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नगर निगम की आवासीय योजना में अब भू उपयोग का विवाद, जहां पेड़ लगने थे वहां खड़ी कर दी इमारत

  • ग्रीन बेल्ट व वाटर बॉडी पर 200 करोड़ से बन रही अहाना एन्क्लेव
  • महायोजना 2031 में दर्शित भू उपयोग पर नगर निगम ने लगाई आपत्ति
  • अब आवासीय अंकित करने का लिखा पत्र

लखनऊ। नगर निगम ने अपनी पहली आवासीय योजना(अहाना एन्क्लेव) का काम बिना भू उपयोग बदले ही शुरू करा दिया। औरंबागाद खालसा में जिस खसरा संख्या पर 684 फ्लैट निर्माणाधीन हैं। उसका भू उपयोग महायोजना 2031 में ग्रीन लैंड, तालाब व आंशिक रूप से आवासीय के रूप में दर्ज है। नगर एवं ग्राम नियोजन विभाग की आपत्ति के बाद आवासीय परियोजना काम रूक गया है। इस वजह से रेरा की गाइडलाइन के अनुसार निर्माण कार्य को पूरा होना भी मुश्किल है। लिहाजा, परियोजना की लागत में भी वृद्धि होना तय है। इससे नगर निगम को बड़ा नुकसान होने की आशंका है। अब नगर निगम की ओर से एलडीए में भू उपयोग पर आपत्ति डाली गई है। 

औरंगाबाद खालसा में खसरा संख्या 1650, 1686स, 1704, 1706ख, 1710, 1711, 1713ख, 1707, 1705, 1708, 1709क व 1712 महायोजना 2031 में जलाशय व ग्रीन बेल्ट के रुप में दर्ज है। इसी पर नगर निगम की अहाना एन्क्लेव नाम से बहुमंजिला आवासीय योजना निर्माणाधीन है। जबकि ग्राम एवं नगर नियोजन विभाग के सहयुक्त निदेशक की ओर से भू उपयोग से सम्बंधित जानकारी दी गई है कि महायोजना 2031 में उक्त खसरा संख्या ग्रीन बेल्ट, जलाशय व आंशिक रूप से आवासीय रूप में दर्ज है। अधिकारी बताते हैं कि उक्त खसरा संख्याओं के वास्तविक भू-उपयोग की महायोजना के प्रारूप में स्थिति स्पष्ट नहीं है। एलडीए ने मार्च 2017 में ग्रुप हाउसिंग मानचित्र के लिए स्वीकृति/अनापत्ति जारी कर दी। इतना ही नहीं, वर्ष 2021 में संशोधित मानचित्र भी पास कर दिया गया। इसी आधार पर परियोजना का रेरा में भी पंजीकरण करा दिया गया। कहीं से भी भू उपयोग पर आपत्ति नहीं जताई गई। 

एलडीए ने पास किया संशोधित मानचित्र 

नगर आयुक्त इंद्रजीत सिंह की ओर से एलडीए उपाध्यक्ष को पत्र लिखकर भू उपयोग आवासीय किए जाने के लिए आपत्ति की गई है। इस पत्र में लिखा है कि संशोधित मानचित्र पर अनापत्ति उपलब्ध करा दी जानी चाहिए थी लेकिन विकास प्राधिकरण की ओर से ऐसा नहीं किया गया। यह स्थिति तब है जब इस परियोजना में म्युनिसिपल बांड के 200 करोड़ रुपये लगाए गए हैं। निवेशकों को ब्याज समेत यह रकम वापस करनी है। वहीं मुख्य सचिव ने ससमय प्रोजेक्ट को पूर्ण किये जाने के निर्देश दिये गये हैं। परियोजना के विकास में बाधक ओमेक्स सिटी के साथ कोर्ट में चली सुनवाई में भी एलडीए से पूर्व स्वीकृत मानचित्र की सत्यापित प्रति प्रस्तुत की गई थी, जिसके आधार पर ही निगम के पक्ष में बाद में निर्णय हुआ। 

नगर निगम का दावा नही है तालाब व ग्रीन लैंड

हालांकि सहायक नगर आयुक्त/ डिप्टी कलेक्टर की ओर से जानकारी दी गई है कि परियोजना में सम्मिलित खसरा संख्याओं में से कोई भी गाटा राजस्व अभिलेखों में तालाब, वाटर बॉडी दर्ज नहीं है। यह भी बताया गया है ओमेक्स की भूमि का भू उपयोग आवासीय था। वर्ष 2005 में ओमक्स स्टिी के स्वीकृत नक्शे में सम्मिलित खसरा संख्याओं में निगम की भूमि के बदले ओमेक्स से एक्जाई रूप में प्राप्त भूमि है, इसमें कोई तालाब सम्मिलित नहीं है। 


वर्तमान में लगभग 70 प्रतिशत आवासीय योजना का काम हो चुका है। 78 लोगों को फ्लैट आवंटित हो चुके हैं और तीन महीने में कब्जा देने का वादा किया गया है। लेकिन भू उपयोग के नए विवाद के बाद नगर निगम के लिए समय पर काम पूरा करना समस्या बन गया है। इसी के चलते नगर निगम ने महायोजना 2031 में इस भूमि का भू उपयोग आवासीय अंकित करने का अनुरोध किया है। 


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