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68,500 सहायक शिक्षक भर्ती 2018 में OBC को 5% छूट व 40% अंक पर संशोधित परिणाम की मांग। मंत्री स्वतंत्र देव सिंह से मिले अभ्यर्थी; मिला आश्वासन।

68,500 शिक्षक भर्ती पर फिर भड़का आक्रोश: मंत्री स्वतंत्र देव सिंह के आवास पहुंचे अभ्यर्थी; 40% अंक पर संशोधित रिजल्ट जारी करने की मांग

📍 स्थान: लखनऊ (उत्तर प्रदेश) | 📅 दिनांक: 17 अक्टूबर 2026 | 📢 श्रेणी: शिक्षक भर्ती विवाद, अभ्यर्थी प्रदर्शन, बेसिक शिक्षा, लखनऊ समाचार

लखनऊ: उत्तर प्रदेश की 68,500 सहायक शिक्षक भर्ती परीक्षा-2018 का विवाद एक बार फिर गरमा गया है। शनिवार को सैकड़ों अभ्यर्थियों ने अपनी लंबित मांगों को लेकर राजधानी स्थित प्रदेश के जल शक्ति मंत्री स्वतंत्र देव सिंह के आवास का घेराव किया और ज्ञापन सौंपा। अभ्यर्थियों ने मांग की कि राज्य पिछड़ा वर्ग आयोग, उत्तर प्रदेश की संस्तुति के आधार पर अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) के अभ्यर्थियों को उत्तीर्णांक (कटऑफ) में 5 प्रतिशत की छूट देते हुए 150 में से 60 अंक (40%) पर संशोधित परिणाम और नई चयन सूची जारी की जाए।

📌 68,500 शिक्षक भर्ती प्रदर्शन: मुख्य बिंदु

  • कैबिनेट मंत्री के आवास पर दस्तक: 'दस्तक दो अभियान' के तहत अभ्यर्थियों ने कैबिनेट मंत्री स्वतंत्र देव सिंह को सौंपा मांग पत्र।
  • 5% उत्तीर्णांक छूट की मांग: राज्य पिछड़ा वर्ग आयोग की संस्तुति के तहत ओबीसी श्रेणी के लिए कटऑफ 45% से घटाकर 40% करने का आग्रह।
  • 150 में 60 अंक पर रिजल्ट: 60 अंक लाने वाले आरक्षित वर्ग के अभ्यर्थियों को सफल घोषित कर नई नियुक्ति सूची जारी करने की मांग।
  • दिव्यांग व आश्रितों को भी राहत: अभ्यर्थियों का दावा कि इस संशोधन से दिव्यांगों, भूतपूर्व सैनिकों और स्वतंत्रता सेनानियों के आश्रितों को भी न्याय मिलेगा।
  • मंत्री का आश्वासन: मंत्री स्वतंत्र देव सिंह ने बेसिक शिक्षा मंत्री और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से वार्ता कर न्यायसंगत समाधान कराने का भरोसा दिया।

📊 68,500 शिक्षक भर्ती 2018: कटऑफ विवाद व अभ्यर्थियों की मांग

पैमाना / विवरण वर्तमान स्थिति एवं अभ्यर्थियों की आधिकारिक मांग
भर्ती का संदर्भ 68,500 सहायक अध्यापक भर्ती परीक्षा (वर्ष 2018)
अभियान का नाम ‘दस्तक दो अभियान’ (अभ्यर्थी संघ द्वारा संचालित)
मूल विधिक आधार उत्तर प्रदेश राज्य पिछड़ा वर्ग आयोग की आधिकारिक संस्तुति रिपोर्ट
प्रस्तावित संशोधित कटऑफ कुल 150 अंकों में 60 अंक (40% उत्तीर्णांक)
लाभान्वित श्रेणियां ओबीसी, दिव्यांगजन, भूतपूर्व सैनिक और स्वतंत्रता संग्राम सेनानी आश्रित

'आयोग की संस्तुति के बाद भी न्याय की बाट जोह रहे अभ्यर्थी': तूफान सिंह

प्रदर्शन का नेतृत्व कर रहे अभ्यर्थी तूफान सिंह और आशुतोष वर्मा ने कहा कि उत्तर प्रदेश राज्य पिछड़ा वर्ग आयोग ने इस भर्ती में आरक्षण नियमों और उत्तीर्णांक छूट को लेकर विस्तृत जांच के बाद स्पष्ट संस्तुति दी थी। इसके तहत अन्य पिछड़ा वर्ग के अभ्यर्थियों को 5 प्रतिशत की छूट देते हुए नियुक्ति दिए जाने की सिफारिश की गई थी।

“संवैधानिक आयोग की स्पष्ट संस्तुति होने के बावजूद हम वर्षों से सड़कों पर संघर्ष करने को मजबूर हैं। हमारी मांग केवल इतनी है कि कुल 150 पूर्णांक में 60 अंक यानी 40 प्रतिशत को उत्तीर्ण मानक मानकर परिणाम को रीवाइज किया जाए और शेष रिक्त पदों पर योग्य अभ्यर्थियों की नई चयन सूची जारी की जाए।”
— तूफान सिंह व आशुतोष वर्मा (प्रतिनिधि, अभ्यर्थी संघ)

मंत्री ने दिया वार्ता का भरोसा, बाद में ईको गार्डन भेजे गए प्रदर्शनकारी

कैबिनेट मंत्री स्वतंत्र देव सिंह ने अभ्यर्थियों का ज्ञापन और राज्य पिछड़ा वर्ग आयोग की संस्तुति रिपोर्ट की प्रतिलिपि स्वीकार की। उन्होंने प्रतिनिधिमंडल को आश्वस्त किया कि वे इस मुद्दे को बेसिक शिक्षा मंत्री और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के समक्ष रखेंगे तथा शासन स्तर पर वार्ता कराकर मामले के न्यायोचित समाधान का प्रयास करेंगे।

ज्ञापन सौंपे जाने के बाद मौके पर तैनात भारी पुलिस बल ने सुरक्षा व्यवस्था का हवाला देते हुए सभी अभ्यर्थियों को बसों में बैठाया और राजधानी के निर्धारित धरना स्थल ईको गार्डन (Eco Garden) भेज दिया।

प्रदर्शन में प्रदेशभर के सैकड़ों अभ्यर्थी रहे शामिल

इस विरोध प्रदर्शन में प्रदेश के विभिन्न जनपदों से आए सैकड़ों अभ्यर्थियों ने एकजुट होकर आवाज उठाई। प्रदर्शन में प्रमुख रूप से:

नवीन चौधरी, रंजना जायसवाल, मोहित अहलावत, राकेश शाहनी, जगराम लोधी, दया सिंह गुर्जर, अनीता चौहान, सच्चिदानंद, नसीम, शिव कुमार प्रजापति, शिव शंकर गौड़, इशिता पाल, प्रतिमा कुशवाहा, राम प्रवेश यादव, विनोद प्रजापति और अखिल कुमार सहित बड़ी संख्या में महिला व पुरुष अभ्यर्थी उपस्थित रहे।

निष्कर्ष: 68,500 सहायक शिक्षक भर्ती का विवाद छह वर्ष बीत जाने के बाद भी थमता नजर नहीं आ रहा है। राज्य पिछड़ा वर्ग आयोग की संस्तुतियों के अनुपालन की मांग को लेकर अभ्यर्थियों का यह प्रदर्शन अब बेसिक शिक्षा विभाग और शासन के लिए संवेदनशील प्रशासनिक विषय बन चुका है।

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