कंप्यूटर ऑपरेटरों की परीक्षा और लंबित पदोन्नति पर कर्मचारी संघों ने जताया कड़ा विरोध: 23 अक्टूबर को जलकल मुख्यालय पर होगा शांतिपूर्ण धरना
लखनऊ: जलकल विभाग, नगर निगम लखनऊ में आउटसोर्सिंग कंप्यूटर ऑपरेटरों पर अचानक टाइपिंग टेस्ट और सीसीसी (CCC) प्रमाणपत्र की अनिवार्यता थोपे जाने तथा नियमित कर्मचारियों की लंबे समय से अटकी पदोन्नति (प्रमोशन) को लेकर कर्मचारी संगठनों में गहरा आक्रोश फैल गया है। कर्मचारी नेताओं ने विभागीय प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए चेताया है कि यदि समय रहते इन एकतरफा शर्तों को वापस नहीं लिया गया और पदोन्नति प्रक्रिया पूरी नहीं की गई, तो 23 अक्टूबर 2026 को जलकल मुख्यालय पर व्यापक और शांतिपूर्ण धरना-प्रदर्शन किया जाएगा।
📌 कर्मचारी संगठनों के विरोध के मुख्य बिंदु:
- अचानक नई शर्तें थोपने का विरोध: विगत 10 से 15 वर्षों से निरंतर विभागीय कार्य संभाल रहे ऑपरेटरों के लिए टाइपिंग परीक्षा और CCC अनिवार्यता का कड़ा विरोध।
- नियमित कर्मियों की पदोन्नति लंबित: वर्षों से अर्हता पूरी कर चुके पात्र नियमित कर्मचारियों की डीपीसी (DPC) व पदोन्नति प्रक्रिया को लटकाए रखने पर आपत्ति।
- 23 अक्टूबर को धरने की घोषणा: जलकल कर्मचारी संघ, उत्तर प्रदेश ने मुख्यालय पर औपचारिक धरना-प्रदर्शन का नोटिस जारी किया।
- सेवा सुरक्षा की मांग: आउटसोर्सिंग कर्मचारियों को परीक्षा के नाम पर नौकरी से हटाए जाने की आशंका को दूर करने का आग्रह।
- एकजुटता का संदेश: नियमित और आउटसोर्सिंग दोनों संवर्गों के संघों ने मिलकर साझा संघर्ष का बिगुल फूंका।
📊 विवाद के प्रमुख कारण एवं कर्मचारी संगठनों की मांगें
| मुद्दा / विषय | कर्मचारी संगठनों का पक्ष व मांग |
|---|---|
| कंप्यूटर ऑपरेटरों की परीक्षा | दशकों से कार्यरत कर्मियों पर टाइपिंग टेस्ट और CCC अनिवार्यता रद्द की जाए |
| नियमित कर्मियों का प्रमोशन | पात्र कार्मिकों की वरिष्ठता सूची जारी कर लंबित पदोन्नति का त्वरित निस्तारण हो |
| प्रभावित विभाग | जलकल विभाग, नगर निगम लखनऊ |
| आंदोलन की तय तिथि | 23 अक्टूबर 2026 (जलकल मुख्यालय पर धरना) |
'10-15 साल सेवा के बाद नई शर्तें अनुचित': नितिन त्रिवेदी
जलकल, नगर निगम नियमित एवं आउटसोर्सिंग कर्मचारी संघ के अध्यक्ष श्री नितिन त्रिवेदी ने विभागीय आदेश पर तीखी आपत्ति जताई। उन्होंने कहा कि जो कंप्यूटर ऑपरेटर पिछले एक दशक से अधिक समय से विभाग के बिलिंग, शिकायत निवारण, पत्राचार और दैनिक प्रशासनिक कार्यों को सुचारू रूप से संचालित कर रहे हैं, उनकी कार्यकुशलता पर अब सवाल उठाना न्यायसंगत नहीं है।
“जब इन कर्मचारियों ने अपनी जवानी के 10 से 15 साल विभाग की सेवा में समर्पित कर दिए, तब अचानक नई अहर्ताएं और परीक्षाएं थोपना उन्हें मानसिक रूप से प्रताड़ित करने जैसा है। विभाग को इन अनुचित शर्तों पर अविलंब पुनर्विचार करना चाहिए। साथ ही नियमित संवर्ग के जो साथी वर्षों से अपनी पदोन्नति की बाट जोह रहे हैं, उनकी फाइलें तुरंत आगे बढ़ाई जाएं।”
— नितिन त्रिवेदी (अध्यक्ष, जलकल नगर निगम नियमित एवं आउटसोर्सिंग कर्मचारी संघ)
23 अक्टूबर को होगा जलकल मुख्यालय का घेराव
जलकल कर्मचारी संघ, उत्तर प्रदेश के वरिष्ठ पदाधिकारी तूफानी ने भी कर्मचारियों की समस्याओं का समर्थन करते हुए प्रबंधन को दो टूक चेतावनी दी है। कर्मचारी संगठनों का कहना है कि प्रशासन द्वारा कर्मचारियों के हितैषी समाधान निकालने के बजाय मनमाने आदेश जारी किए जा रहे हैं।
- शांतिपूर्ण लोकतांत्रिक विरोध: संगठनों ने स्पष्ट किया कि यदि निर्धारित समय-सीमा के भीतर सकारात्मक निर्णय नहीं लिया गया, तो कर्मचारी लोकतांत्रिक अधिकारों का उपयोग करते हुए कार्य बहिष्कार और मुख्यालय पर प्रदर्शन के लिए बाध्य होंगे।
- 23 अक्टूबर का अल्टीमेटम: जलकल कर्मचारी संघ, उत्तर प्रदेश द्वारा औपचारिक रूप से 23 अक्टूबर 2026 को जलकल मुख्यालय पर शांतिपूर्ण धरना-प्रदर्शन की घोषणा कर दी गई है।
- पदोन्नति में देरी पर रोष: विभागीय कर्मचारियों ने आरोप लगाया कि नियमित पदों पर पदोन्नति की अर्हता पूरी होने के बावजूद अधिकारियों द्वारा लगातार हीलाहवाली की जा रही है, जिससे कर्मचारियों का करियर प्रभावित हो रहा है।


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