'पसमांदा समाज को वोट बैंक समझने की भूल न करें सियासी दल': अनीस मंसूरी की दो टूक चेतावनी; 9 नवम्बर को दिल्ली में आयोजित होगा 16वां राष्ट्रीय अधिवेशन
लखनऊ / नई दिल्ली: पसमांदा मुस्लिम समाज के संस्थापक एवं राष्ट्रीय अध्यक्ष तथा पूर्व मंत्री अनीस मंसूरी ने सभी राजनीतिक दलों को सख्त संदेश देते हुए कहा है कि देश का बहुसंख्यक पसमांदा तबका अब किसी भी दल का मूक 'वोट बैंक' बनकर नहीं रहेगा। प्रेस क्लब ऑफ इंडिया, नई दिल्ली में आयोजित एक महत्वपूर्ण पत्रकार वार्ता को संबोधित करते हुए उन्होंने घोषणा की कि आगामी 9 नवम्बर 2026 को नई दिल्ली स्थित इंडिया इस्लामिक कल्चरल सेंटर में पसमांदा मुस्लिम समाज का 16वां राष्ट्रीय अधिवेशन आयोजित किया जाएगा। इस राष्ट्रीय मंच से समाज अपने संवैधानिक अधिकारों, आर्थिक न्याय और सामाजिक सम्मान की लड़ाई को संसद से सड़क तक ले जाने का ऐलान करेगा।
📌 16वां राष्ट्रीय अधिवेशन: मुख्य बिंदु एवं मांगें
- 9 नवम्बर को महासम्मेलन: इंडिया इस्लामिक कल्चरल सेंटर (नई दिल्ली) में देशभर से जुटेंगे पसमांदा प्रतिनिधि और सामाजिक चिंतक।
- अनुच्छेद 341 में संशोधन: संविधान के अनुच्छेद 341 से धार्मिक प्रतिबंध समाप्त कर वंचित मुस्लिम व ईसाई वर्गों को अनुसूचित जाति (SC) के समान अधिकार देने की मांग।
- पारदर्शी जातिवार सर्वेक्षण: देश और प्रदेश स्तर पर पसमांदा जातियों का सटीक सामाजिक व आर्थिक सर्वे कराया जाए।
- वक्फ संपत्तियों की आय का सदुपयोग: वक्फ जायदादों का डिजिटल रिकॉर्ड बनाकर उनकी आय केवल पसमांदा बच्चों की उच्च शिक्षा और लोककल्याण पर खर्च हो।
- दस्तकारों हेतु स्वतंत्र आयोग: बुनकरों, दर्जियों, लोहारों व कारीगरों के लिए सस्ती बिजली, रियायती ऋण और एक स्वतंत्र वैधानिक आयोग के गठन पर जोर।
📊 सरकार के समक्ष रखी गईं 5 प्रमुख संवैधानिक एवं नीतिगत मांगें
| क्र.सं. | प्रमुख मांग | औचित्य एवं अपेक्षित कार्रवाई |
|---|---|---|
| 1 | अनुच्छेद 341 से धार्मिक पाबंदी हटाना | 1950 के प्रेसिडेंशियल ऑर्डर को संशोधित कर मुस्लिम व ईसाई समुदाय के दलित/शोषित वर्गों को SC आरक्षण का लाभ मिले। |
| 2 | पारदर्शी जातिवार जनगणना / सर्वे | पसमांदा जातियों की वास्तविक शैक्षणिक और आर्थिक स्थिति का पारदर्शी आंकड़ा सामने लाकर आबादी के अनुपात में हिस्सेदारी तय करना। |
| 3 | वक्फ संपत्तियों का स्पष्ट रिकॉर्ड | वक्फ भूमि को अवैध कब्जों से मुक्त कर उसकी आय का उपयोग पसमांदा समाज के आधुनिक स्कूलों, हॉस्टलों और अस्पतालों में करना। |
| 4 | दस्तकारों को बाजार व वित्तीय संबल | बुनकर, दर्जी, कुम्हार, लोहार व बढ़ई जैसे परंपरागत कारीगरों को आधुनिक तकनीक, सस्ती बिजली और शून्य-ब्याज ऋण उपलब्ध कराना। |
| 5 | स्वतंत्र वैधानिक आयोग की स्थापना | पसमांदा समाज की समस्याओं के त्वरित और नीतिगत समाधान के लिए पूर्ण वैधानिक शक्तियों से संपन्न स्थायी आयोग बनाना। |
'आजादी के दशकों बाद भी दस्तकार और मेहनतकश उपेक्षित': अनीस मंसूरी
प्रेस वार्ता को संबोधित करते हुए पूर्व मंत्री अनीस मंसूरी ने कहा कि भारत की जीडीपी और कुटीर उद्योग को अपने पसीने से सींचने वाला पसमांदा कारीगर आज भी बुनियादी नागरिक अधिकारों और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के लिए तरस रहा है। उन्होंने राजनीतिक दलों की अवसरवादिता पर तीखा प्रहार किया।
“चुनाव आते ही हर पार्टी पसमांदा के नाम पर हमदर्दी का नाटक करती है, लेकिन चुनाव बीतते ही यह मेहनतकश समाज बिसरा दिया जाता है। अब यह सियासत नहीं चलेगी। समाज अपनी ताकत पहचान चुका है। हमारी ताकत नारों और भावुक भाषणों में नहीं, बल्कि कलम, तालीम और हुनर में है। हम संविधान के दायरे में रहकर अपने हक और इंसाफ की लोकतांत्रिक लड़ाई पूरी ताकत से लड़ेंगे।”
— अनीस मंसूरी (संस्थापक एवं राष्ट्रीय अध्यक्ष, पसमांदा मुस्लिम समाज)
आधुनिक तकनीक, बाजार और शिक्षा पर जोर
अनीस मंसूरी ने रेखांकित किया कि जब तक पसमांदा युवाओं को आधुनिक तकनीकी शिक्षा और सीधे बाजार से नहीं जोड़ा जाएगा, तब तक वास्तविक आर्थिक आत्मनिर्भरता संभव नहीं है।
- बिचौलियों से मुक्ति: बुनकरों और कारीगरों के तैयार उत्पादों को ई-कॉमर्स और वैश्विक बाजार तक पहुंचाने के लिए सीधे सरकारी सहायता केंद्र स्थापित किए जाएं।
- सस्ती दर पर बिजली: हैंडलूम और पावरलूम क्षेत्रों को रियायती दरों पर बिजली दी जाए ताकि वे बड़े कारखानों की प्रतिस्पर्धा में टिक सकें।
- वक्फ में पारदर्शिता: वक्फ की संपत्तियों पर चंद रसूखदारों के कब्जे को हटाकर उन जमीनों पर पसमांदा बच्चों के लिए तकनीकी संस्थान और आईटीआई कॉलेज खोले जाने चाहिए।



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