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बाल निकुंज : ग्रांड पैरेंट्स ने बच्चों को सुनायी प्रेरक कहानियाँ, दिया ये संदेश

लखनऊ। बाल निकुंज गर्ल्स एकेडमी, बेलीगारद शाखा के शिवसहाय जी सभागार में रविवार को बच्चों के ग्रांड पैरेण्ट्स के अनुभवों की पाठशाला का आयोजन किया गया। जिसमें स्टूडेंट्स अपनी तीसरी पीढ़ी के अग्रज दादा-दादी, नाना-नानी के साथ उपस्थित हुए। कार्यक्रम का शुभारम्भ माँ सरस्वती पूजन एवं वंदन से प्रारंभ हुआ और उपस्थित ग्राण्ट पैरेण्ट्स का माला पहनाकर स्वागत किया गया। दादा-दादी व नाना-नानी ने बच्चों को अपने अनुभवों की पाठशााला में अनेक शिक्षाप्रद कहानियाँ सुनायी। जिन्हें सुनकर सभी बच्चे अत्यन्त प्रफुल्लित हो रहे थे। इनके अनुभवों का रसास्वादन कर अपने आपको इस नवीन युग में इनकी कहानियोंसे ज्ञान अर्जित कर भविष्य के लिए अपने आपको सशक्त बना रहे थे। 

एक स्टूडेंट्स की दादी मालती देवी ने रट्टू तोते... की कहानी सुनायी। एक बगीचे में बहुत सारे तोते रहते थे, बहेलिया सुबह आता, जाल बिछाता और तोतों को पकड़कर रोज बेचता। यह देखकर पड़ोस में रहने वाले एक सज्जन को अच्छा न लगा, उन्हें तोतों पर दया आयी और उन्होंने तोतों को पढ़ाने का निश्चय किया। जंगल के सभी तोतों को बारी-बारी से बहेलिया आयेगा, दाना डालेगा, जाल बिछायेगा, उसमें हम नहीं फंसेगें नहीं फंसेंगे’ सिखाया। कुछ दिनों बाद पूरे जंगल में समस्त तोते यह बोलने लगे और पूरा जंगल इसी लाइन से गुंजायमान होने लगा। कुछ दिन बाद बहेलिया पुनः जंगल में आया तो सभी तोते यही बोलते हुए सुनायी देने लगे। बहेलिया चिन्तित हो उठा और बोला अब क्या होगा। फिर उसने पुनः दाना डाल, जाल बिछाया दिया और छिपकर बैठ गया। इतने में तोते धीरे-धीरे दाना देख जाल पर आकर बैठने लगे जंगल के सभी तोते इस प्रकार से जाल में फंस गये। बहेलिया जाल को समेटकर फंसे हुए सभी तोते को लेकर चल दिया परन्तु सभी तोते जाल के अन्दर से भी वही रटते रहे बहेलिया आयेगा, दाना डालेगा, जाल बिछायेगा, उसमें हम नहीं फंसेगें नहीं फंसेंगे’ इससे बच्चों को शिक्षा मिलती है कि उन्हें रट्टू तोते की तरह न होकर पढ़ाई समझ कर करनी चाहिए। 

इसी तरह से प्रमोद प्रकाश ने बच्चों को संस्कारिक बनने की कहानी सुनायी। उन्होंने कहा कि घर से निकलने से पहले हमेशा माता-पिता के पैर छूकर अमृत रूपी आशीर्वाद लेकर पूरे आत्मविश्वास के साथ अपने कार्य के लिए निकलना चाहिए। वहीं वीके मिश्रा ने राजा-रानी की कहानी सुनायी। जिसका उद्देश्य था कि हमें हमेशा विचार-विमर्श कर बड़ी सूझ-बूझ के साथ कोई भी काम करना चाहिए। इसी प्रकार से बच्चे के बाबा अशोक अवस्थी ने ‘पुत्रों में सम्पत्ति के बंटवारे की कहानी’ और रामकुमार अवस्थी द्वारा ‘एकता में बल’ की कहानी सुनायी गयी। कालेज के प्रबंध निदेशक एच.एन. जायसवाल, कोआडिर्नेटर सुधीर मिश्रा एवं प्रधानाचार्या डाॅ. अनूप कुमारी शुक्ला ने कहानी सुनाने वाले सभी दादा-दादी, नाना-नानी को दुशाला भेंटकर सम्मानित किया। इस अवसर पर कालेज के शिक्षक-शिक्षिकायें, स्टूडेंट्स व अभिभावकगण उपस्थित रहे।

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