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टॉप टेन में जगह नहीं बना सका लखनऊ, आखिर कहां रह गयी कमी

  • गॉर्बेज फ्री सिटी में राजधानी ने हासिल की वन स्टार रैंकिंग 
  • छह हजार अंकों के सर्वेक्षण में मिले 4586.17 अंक 

लखनऊ। स्वच्छ शहरों में लखनऊ की रैंकिंग में पिछले साल की तुलना में कोई सुधार नहीं हुआ है। लखनऊ नगर निगम ने शहर में सफाई व्यवस्था को बरकरार रखने में सफलता जरूर हासिल की है। हालांकि लखनऊ नगर निगम ने उत्तर प्रदेश में टॉप किया है। उत्तर प्रदेश में उसे नंबर वन का खिताब मिला है। हर साल की तरह इस बार भी लखनऊ टॉप टेन में अपनी जगह नहीं बना सका है। देश में बारहवें नंबर पर लखनऊ रहा है। इससे पहले भी लखनऊ देश में 12वें नंबर था। 

दिल्ली के विज्ञान भवन में राष्ट्रपति ने स्वच्छ सर्वेक्षण-2021 की रैंकिंग का सम्मान महापौर संयुक्ता भाटिया और नगर आयुक्त अजय कुमार द्विवेदी को दिया। इस मौके पर स्वच्छता सर्वेक्षण प्रभारी संयुक्त निदेशक डॉ अरविंद राव ने पुरस्कार प्राप्त किया।यह सर्वेक्षण कुल छह हजार अंकों का था। 'स्वच्छ भारत मिशन' के तहत स्वच्छ सर्वेक्षण-2021 सर्वेक्षण में 4320 शहरों ने भी भाग लिया था। नगर निगम लखनऊ को बेस्ट स्टेट कैपिटल सिटी इन सिटीजन फीडबैक अवार्ड प्राप्त हुआ है। इसके अलावा गॉर्बेज फ्री सिटी में स्टार रेटिंग 3 स्टार रेटिंग प्राप्त करने के लिए पुरस्कार मिला है। जबकि 2020 में इसमें 1 स्टार रेटिंग प्राप्त हुई थी। 

लखनऊ से सांसद और देश के रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने लखनऊवासियों को बधाई दी है। उन्होंने कहा कि पिछले कुछ वर्षों में स्वच्छता की दृष्टि से, लखनऊ शहर में बहुत बदलाव आया है और देश भर में उसकी रैंकिंग में लगातार सुधार हुआ है। लखनऊ महज़ कुछ वर्षों में 269 से लम्बी छलांग लगा कर देश में 12वाँ और प्रदेश में सबसे अधिक स्वच्छ शहर बन गया है। 

वर्ष 2020 में 12वीं रैंक मिली थी 

वर्ष 2019 में 121वीं रैंक, वर्ष 2018 में 115वीं रैंक, वर्ष 2017 में 269वीं रैंक मिली थी। वर्तमान वर्ष 2021 को तीन-तीन माह में विभाजित कर अंक दिए गए थे। सर्वेक्षण कुल 6000 अंकों का था। तीन भागों में सर्वेक्षण किया गया था। घर-घर से कूड़े को एकत्र करना, परिवहन एवं समुचित निस्तारण करना, छटाई करना। 

नगर निगम का दावा 

कूड़ा उठान के लिए 500 से अधिक वाहन लगाए थे। चार कम्पार्टमेंट भी थे जिसमे जिसमे सूखा, गीला कचरा, रिसाइक्लेबल कचरा, मेडिकल, जैविक कचरा अलग-अलग रखकर उसे प्लांट में भेजा गया।

