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सभी पार्टियों को खल रही है बीजेपी, आखिर माजरा क्या है?

उत्तर प्रदेश की पुलिस के बाद अब योगी जी पर ही रोक लगाने की मांग 

लखनऊ। चुनावी तारीख करीब आते-आते तमाम पार्टियों की खुद सत्ता में आने की ख्वाहिश अब बीजेपी की जीत का खौफ बनकर तांडव करने लगी है। बौखलाई हुई पार्टियाँ कभी उत्तर प्रदेश के पुलिस अधिकारियों के तबादले की अपील करने लगती हैं, तो कभी माननीय मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ पर रोक लगाने की ही बात करने लगती है।


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हाल ही में समाजवादी पार्टी के प्रवक्ता फखरुल हसन चाँद ने योगी जी पर रोक लगाई जाने की बात कही है। प्रवक्ता द्वारा देसी माइक्रोब्लॉगिंग ऐप, कू पर एक पोस्ट साझा की है, जिसमें कहा गया है, "समाजवादी पार्टी मांग करती है योगी जी पर रोक लगाई जाए।" 

इतना ही नहीं, प्रवक्ता ने मुख्य चुनाव आयुक्त, भारत निर्वाचन आयोग को इसके लिए आज एक पत्र भी लिख डाला है। इसमें पूरी तरह से योगी जी के विरोध में बात करते हुए पार्टी के राष्ट्रीय सचिव, राजेंद्र चौधरी ने कहा है, "समाजवादी पार्टी मांग करती है कि उत्तर प्रदेश में स्वतंत्र, निष्पक्ष तथा निर्भीक चुनाव सम्पन्न कराने के लिए सत्तारूढ़ भाजपा के मुख्यमंत्री जी को पद की गरिमा के अनुरूप संयमित, मर्यादित और आदर्श आचार संहिता के अनुकूल भाषा के इस्तेमाल के सम्बन्ध में प्रभावी निर्देश तत्काल जारी किया जाए।"

पत्र में यह भी कहा गया है कि योगी जी अन्य पार्टियों के खिलाफ भ्रष्ट शब्दों का प्रयोग करते हैं। इसके अंतर्गत 'आगरा में 10 मार्च के बाद बुल्डोजर चलेगा', 'लाल टोपी मतलब दंगाई, हिस्ट्रीशीटर' और 'गर्मी कैसे शांत होगी, मैं जानता हूँ' जैसी बातों का ज़िक्र किया गया है।

उधर जनता ने उलट समाजवादी पार्टी के खिलाफ ही भ्रष्टवादी समाजवादी, टोंटिचोर आदि कहकर भर-भर कर इस पोस्ट पर कमैंट्स कर डाले हैं। 

वहीं एक यूज़र ने लिखा है, "योगी जी ने सभ्य नागरिक के अधिकार को सुरक्षा प्रदान करने हेतु अपराधी नेताओं को चेतावनी दी है। तुम अगर शरीफ हो तो डरने की ज़रूरत नहीं है।"

उधर आज़ाद समाज पार्टी ने पुलिस को बताया बिकाऊ

आज़ाद समाज पार्टी को भी सभी सरकारी तत्व बिके हुए प्रतीत हो रहे हैं। विगत दिन पार्टी के नेशनल प्रेसिडेंट चंद्र शेखर आज़ाद ने कू पर एक पत्र की प्रतिलिपि साझा की, जिसमें उन्होंने प्रत्यक्ष रूप से उत्तर प्रदेश पुलिस के बिकाऊ होने की बात कही है। इतना ही नहीं, अधिकारियों के तबादले का आग्रह भी किया। 

आज़ाद ने मंच पर कहा है:

"मुख्यमंत्री की अनुशंसा पर तैनात गोरखपुर के वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों को चुनाव आयोग , निष्पक्ष चुनाव सुनिश्चित कराने हेतु तत्काल प्रभाव से स्थानांतरित करें!! चुन-चुन कर मुख्यमंत्री ने भाजपा के रिश्तेदारों तथा एक जाति विशेष के अधिकारी वोटरों को धमकाने के लिए नियुक्त किए हैं!


मैं चुनाव आयोग को पत्र लिखकर लोकतांत्रिक मूल्यों की रक्षा हेतु उनके तबादले का आग्रह करता हूं। @ECISVEEP @ceoup"

मुख्यमंत्री की अनुशंसा पर तैनात गोरखपुर के वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों को चुनाव आयोग , निष्पक्ष चुनाव सुनिश्चित कराने हेतु तत्काल प्रभाव से स्थानांतरित करें!! चुन-चुन कर मुख्यमंत्री ने भाजपा के रिश्तेदारों तथा एक जाति विशेष के अधिकारी वोटरों को धमकाने के लिए नियुक्त किए हैं! मैं चुनाव आयोग को पत्र लिखकर लोकतांत्रिक मूल्यों की रक्षा हेतु उनके तबादले का आग्रह करता हूं। @ECISVEEP @ceoup
योगी पर लगाए इल्ज़ाम

गोरखपुर में निष्पक्ष विधानसभा चुनाव कराने के लिए तैनात पुलिस अधिकारियों के स्थानांतरण के संदर्भ में चंद्र शेखर आज़ाद ने मुख्य चुनाव आयुक्त उत्तर प्रदेश, उच्चतम न्यायालय और उच्च न्यायालय इलाहाबाद, उत्तर प्रदेश को पत्र लिखा है। इसमें यह कहा गया है कि पुलिस अधिकारियों की नियुक्ति योगी जी ने जीतने के उद्देश्य से कराई है। 

पत्र में आगे कहा गया है कि वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक डॉ. विपिन टांडा भारतीय जनता पार्टी के सांसद डॉ. सत्यपाल सिंह मलिक के दामाद हैं और इनका भारतीय जनता पार्टी के प्रति निजी लगाव भी है। उक्त वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक द्वारा भारतीय जनता पार्टी के प्रत्याशी और मुख्यमंत्री को लाभ पहुँचाने के लिए उनकी ही जाति विशेष के पुलिस अधिकारियों को उनकी विधानसभा में नियुक्त कर दिया गया है। क्षेत्राधिकारी गोरखनाथ रत्नेश सिंह और इंस्पेक्टर गोरखनाथ मनोज सिंह को इसी उद्देश्य से नियुक्ति दी गई है कि वे आम जनता को डरा धमकाकर या चुनाव के दौरान धांधली करवा कर मुख्यमंत्री की जीत सुनिश्चित करा सकें। पार्टी का कहना है कि ये अधिकारी बीजेपी के एजेंट हैं।

सवाल यह उठता है कि तमाम पार्टियाँ महज़ एक पार्टी पर ही क्यों बंदूक ताने खड़ी हैं?? खैर, जवाब का सभी को बेसब्री से इंतज़ार है।

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