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चिकित्सा प्रतिपूर्ति के लंबित भुगतान तत्काल जारी हों: नगर निगम कर्मचारी संघ ने नगर आयुक्त को लिखा पत्र; व्यवस्था सुधरने तक ऑफलाइन प्रक्रिया जारी रखने की मांग

चिकित्सा प्रतिपूर्ति के लंबित भुगतान तत्काल जारी किए जाएं: नगर निगम कर्मचारी संघ ने नगर आयुक्त को सौंपा पत्र, पोर्टल सुचारु होने तक पूर्ववत ऑफलाइन प्रक्रिया लागू रखने की मांग

📍 स्थान: लखनऊ (उत्तर प्रदेश) | 📅 दिनांक: 05 नवम्बर 2026 | 🏥 श्रेणी: नगर निगम लखनऊ, चिकित्सा प्रतिपूर्ति, कर्मचारी कल्याण, स्थानीय निकाय

लखनऊ: उत्तर प्रदेश नगर निगम कर्मचारी संघ, लखनऊ ने नगर निगम के सेवारत एवं सेवानिवृत्त कर्मचारियों के चिकित्सा प्रतिपूर्ति (Medical Reimbursement) के महीनों से अटके दावों का तत्काल निस्तारण कर भुगतान जारी करने की पुरजोर मांग उठाई है। संघ ने नगर आयुक्त, नगर निगम लखनऊ को औपचारिक पत्र प्रेषित कर चिकित्सा अनुभाग-6 के 9 सितंबर 2026 के शासनादेश के क्रियान्वयन में आ रही गंभीर तकनीकी व व्यावहारिक विसंगतियों से अवगत कराया है। संघ ने स्पष्ट किया कि जब तक ऑनलाइन पोर्टल पूरी तरह सुचारु और त्रुटिरहित नहीं हो जाता, तब तक कर्मचारियों के लिए पूर्ववत ऑफलाइन व्यवस्था लागू रखी जाए।

📌 नगर निगम कर्मचारी संघ की प्रमुख बातें एवं मांगें

  • लंबित भुगतान तुरंत मिले: गंभीर बीमारियों से ग्रसित कर्मचारियों, पेंशनर्स व आश्रितों के चिकित्सा प्रतिपूर्ति के लंबित बिलों का अविलंब भुगतान हो।
  • वैकल्पिक ऑफलाइन व्यवस्था: जब तक पोर्टल सक्षम न हो, तब तक ऑफलाइन पद्धति से दावे स्वीकार कर भुगतान सुनिश्चित किया जाए।
  • सफाई व चतुर्थ श्रेणी कर्मियों को परेशानी: नगर निगम के 80-85% कर्मचारी तकनीकी ज्ञान व संसाधनों से वंचित हैं; बिना प्रशिक्षण प्रक्रिया थोपने से संकट खड़ा हुआ।
  • पोर्टल एकीकरण में विफलता: मानव संपदा (eHRMS) और जनहित स्वास्थ्य पोर्टल के एकीकरण व सेवा विवरण अधूरा होने से फॉर्म सबमिट नहीं हो रहे।
  • नोडल अधिकारी की नियुक्ति: कर्मचारियों को तकनीकी सहायता और सुगम आवेदन के लिए प्रशिक्षण एवं नोडल अधिकारी तैनात किए जाएं।

📊 चिकित्सा दावा डिजिटलीकरण: समस्याएं एवं संघ की मांगें

विषय / आयाम विभागीय स्थिति एवं कर्मचारी संघ का पक्ष
संबद्ध शासनादेश अपर मुख्य सचिव, चिकित्सा अनुभाग-6 द्वारा निर्गत शासनादेश (दिनांक 09.09.2026)।
ऑनलाइन ढांचा जनहित स्वास्थ्य पोर्टल एवं मानव संपदा (eHRMS) पोर्टल का एकीकरण।
जमीनी अड़चनें सेवा विवरण का अभाव, पोर्टल क्रैश/एरर, कम पढ़े-लिखे सफाईकर्मियों के पास स्मार्ट साधनों व प्रशिक्षण की कमी।
अंतरिम समाधान पोर्टल दुरुस्त होने तक अनिवार्य रूप से ऑफलाइन हार्डकॉपी दावे स्वीकार किए जाएं।

