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विधायक डा. नीरज बोरा ने सदन में उठाया मामला, आवासीय भवनों के व्यावसायिक उपयोग की नीति हो संशोधित

लखनऊ। राजधानी में 18 मीटर से अधिक चौड़े मार्ग पर स्थित भवनों को व्यवसायिक किये जाने और कम चौड़ाई वाले मार्ग के भवनों में भूभाग का कम से कम 25 प्रतिशत स्वरोजगार हेतु व्यावसायिक उपयोग किये जाने का विषय शुक्रवार को लखनऊ उत्तर के विधायक डा. नीरज बोरा ने मानसून सत्र में उठाया। नियम 51 के अन्तर्गत अध्यक्ष ने इस पर सरकार का ध्यानाकर्षण कराया है। विधायक डा. नीरज बोरा ने कहा कि राज्य सरकार से समाज के हर वर्ग को संरक्षण मिला है और राज्य की अर्थव्यवस्था को मजबूती दे रहे छोटे, मझोले व्यापारियों व उद्यमियों को भी संजीवनी मिली है। सरकार सदैव कुटीर उद्योगों को संरक्षण व बेरोजगारों को स्वरोजगार हेतु प्रोत्साहन भी देती आ रही है। उन्होंने कहा कि कोरोना काल में जनसामान्य को आवश्यक सुविधायें उपलब्ध कराने के समय यह अनुभव हुआ था कि अस्पताल, मेडिकल स्टोर एवं दैनिक उपयोग की आवश्यक वस्तुएं आबादी क्षेत्र में होनी चाहिए। बढ़ती आबादी और जनसंख्या घनत्व के दृष्टिगत यह आवश्यक और अपरिहार्य भी है। लखनऊ के विभिन्न क्षेत्रों में आवासीय भवनों में चल रही व्यावसायिक दुकानों के भू-उपयोग को लेकर आवास नीति के कतिपय प्रावधानों में आवश्यक बदलाव की आवश्यकता लम्बे समय से महसूस की जा रही है। 

डा. नीरज बोरा ने कहा कि इससे संबंधित प्रस्ताव आवास एवं शहरी नियोजन विभाग में लम्बित है और वर्तमान में ऐसे व्यापारियों, छोटे व मझोले कारोबारियों को विभाग द्वारा निरन्तर नोटिसें देकर ध्वस्तीकरण की चेतावनी दी जा रही है जबकि ये व्यापारी व कारोबारी पंजीकृत हैं और इनके माध्यम से सरकार को राजस्व भी मिलता है। विभाग द्वारा जारी हो रही नोटिसों से ये सभी दुःखी, आक्रोशित और आन्दोलित हैं। सम्बन्धित विषय पर नियमानुसार आवास एवं शहरी नियोजन विभाग अपना उत्तर विधायक डा. नीरज बोरा को उपलब्ध करायेगा। उन्होंने बताया कि मानसून सत्र के आखिरी दिन हेल्थ सेक्टर में सर्टिफिकेट कोर्स प्राप्त बेरोजगारों को पंजीकृत कर रोजगार का अवसर प्रदान करने के लिए नियम 301 में भी दी गई सूचना स्वीकृत हुई है। साथ ही मानसून सत्र में फैजुल्लागंज प्रथम वार्ड अन्तर्गत बेरी होटल चौराहे के निकट नाला निर्माण तथा मल्लाही टोला प्रथम वार्ड में राधाग्राम बैरल नंबर 29 से नये बन्धे तक नाले का निर्माण कराये जाने सम्बंधी याचिकायें भी सदन के पटल पर प्रस्तुत की गई हैं।

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