वर्तमान में शहर में कुल 84 पीसीटीएस (पोर्टेबल कांपैक्टर ट्रांसफर स्टेशन) स्थापित हैं, जिससे कूड़ा बाहर नहीं दिखता है। सभी प्रमुख व्यवसायिक क्षेत्रों में 1800 थ्री-बिन लगाए गए हैं। स्मार्ट सिटी के बजट से 18 स्मार्ट अंडरग्राउंड बिन्स लगाए जाने हैं। 1800 मीट्रिक टन प्रतिदिन की क्षमता का प्लांट शिवरी में स्थापित किया गया है जहां पर शहर के ट्रांसफर स्टेशनों से कूड़े को लाकर उसका पृथक्कीकरण किया जाता है। इस प्लांट सर्वप्रथम मेटिरियल रिकवरी फेसिलिटी में सूखे कूड़े को 13 प्रकार के पदार्थो जैसे लकड़ी, कांच, रबर, प्लास्टिक इत्यादि से पृथक-पृथक कर लिया जाता है। छह माह में करीब 10,000 स्थलों एवं खाली प्लाटों को कूड़े से मुक्त किया गया है। करीब 120 खुले कूड़ा घरों को समाप्त किया गया है। शहर में मुख्य 62 डिवाइडर रोड की सफाई हेतु नौ मैकेनाइज़ स्वीपिंग मशीन चलाये जा रहें हैं। कारकस प्लांट की स्थापना की गई। जहां मृत पशुओं के शवों का स्वच्छतापूर्वक निस्तारण किया जाता है। 

खुले में शौच मुक्त (ओडीएफ प्लस-प्लस), वाटर प्लस जीएफसी. (गार्बेज फ्री सिटी) सर्टिफिकेशन पर कुल 1800 अंक निर्धारित किए गए थे। नगर निगम लखनऊ वर्तमान में खुले में शौच से पूरी तरह से मुक्त शहर है। चौदह सौ घरों में शौचालय बनाए गए। सार्वजनिक कुल पुरुष शौचालय 394, पिंक, शौचालय 32, कुल यूरिनल 16 हैं। 

घर-घर से कूडे़ के संग्रहण, निस्तारण पर 2400 अंक मे से मिले 1936.39 

घर-घर से कूडे़ के संग्रहण, परिवहन एवं समुचित निस्तारण के 2400 अंक निर्धारित किये गये। समस्त जोनो में 100 टन क्षमता के मेटिरियल रिकवरी फेसिलिटी प्वाइंट स्थापित किए गए है जहाँ से प्राप्त मैटिरियल को प्रोसेस कर पुनः उपयोग बनाया जाता है। इसके अतिरिक्त कंस्ट्रक्शन एवं डेमोलिशन वेस्ट प्लांट रायबरेली रोड पर स्थापित किया गया है जिसमें मलबा/बिल्डिंग की सामग्रियां पृथक कर पुनः उपयोग हेतु तैयार कर ली जाती है। इसके अतिरिक्त आवश्यकतानुसार सामग्री विक्रय भी की जाती है। शहर में मुख्य 62 डिवाइडर रोड की सफाई हेतु 09 मैकेनाइज़ स्वीपिंग मशीन चलाये जा रहें हैं। नगर निगम लखनऊ द्वारा शहर के स्वच्छता हेतु कारकस प्लांट की स्थापना की गयी है, जहाँ मृत पशुओं के शवो का स्वच्छतापूर्वक निस्तारण किया जाता है। 

सर्टिफिकेशन पर कुल 1800 अंक निर्धारित, मिले 1100

खुले में शौच मुक्त (ओ.डी.एफ.++), वॉटर+, जी.एफ.सी. (गॉर्बेज फ्री सिटी) सर्टिफिकेशन पर कुल 1800 अंक निर्धारित किए गए। वर्तमान में शहर में कुल 390 सामुदायिक/सार्वजनिक शौचालय निर्मित कराये गये हैं। विजिटर तथा टूरिस्ट के लिए 96 वातानुकूलित डी-लक्स शौचालयों का निर्माण कराया गया है। इनके अतिरिक्त 510 यूरिनल प्वाइंट भी बनाये गये है। सेफ सिटी परियोजना के अंतर्गत महिलाओं के विशेष रूप से 74 पिंक शौचालयों का निर्माण किया गया है जिसमें इंसीनरेटर, सेनेटरी नैपकिन की वेंडिंग मशीन, हैंड ड्रायर, डिस्पेंसर, पेपर टॉवेल, बेबी चेन्जिंग स्टेशन का प्राविधान किया गया है। 