‘85% सफाई व चतुर्थ श्रेणी कर्मियों पर बिना तैयारी थोपी गई व्यवस्था’: राजेश सिंह

उत्तर प्रदेश नगर निगम कर्मचारी संघ के अध्यक्ष श्री राजेश सिंह ने पत्र में प्रशासनिक कार्यशैली पर कड़ा ऐतराज जताया। उन्होंने कहा कि चिकित्सा प्रतिपूर्ति दावों के निस्तारण हेतु डिजिटलीकरण का सिद्धांत पारदर्शी हो सकता है, लेकिन जमीनी हकीकत को पूरी तरह नजरअंदाज कर दिया गया।

“नगर निगम में 80 से 85 प्रतिशत सफाई कर्मचारी एवं चतुर्थ श्रेणी संवर्ग के कार्मिक कम पढ़े-लिखे हैं। उनके पास न तो कंप्यूटर की सुविधा है और न ही ऑनलाइन फॉर्म भरने की तकनीकी समझ। प्रशासन ने न तो कर्मचारियों को कोई प्रशिक्षण दिया और न ही स्थानीय स्तर पर कोई सहायता केंद्र खोला। सीधे पोर्टल की अनिवार्यता थोप देने से इलाज का खर्च वहन कर चुके गरीब कर्मचारी कर्ज के बोझ तले दब रहे हैं।”
— राजेश सिंह (अध्यक्ष, उप्र नगर निगम कर्मचारी संघ, लखनऊ)

मानव संपदा और जनहित पोर्टल के एकीकरण में खामियां

संघ ने बताया कि ऑनलाइन प्रणाली में भारी तकनीकी विसंगतियां व्याप्त हैं:

  • पंजीकरण एवं सेवा विवरण अपूर्ण: मानव संपदा (eHRMS) पोर्टल पर अधिकांश नगर निगम कर्मियों का डाटा और एकीकृत सेवा विवरण अब तक अद्यतन (Update) ही नहीं हुआ है, जिससे जनहित पोर्टल पर लॉगिन करते ही एरर आ जाता है।
  • दावे रिजेक्ट होने का खतरा: तकनीकी गड़बड़ियों के कारण आवेदन बीच में ही अटक जाते हैं और समयसीमा समाप्त होने पर दावों के खारिज होने की नौबत आ जाती है।
  • गंभीर रोगियों पर दोहरी मार: कैंसर, किडनी, हार्ट और न्यूरो जैसी घातक बीमारियों से जूझ रहे सेवारत व सेवानिवृत्त कर्मचारियों के लाखों रुपये के बिल लटके पड़े हैं।

संघ की 5 सूत्रीय प्रमुख मांगें

संघ ने नगर आयुक्त एवं शासन से निम्नलिखित बिंदुओं पर अविलंब शासनादेश और प्रशासनिक निर्देश जारी करने का अनुरोध किया है:

  1. चिकित्सा प्रतिपूर्ति के पूर्व से लंबित सभी दावों का प्राथमिकता के आधार पर तत्काल निस्तारण कर बैंक खातों में भुगतान भेजा जाए।
  2. जब तक ऑनलाइन पोर्टल पूरी तरह त्रुटिरहित और सहज न हो जाए, तब तक पूर्ववत ऑफलाइन प्रक्रिया से चिकित्सा प्रतिपूर्ति दावे स्वीकार किए जाएं।
  3. समस्त जोनल कार्यालयों में कर्मचारियों के लिए तकनीकी सहायता डेस्क और एक सक्षम नोडल अधिकारी नियुक्त किया जाए।
  4. मानव संपदा पोर्टल पर सभी कर्मचारियों का शत-प्रतिशत पंजीकरण एवं सेवा विवरण पूरा कर दोनों पोर्टलों का सुगम एकीकरण कराया जाए।
  5. शासनादेश को स्थानीय निकायों की विशिष्ट परिस्थितियों के अनुकूल लागू करने से पहले सभी तकनीकी व प्रशासनिक औपचारिकताएं पूर्ण की जाएं।
निष्कर्ष: नगर निगम कर्मचारी संघ की यह मांग पूर्णतः मानवीय और व्यवहार्य है। बीमारी के समय कर्मचारियों को आर्थिक सहायता उपलब्ध कराना कल्याणकारी राज्य का कर्तव्य है। प्रशासन को मानवीय दृष्टिकोण अपनाते हुए तत्काल ऑफलाइन व्यवस्था और लंबित भुगतानों को हरी झंडी देनी चाहिए।

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