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बिजली कर्मचारियों के इस ऐलान से यूपी चुनाव की राजनीति गरमाई

पुरानी पेंशन नहीं तो वोट नहीं, को लेकर सभी पार्टियों को लिखा पत्र 

लखनऊ। विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति, उप्र ने विधान सभा के चुनाव के मद्देनजर सभी राजनीतिक दलों को पत्र भेजकर मांग की है कि वे अपने चुनाव घोषणा पत्र में पुरानी पेंशन बहाली, सरकारी/सार्वजनिक क्षेत्र का निजीकरण बन्द करने, प्रदेश को सस्ती बिजली देने हेतु सभी ऊर्जा निगमों का एकीकरण कर उप्रराविपलि का  गठन, नियमित पदों पर नियमित भर्ती और आउटसोर्स/संविदा कर्मचारियों का नियमितीकरण सम्मिलित करें। संघर्ष समिति ने चेतावनी दी है कि यदि राजनीतिक दलों ने उक्त विषयों को अपने चुनाव घोषणापत्र में सम्मिलित न किया तो आगामी विधानसभा चुनाव में उत्तर प्रदेश के बिजली कर्मी पुरानी पेंशन नहीं तो वोट नहीं के अभियान चलायेंगे।


संघर्ष समिति ने एलान किया कि प्रदेश के बिजली कर्मी व उनके परिवार उन राजनीतिक दलों को वोट नहीं देंगे जो पुरानी पेंशन का वायदा नहीं करेंगे। संघर्ष समिति ने यह भी कहा कि यदि एक से अधिक राजनीतिक दल पुरानी पेंशन का वायदा करते हैं तो बिजली कर्मी व उनके परिवार ऐसे दलों में से किसी को भी अपनी पसन्द से वोट देंगे।

संघर्ष समिति ने इस बाबत जे पी नड्डा,(राष्ट्रीय अध्यक्ष, भाजपा), प्रियंका गांधी(महासचिव, कांग्रेस), अखिलेश यादव(राष्ट्रीय अध्यक्ष, सपा), सुश्री मायावती(राष्ट्रीय अध्यक्ष, बसपा), संजय सिंह(आप), जयन्त चौधरी(राष्ट्रीय अध्यक्ष, आरएलडी), स्वतंत्र देव सिंह(प्रदेश अध्यक्ष, भाजपा), नरेश उत्तम पटेल(प्रदेश अध्यक्ष, सपा), सभाजीत सिंह(प्रदेश अध्यक्ष, आप), अजय कुमार लल्लू(प्रदेश अध्यक्ष, कांग्रेस), अनुप्रिया पटेल(राष्ट्रीय अध्यक्ष, अपना दल), डा. गिरीश शर्मा(महामंत्री, भाकपा), डा. हीरालाल यादव(प्रदेश मंत्री, भाकपा-मा) को पत्र प्रेषित किया है।

संघर्ष समिति के प्रमुख पदाधिकारियों वी पी सिंह, प्रभात सिंह, जी वी पटेल, जय प्रकाश, गिरीश पाण्डेय, महेन्द्र राय, सुहेल आबिद, पी के दीक्षित, ब्रजेश त्रिपाठी, राजेन्द्र घिल्डियाल, प्रेम नाथ राय, आलोक कुमार श्रीवास्तव, जवाहर लाल विश्वकर्मा, विनय शुक्ल, वी के सिंह कलहंस, सनाउल्लाह, शशिकान्त श्रीवास्तव, मो. वसीम, ए के श्रीवास्तव, भगवान मिश्र, रफीक अहमद मुख्यतया बैठक में सम्मिलित थे।



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