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जनसुनवाई में उठाया परिषदीय विद्यालयों में शिक्षकों की कमी का मुद्दा

लखनऊ। बाल अधिकार पर उत्तर प्रदेश राज्य बाल अधिकार संरक्षण आयोग ने विज्ञान फाउंडेशन व रेड ब्रिगेड ट्रस्ट संस्थाओं के सहयोग से गुरुवार को जनसुनवाई का आयोजन जिला पंचायत भवन सभागार, कैसरबाग में कियाl जनसुनवाई का आयोजन उत्तर प्रदेश राज्य बाल अधिकार संरक्षण आयोग के अध्यक्ष डा. देवेन्द्र शर्मा, आयोग की सदस्य डा. शुचिता चतुर्वेदी व श्यामजी त्रिपाठी की उपस्थिति में किया गया। जिसमें प्राथमिक व उच्च प्राथमिक विद्यालयों में शिक्षकों की कमी, कमरों की कमी, स्कूल के इन्फ्रास्ट्रक्चर में कमी, आरटीई के अंतर्गत प्राइवेट स्कूलों में नामांकन की समस्या, पॉस्को से सम्बंधित मामले, चाइल्ड लेबर व बाल अधिकार से सम्बंधित अन्य मुद्दों को सुना गया। 

जनसुनवाई में बाल अधिकारों से जुड़े विभिन्न मुद्दों को विद्यालय प्रबंधन समिति, विज्ञान फाउंडेशन व रेड ब्रिगेड ट्रस्ट के सदस्यों ने आयोग के सामने रखाl जनसुनवाई में आए हुए विभिन्न विद्यालयों जैसे तकरोही, हरदासीखेड़ा, पलटन छावनी, मडियांव, रायपुर, जुगौली, कसैला व कमता के विद्यालय प्रबंधन समिति के सदस्यों ने लिखित व मौखिक रूप से अपनी बात आयोग के सामने रखते हुए कहाकि उनके विद्यालयों में बच्चों की शिक्षा का स्तर बहुत चिंतनीय है क्योंकि इन स्कूलों में बच्चों की संख्या के हिसाब से बहुत ही कम अध्यापक हैं। कई विद्यालय तो एक ही टीचर के भरोसे चल रहे हैं। यही नहीं अध्यापकों के ऊपर कई सारे अन्य गैर शैक्षणिक कार्य भी रहते हैं। जब स्कूल में बच्चों को पढ़ाने के लिए टीचर ही पर्याप्त संख्या में नहीं होंगे तो ऐसे में बच्चों की शिक्षा का स्तर तो कमजोर होगा हीl इसके अलावा कई स्कूलों में बच्चों के पढ़ने के लिए कक्षा अनुसार पर्याप्त कमरे भी नहीं हैं टीचर की संख्या व कमरों की संख्या कम होने के कारण दो कक्षाओं के बच्चों को एक साथ बैठाना पड़ता है। जिससे कोर्स के अनुसार बच्चों की शिक्षा व्यवस्थित ढंग से नहीं हो पातीl विद्यालय प्रबंधन समिति के सदस्यों ने आयोग को अवगत कराया कि इन समस्याओं का  प्रार्थना पत्र जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी कार्यालय में दिया जा चुका है लेकिन अभी तक कोई कार्यवाही नहीं हुई है।

जनसुनवाई में शिक्षा का अधिकार अधिनियम - 2009 के मानकों के अनुसार बच्चों के लिए खेलकूद का मैदान, स्कूल की साफ़ सफाई, डेस्क बेंच व स्कूल के इंफ्रास्ट्रक्चर से सम्बंधित अन्य मुद्दों को भी विज्ञान फाउंडेशन संस्था की टीम द्वारा रखा गया। टीम की ओर से कहा गया कि आरटीई के मानकों के अनुसार बच्चों की गुणवत्तापूर्ण शिक्षा न सुनिश्चित होना भी बच्चों के शिक्षा के अधिकार का एक प्रकार से हनन ही है। टीम ने आयोग से मामले को अपने संज्ञान में लेकर इस पर समुचित कार्यवाही करते हुए बच्चों के शिक्षा के अधिकारों का संरक्षण करने की अपील की। रेड ब्रिगेड ट्रस्ट की टीम ने शिक्षा का अधिकार कानून के अंतर्गत प्राइवेट स्कूलों में 25% वंचित समुदाय के बच्चों के नामांकन से जुड़ी विभिन्न अनियमितताओं को रखा। इन अनियमितताओं के अंतर्गत कुछ विद्यालयों द्वारा बच्चों के नामांकन में आना कानी, बच्चों के अभिभावकों से नियम के विपरीत फीस मांगना आदि शामिल था। 


जनसुवाई में आए मामलों को आयोग के अध्यक्ष व दो सदस्यों द्वारा एक एक कर सुनने के बाद मामले को सम्बंधित विभागों के प्रतिनिधियों को तुरंत सौंपा और उस पर कार्यवाही कर आयोग को अवगत कराने को कहा गया। जनसुनवाई के अध्यक्षीय भाषण में डा. देवेन्द्र शर्मा ने कहाकि सभी विभाग तीन दिन के भीतर जनसुनवाई में आए मामलों का निस्तारण करते हुए आयोग को अवगत कराएँ। उन्होंने आरटीई के अंतर्गत फीस लेने वाले विद्यालयों की मान्यता रद्द करवाने का निर्देश भी बेसिक शिक्षा विभाग को दिया। धन्यवाद ज्ञापन आयोग के सदस्य श्याम जी त्रिपाठी ने दिया। उन्होंने सभी विभागों के प्रतिनिधियों व विज्ञान फाउंडेशन संस्था व रेड ब्रिगेड संस्था को इस तरह के आयोजन में सहयोग करने के लिए भी धन्यवाद दिया l 

जनसुनवाई में जिला बेसिक शिक्षा विभाग, आरटीई., राज्य परियोजना निदेशक, श्रम विभाग, चाइल्ड लाइन, बचपन बचाओ आन्दोलन, जिला प्रोबेशन अधिकारी व पुलिस आयुक्त के विभाग के प्रतिनिधि भी उपस्थित रहे। विज्ञान फाउंडेशन संस्था की ओर से संस्था सचिव संदीप खरे, प्रोग्राम मैनेजर ऋचा चंद्रा, प्रोग्राम कोर्डिनेटर देविका त्रिपाठी, रेड ब्रिगेड ट्रस्ट की ओर से अजय पटेल व विद्यालय प्रबंधन समिति के सदस्यों ने जनसुनवाई में भाग लिया।

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