हिंदी विश्वविद्यालय में विश्व मानसिक स्वास्थ्य दिवस पर विविध आयोजन: डॉ. सुदर्शन हरले बोले— मानसिक स्वास्थ्य के लिए संतुलित जीवन शैली और संवाद आवश्यक
वर्धा: महात्मा गांधी अंतरराष्ट्रीय हिंदी विश्वविद्यालय के मनोविज्ञान विभाग द्वारा विश्व मानसिक स्वास्थ्य दिवस के उपलक्ष्य में शुक्रवार को विशेष जागरूकता कार्यक्रम एवं व्याख्यान का आयोजन किया गया। कुलपति प्रो. कुमुद शर्मा की अध्यक्षता में आयोजित इस सत्र का मुख्य विषय ‘जीवन के वास्तविक अनुभवों को सुना जाए: वास्तविक आवाजें, वास्तविक बदलाव’ रहा। कार्यक्रम के मुख्य वक्ता जिला सामान्य अस्पताल, वर्धा के वरिष्ठ मनोचिकित्सक डॉ. सुदर्शन हरले ने विद्यार्थियों व शिक्षकों को संबोधित करते हुए संतुलित जीवन शैली अपनाने और अवसाद से जूझ रहे लोगों के साथ निरंतर संवाद बनाए रखने का आह्वान किया।
📌 मानसिक स्वास्थ्य जागरूकता कार्यक्रम के मुख्य बिंदु:
- मुख्य वक्ता का संदेश: तनाव और असंतुलित दिनचर्या के चलते भारत में 18% से अधिक आबादी मानसिक समस्याओं की चपेट में है; संवाद ही इसका समाधान है।
- कुलपति का वक्तव्य: पारिवारिक स्तर पर स्वस्थ और खुला संवाद आधुनिक जीवनशैली के अवसाद व अकेलेपन को दूर कर सकता है।
- रचनात्मक प्रतियोगिताएं: कस्तूरबा सभागार में मनोवैज्ञानिक परीक्षण (Psychological Testing), निबंध एवं पोस्टर प्रतियोगिता आयोजित।
- आगामी गतिविधियां: 10 अक्टूबर को सुबह 9:00 बजे जागरूकता रैली और 12 अक्टूबर को पूर्वाह्न 11:00 बजे प्रमाण-पत्र वितरण समारोह।
📊 मानसिक स्वास्थ्य दिवस कार्यक्रम: एक नजर में
| पहलू / घटक | विवरण |
|---|---|
| आयोजनकर्ता विभाग | मनोविज्ञान विभाग, MGAHV वर्धा |
| कार्यक्रम का केंद्रीय विषय | जीवन के वास्तविक अनुभवों को सुना जाए: वास्तविक आवाजें, वास्तविक बदलाव |
| मुख्य वक्ता | डॉ. सुदर्शन हरले (मनोचिकित्सक, जिला सामान्य अस्पताल, वर्धा) |
| कार्यक्रम अध्यक्षा | प्रो. कुमुद शर्मा (कुलपति, MGAHV) |
| आयोजन स्थल | कस्तूरबा सभागार, विश्वविद्यालय परिसर |
"तनाव को साझा करें, पीड़ित की आवाज सुनें": डॉ. सुदर्शन हरले
मुख्य वक्ता डॉ. सुदर्शन हरले ने मानसिक विकारों के वैज्ञानिक और सामाजिक पक्षों पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि आज के दौर में विभिन्न प्रकार के मानसिक तनाव किसी भी उम्र के व्यक्ति को अपनी चपेट में ले सकते हैं।
“मानसिक रूप से टूटने और अकेलेपन के चलते भारत में 18 प्रतिशत से अधिक लोग मानसिक स्वास्थ्य विकारों से जूझ रहे हैं। हमें ऐसे व्यक्तियों की बातों को धैर्यपूर्वक सुनना होगा और उनसे लगातार आत्मीय संवाद बनाए रखना होगा। जीवनशैली में संतुलन और सकारात्मक दृष्टिकोण ही मानसिक स्वास्थ्य की कुंजी है।”
— डॉ. सुदर्शन हरले (मनोचिकित्सक)
पारिवारिक संवाद से दूर होगा अवसाद: कुलपति प्रो. कुमुद शर्मा
अध्यक्षीय उद्बोधन में कुलपति प्रो. कुमुद शर्मा ने कहा कि आधुनिक जीवन की तेज रफ्तार और डिजिटल निर्भरता ने इंसानी संवाद को सीमित कर दिया है। इसी कारण अवसाद (Depression) के मामलों में लगातार वृद्धि हो रही है। यदि परिवार के सदस्य आपस में सुख-दुख साझा करें और तनाव का बंटवारा करें, तो मानसिक भार स्वतः हल्का हो जाता है। उन्होंने विद्यार्थियों को सकारात्मक सोच विकसित करने के लिए प्रेरित किया।
परीक्षण, प्रतियोगिताएं एवं आगामी रैली की रूपरेखा
कस्तूरबा सभागार में छात्रों के लिए कई सह-शैक्षणिक और मनोवैज्ञानिक गतिविधियों का आयोजन किया गया:
- प्रतियोगिताएं: विद्यार्थियों की सहभागिता से निबंध प्रतियोगिता, पोस्टर मेकिंग और मनोवैज्ञानिक परीक्षण सत्र आयोजित किए गए।
- जागरूकता रैली (10 अक्टूबर): समाज में मानसिक स्वास्थ्य के प्रति संवेदनशीलता बढ़ाने के लिए 10 अक्टूबर को प्रातः 09:00 बजे से विश्वविद्यालय परिसर में जागरूकता रैली निकाली जाएगी।
- समापन एवं पुरस्कार वितरण (12 अक्टूबर): प्रतियोगिताओं के विजेताओं और प्रतिभागियों को 12 अक्टूबर को पूर्वाह्न 11:00 बजे प्रमाण-पत्र वितरित किए जाएंगे।
कार्यक्रम का शुभारंभ दीप प्रज्वलन, मां सरस्वती के चित्र पर माल्यार्पण एवं कुलगीत गायन से हुआ तथा समापन राष्ट्रीय गीत एवं राष्ट्रगान से हुआ। कार्यक्रम का संचालन योग शिक्षक डॉ. राहुल जाटव ने किया तथा आभार ज्ञापन सहायक प्रोफेसर डॉ. नवीन कुमार त्रिपाठी द्वारा प्रस्तुत किया गया। परामर्शदाता डॉ. स्मृति त्रिपाठी, डॉ. ज्योति सावळे, डॉ. ब्रिजेश यादव एवं डॉ. प्रेरणा सहित अधिष्ठाता, विभागाध्यक्ष, शोधार्थी और बड़ी संख्या में विद्यार्थी उपस्थित रहे।


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