य कर्मचारी कैशलेस चिकित्सा योजना की तर्ज पर सुविधा मिले।
- आउटसोर्सिंग कर्मियों का संरक्षण: स्वच्छता अभियान की रीढ़ माने जाने वाले सफाई कर्मचारियों एवं अन्य आउटसोर्सिंग श्रमिकों को समय पर न्यूनतम वेतन, ईपीएफ और ईएसआई का वास्तविक लाभ सुनिश्चित कराया जाए।
निर्णय न होने पर व्यापक आंदोलन की चेतावनी
पत्र के अंत में शशि कुमार मिश्र ने आगाह किया है कि प्रदेश के नगर विकास तंत्र को सुचारू रखने वाले कर्मचारी लंबे समय से उपेक्षा का शिकार हैं। यदि शासन ने न्यायालय के आदेशों का सम्मान करते हुए 10 सूत्रीय मांग पत्र पर तत्काल सकारात्मक निर्णय नहीं लिया, तो प्रदेशभर के निकाय कर्मचारी अपने परिवारों सहित सड़कों पर उतरकर व्यापक आंदोलन करने को विवश होंगे।



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