google.com, pub-1705301601279513, DIRECT, f08c47fec0942fa0/> ऐशबाग रामलीला : राम वन गमन का दृश्य देख भावुक हुए भक्त

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ऐशबाग रामलीला : राम वन गमन का दृश्य देख भावुक हुए भक्त

ऑनलाइन राम वनवास, केवट राम संवाद, दशरथ मरण लीला ने मन मोहा

लखनऊ। श्रीराम लीला समिति ऐशबाग के तत्वावधान में रामलीला मैदान के तुलसी सभागार में ऑनलाइन चल रहे रामोत्सव-2021 के  चौथे दिन हुई राम वनवास-प्रजा विद्रोह, निषादराज-राम मिलन, केवट राम संवाद, चित्रकूट गमन, सुमन्त का अयोध्या प्रस्थान, दशरथ विलाप, दशरथ मरण, भरत का ननिहाल से वापसी, कैकेई भरत संवाद संवाद, भरत द्वारा कैकेई त्याग और भरत कौशल्या संवाद लीला ने दर्शकों को मंत्रमुग्ध किया।

रामलीला के पूर्व रूद्र कला अकादमी के कलाकारों पर्णिका और वंशिका ने हर घर में मनेगी दिवाली पर आकर्षक नृत्य के जरिए रामचन्द जी के अयोध्या प्रस्थान की खुशी को प्रकट किया। मन को मोह लेने वाली इस प्रस्तुति के उपरान्त साक्षी, ईशिका और आयुषी ने महादेव शिव शम्भो, वर्षा, खुशी और दिवांशी ने अवध में राम, पर्णिका व वंशिका ने तराने की उत्कृष्ठ प्रस्तुति दी। इसी क्रम में रीना श्रीवास्तव ने स्तुति नृत्य की मनोरम प्रस्तुति दी।

रामलीला की शुरूआत राम वनवास-प्रजा विद्रोह लीला से हुई। इस प्रसंग में राम, दशरथ जी का आशीर्वाद लेकर वनवास के लिए प्रस्थान करते हैं, तो उनके साथ सीता जी और लक्ष्मण भी जाने को तैयार हो जाते हैं और तीनों जब अयोध्या से वन की ओर निकलते हैं, तो राज्य की प्रजा को यह बात बहुत अखरती है और वह राज्य के विरूद्ध विद्रोह कर देते हैं। यह बात जब राम को पता चलती है तो वह अपनी प्रजा को समझाते हैं कि वह ऐसा न करें, बहुत समझाने पर वह मानते हैं, पर वह राम के साथ राज्य की सीमा तक आने का आग्रह करते हैं। राज्य की सीमा समाप्त होते ही राम अपनी प्रजा से कहते हैं कि वह वापस लौट जायें। सब वापस हो जाते हैं और सुमन्त राम को लेकर आगे बढ़ते हैं तभी रास्ते में उन्हें निषादराज रोक लेते हैं और अपने साथ वन में ले जाकर विश्राम करने को कहते हैं। उनसे सारा वृतान्त पूछते हैं और वह उनको लेकर नदी तट पर जाते हैं। जहां केवट मल्लाह अपनी नौका को लेकर आता है और वह उनके चरण पखार कर प्रसाद रूप में ग्रहण करता है और राम को नदी के दूसरे छोर पर ले जाता है। नदी पार करने के पश्चात राम चित्रकूट की ओर प्रस्थान करते हैं, इसके उपरान्त सुमन्त रथ को लेकर अयोध्या वापस आ जाते हैं।

अन्य प्रसंगों में जब सुमन्त अयोध्या वापस आकर राजा दशरथ को पूरा वृतान्त सुनाते हैं तो राजा दशरथ बहुत दुखी होते हैं और राम के मोह में अपने प्राण त्याग देते हैं। इसके अलावा भरत का ननिहाल से वापस आना, कैकेई भरत संवाद संवाद, भरत द्वारा कैकेई त्याग और भरत कौशल्या संवाद लीला हुई। दशरथ की मृत्यु के उपरान्त भरत अपनी ननिहाल से वापस अयोध्या लौटते हैं और अपनी मां कैकेई से पूछते हैं कि उन्होंने ऐसा क्यों किया? इस बात पर कैकेई और भरत के मध्य काफी वाद-विवाद होता है और भरत अपनी मां का त्याग कर देते हैं। इस बात की जानकारी जब कौशल्या को हुई तो उन्होंने भरत को समझाने का भरसक प्रयास किया पर भरत ने उनकी बात न मानी और स्वयं वन में कुटी बनाकर रहने के लिए चले गये। इन्हीं दृश्यों और प्रसंगों सहित आज की रामलीला का समापन हुआ।

ऑनलाइन रामलीला के उपरान्त आज ’अमृतायन’ संस्था द्वारा कवियत्री सम्मेलन का आयोजन किया गया, जिसमें शोभा दीक्षित भावना, ज्योति राय जीवन ज्योति, रेनू द्विवेदी, वर्षा श्रीवास्तव, नीलम रावत और प्रतिभा गुप्ता ने अपनी भक्तिपूर्ण कविताओं से श्रोताओं को भाव विभोर किया। इस अवसर पर श्री राम लीला समिति के अध्यक्ष हरीशचन्द्र अग्रवाल, सचिव पं. आदित्य द्विवेदी, मयंक रंजन और प्रमोद अग्रवाल उपस्थित थे।

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