शहर में स्वच्छता के महत्वपूर्ण बिन्दु में गंदे पानी का समुचित ट्रीटमेंट सुनिश्चित किया गया है। ट्रीटमेंट पश्चात 85 प्रतिशत प्राप्त पानी को पुर्नउपयोग में लाया जाता है जिससे डिवाइडर पर पौधो की सिंचाई इत्यादि लिए इस्तेमाल किया जाता है। सीवेज स्लज के ट्रीटमेंट के लिए भरवारा में 345 एम.एल.डी., दौलतगंज में 54 एम.एल.डी., वृंदावन योजना में 32 एम.एल.डी. क्षमता के सीवेज ट्रीटमेंट पूर्ण क्षमता के साथ संचालित किए गए है। सेप्टिक टैंक की सफाई के लिए 43 विशेष वाहन तैयार किये गये। 

सिटीजन पार्टीसिपेशन के में 1800 अंक निर्धारित, मिले 1549.78

नागरिको की जागरुकता एवं योजना में सहभागी बनने के संबंध में सिटीजन पार्टीसिपेशन के संबंध में 1800 अंक निर्धारित किए गए। नागरिको की स्वच्छता के प्रति सहभागिता सुनिश्चित करायी गयी जिसके लिए विभिन्न प्रकार के कार्यक्रम निरन्तर कराये गये। साथ ही आम जनता की राय भी प्राप्त की गयी। शिकायतो का त्वरित निस्तारण, व सुझावों पर विचार किया गया। नागरिकों द्वारा अपना फीडबैक भारत सरकार की वेबसाइट पर दर्ज कराने एवं भारत सरकार द्वारा जारी स्वच्छता ऐप को डाउनलोड कर उस पर गंदगी सम्बन्धी शिकायते अपलोड करने, शिकायतों का निस्तारण, निस्तारण उपरांत नागरिकों का फीडबैक पर भी नगर निगम को अंक प्राप्त हुए।

प्लास्टिक को बंद करने का एक अभियान भी शहर में चलाया गया। प्लास्टिक के विकल्प को बढ़ावा देने के लिए नगर निगम लखनऊ थैला बैंक की शुरुआत की गयी जो प्रत्येक जोन में स्थापित है। इसके अतिरिक्त बर्तन बैंक सभी कल्याण मण्डपों में प्रारम्भ कराया गया है। साथ ही पुराने कपड़ो का जरूरतमंदों तक पहुँचाने के लिए ‘नेकी की दीवार’ के नाम से कपड़े एकत्रित किए गए जहाँ से कोई भी व्यक्ति बिना किसी शुल्क के कपड़े ले सकता है।

इस वजह से पिछड़ा लखनऊ 

आईआईएम रोड पर घैला में पांच लाख टन लगे कूड़े के ढेर का निस्तारण दो साल में नहीं हो सका है। शिवरी प्लांट में भी 1.85 लाख टन कचरे का पहाड़ बना हुआ है। सर्वेक्षण के दौरान वार्डों में साफ-सफाई ठीक नहीं पाई गई। जगह-जगह सीवर लाइन की खोदाई की वजह से गलियां उखड़ी पड़ी थीं। कूड़ा निस्तारण के लिए मैटेरियल रिकवरी फैसिलिटी सेंटर (एमआरएफ) की उपयोगिता भी पूरी नहीं हो सकी। सड़कों पर तीन डस्ट बिन लगाए गए हैं। घर घर से कूड़ा कलेक्शन के अलग अलग कम्पार्टमेंट वाली गाड़ियां उपलब्ध करायी गयी हैं लेकिन सूखा और गीला कचरा एक साथ ट्रांसफर स्टेशन तक पहुंच रहा है। गली-मोहल्लों में नालियां चोक मिलीं। शौचालयों में गंदगी और ताले लगे हुए हैं। 

इस तरह से मिले अंक 

स्वच्छता सर्वेक्षण 2021 का सर्वे कुल छह हजार अंक का था। इसमें लखनऊ नगर निगम को सिर्फ 4586.17 अंक ही मिल पाए। दस्तावेजों के लिए कुल 2400 अंक का सर्वे था जिसमें 1936.39 अंक हासिल हुए। सिटीजन फीडबैक के निर्धारित 1800 में 1549.78 अंक मिल सके। सर्टिफिकेशन के लिए ओडीएफ प्लस, ओडीएफ प्लस प्लस और गारबेज फ्री सिटी (जीएफसी) के लिए 1800 अंक तय थे। जिसमें नगर निगम 1100 अंक दिए गए।

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