NHM कर्मचारियों की लंबित मांगों को लेकर आंदोलन तेज: संघर्ष समिति के आह्वान पर 8 अक्टूबर को लखनऊ में व्यापक प्रदर्शन; नियमितीकरण व राज्य बजट से वेतन की मांग
लखनऊ: उत्तर प्रदेश में राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (NHM) के तहत वर्षों से सेवाएं दे रहे लगभग एक लाख संविदा एवं आउटसोर्स स्वास्थ्यकर्मियों की लंबित मांगों को लेकर आक्रोश गहराता जा रहा है। संघर्ष समिति के आह्वान और संयुक्त राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन कर्मचारी संघ, उत्तर प्रदेश की प्रदेश कार्यसमिति में पारित प्रस्ताव के क्रम में कर्मचारियों ने चरणबद्ध लोकतांत्रिक आंदोलन तेज कर दिया है। इसी कड़ी में 08 अक्टूबर 2026 को राजधानी लखनऊ में प्रदेशव्यापी व्यापक कर्मचारी एकत्रीकरण एवं आंदोलन की घोषणा की गई है। संगठन ने प्रमुख सचिव (चिकित्सा स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण) को पत्र भेजकर स्थिति से अवगत कराया है।
📌 NHM कर्मचारी आंदोलन के मुख्य बिंदु:
- 8 अक्टूबर को लखनऊ में जुटान: प्रदेशभर से एएनएम (ANM), सीएचओ (CHO), लैब टेक्नीशियन और आउटसोर्स कर्मचारी लखनऊ पहुंचेंगे।
- राज्य बजट से वेतन व्यवस्था: कर्मचारियों को एनएचएम के बजाय राज्य आधारित स्वास्थ्य व्यवस्था में शामिल कर सीधे राज्य बजट से वेतन देने की मांग।
- समान कार्य के लिए समान वेतन: वर्षों से कार्यरत संविदा कर्मचारियों के लिए सम्मानजनक, एकरूप वेतन नीति और विधिक सुरक्षा।
- सामाजिक सुरक्षा लाभ: सभी संविदा कर्मियों को अनिवार्य ईपीएफ (EPF), ईएसआई/स्वास्थ्य बीमा और ग्रेच्युटी की सुविधा मिले।
- आउटसोर्स कार्मिकों का समायोजन: विभिन्न एजेंसियों के शोषण से मुक्ति दिलाते हुए आउटसोर्स कर्मियों के समायोजन की पारदर्शी नीति बने।
📊 NHM कर्मचारी संघ का मुख्य मांग-पत्र: एक नजर में
| क्र. | प्रमुख मांग | विस्तृत स्वरूप व उद्देश्य |
|---|---|---|
| 1 | राज्य आधारित व्यवस्था व बजट | NHM कर्मियों के लिए राज्य आधारित स्वास्थ्य व्यवस्था लागू हो तथा वेतन का प्रावधान राज्य बजट से किया जाए। |
| 2 | समान कार्य के लिए समान वेतन | नियमित कर्मचारियों के समान कार्यभार को देखते हुए एकरूप व सम्मानजनक वेतन नीति लागू हो। |
| 3 | नियमितीकरण व सेवा सुरक्षा | दीर्घकाल से कार्यरत संविदा कर्मचारियों के लिए स्थायीकरण एवं स्पष्ट जॉब सिक्योरिटी नीति बने। |
| 4 | सामाजिक सुरक्षा की गारंटी | ईपीएफ (EPF), ईएसआई (ESI)/कैशलेस स्वास्थ्य बीमा तथा ग्रेच्युटी का प्रभावी लाभ प्रदान किया जाए। |
| 5 | आउटसोर्स कार्मिकों का समायोजन | एजेंसियों के शोषण को समाप्त कर आउटसोर्स कर्मियों को सीधे विभाग में सेवा सुरक्षा के साथ समायोजित किया जाए। |
| 6 | समयबद्ध वेतन भुगतान | विभिन्न जनपदों में महीनों से होने वाले मानदेय विलंब को समाप्त कर हर माह निश्चित तिथि पर भुगतान सुनिश्चित हो। |
"स्वास्थ्य व्यवस्था की रीढ़ हैं संविदा कर्मी, फिर भी उपेक्षा": योगेश उपाध्याय
संयुक्त राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन कर्मचारी संघ के प्रदेश महामंत्री योगेश कुमार उपाध्याय ने कहा कि उत्तर प्रदेश की प्राथमिक, सामुदायिक और जिला स्तरीय स्वास्थ्य सेवाओं को संचालित रखने में 1 लाख NHM कर्मियों का पसीना बहता है। टीकाकरण, मातृ-शिशु देखभाल, संचारी रोग नियंत्रण और आपातकालीन सेवाओं में निरंतर योगदान के बाद भी कर्मचारियों को अनिश्चित भविष्य के साए में जीना पड़ रहा है।
"जब कर्मचारी दिन-रात जनता की जान बचाने में जुटे रहते हैं, तब उन्हें सेवा सुरक्षा, सम्मानजनक वेतन और सामाजिक सुरक्षा के लाभ से वंचित रखना घोर अन्याय है। वेतन विसंगतियों और महीनों तक मानदेय अटकने से परिवारों के सामने गंभीर आर्थिक संकट खड़ा हो गया है। इसीलिए ANM, CHO और आउटसोर्स कर्मचारियों के सभी संगठन आज एक मंच पर आकर 8 अक्टूबर को अपनी आवाज बुलंद करने जा रहे हैं।"
— योगेश कुमार उपाध्याय (प्रदेश महामंत्री, संयुक्त NHM कर्मचारी संघ)
आंदोलन पूरी तरह शांतिपूर्ण व लोकतांत्रिक: सेवाएं बाधित करना उद्देश्य नहीं
संघर्ष समिति ने स्पष्ट किया है कि कर्मचारियों का उद्देश्य मरीजों या आम जनता के लिए स्वास्थ्य सेवाओं को बाधित करना कतई नहीं है। यह आंदोलन पूरी तरह शांतिपूर्ण, संवैधानिक और लोकतांत्रिक मर्यादाओं के तहत अपनी जायज मांगों को शासन तक पहुंचाने के लिए किया जा रहा है।
पिछले कई हफ्तों से सभी जनपदों में जिलाधिकारियों और मुख्य चिकित्सा अधिकारियों (CMO) के माध्यम से शासन को ज्ञापन प्रेषित किए जा रहे थे। जब प्रशासनिक स्तर पर कोई ठोस पहल नहीं हुई, तब विवश होकर प्रदेशभर के कर्मचारियों ने राजधानी लखनऊ कूच करने का निर्णय लिया है।
शासन से सकारात्मक हस्तक्षेप की अपील
संघ ने प्रमुख सचिव स्वास्थ्य और विभागीय उच्चाधिकारियों से अपेक्षा की है कि वे गतिरोध को समाप्त करने के लिए प्रतिनिधिमंडल के साथ तत्काल उच्चस्तरीय वार्ता करें। संगठन ने कहा कि संविदा कर्मियों के नियमितीकरण, ईपीएफ/बीमा सुरक्षा और आउटसोर्स कर्मियों के शोषण पर रोक लगाने जैसे नीतिगत विषयों पर यदि समय रहते सकारात्मक आदेश जारी होते हैं, तो स्वास्थ्य कर्मियों में भरोसा बहाल होगा।

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