केले पकाने वाले 25 केंद्र बिना लाइसेंस संचालित: एफएसडीए की प्रदेशव्यापी जांच में खुली पोल; 311 राइपनिंग चौंबरों का निरीक्षण, 132 को सुधार नोटिस
लखनऊ: उत्तर प्रदेश में फलों को कृत्रिम रूप से पकाने की प्रक्रिया में खाद्य सुरक्षा मानकों का कड़ाई से अनुपालन कराने के लिए खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन (FSDA) ने प्रदेशव्यापी स्तर पर सघन जांच अभियान चलाया। इस कार्रवाई के तहत प्रदेशभर में कुल 311 राइपनिंग चौंबरों (फल पकाने वाले केंद्रों) का औचक निरीक्षण किया गया। जांच में चौंकाने वाला खुलासा हुआ कि 25 प्रतिष्ठान बिना किसी वैध खाद्य लाइसेंस के अवैध रूप से संचालित हो रहे थे। नियमों के उल्लंघन और अस्वच्छता पर अधिकारियों ने 132 से अधिक इकाइयों को सुधार नोटिस जारी किए और स्वास्थ्य के लिए हानिकारक पाए गए पांच क्विंटल से अधिक सड़े-गले केले नष्ट कराए।
📌 एफएसडीए जांच अभियान के मुख्य बिंदु:
- 311 केंद्रों पर छापा: प्रदेश के विभिन्न जिलों में केला पकाने वाले राइपनिंग चौंबरों की साफ-सफाई, ट्रे स्वच्छता और गैस उपयोग की गहन पड़ताल।
- 25 अवैध केंद्र चिह्नित: खाद्य सुरक्षा एवं मानक अधिनियम के अनिवार्य लाइसेंस या रजिस्ट्रेशन के बिना फल कारोबार करते मिले 25 संचालक।
- 132 से अधिक को सुधार नोटिस: गंदगी, अनहाइजीनिक ट्रे और रख-रखाव में घोर लापरवाही मिलने पर दिए गए सुधारात्मक नोटिस।
- 5 क्विंटल से अधिक केले नष्ट: गुणवत्ता मानकों पर खरे न उतरने वाले 15 हजार रुपये से अधिक मूल्य के घटिया केले मौके पर नष्ट किए गए।
- 20 सैंपलों की लैब जांच: रासायनिक अवशेषों और सुरक्षा मानकों के परीक्षण के लिए 20 नमूने विधिपूर्वक संग्रहित कर प्रयोगशाला भेजे गए।
📊 एफएसडीए प्रदेशव्यापी जांच अभियान: आंकड़ों पर एक नजर
| जांच मानक / घटक | विभागीय आंकड़े एवं स्थिति |
|---|---|
| कुल निरीक्षण किए गए केंद्र | 311 राइपनिंग चौंबर (प्रदेश स्तर पर) |
| बिना वैध लाइसेंस संचालित केंद्र | 25 प्रतिष्ठान (विधिक कार्रवाई प्रक्रियाधीन) |
| जारी किए गए सुधार नोटिस | 132 से अधिक प्रतिष्ठान |
| प्रयोगशाला जांच हेतु लिए गए नमूने | 20 नमूने (लैब रिपोर्ट के आधार पर होगी कार्रवाई) |
| नष्ट कराई गई फल सामग्री | 5 क्विंटल से अधिक घटिया केले (अनुमानित मूल्य ₹15,000+) |
गंदी ट्रे और बदहाली में पक रहे थे फल, 132 को मिला सुधार नोटिस
अभियान के दौरान खाद्य सुरक्षा अधिकारियों की टीमों ने चौंबरों के भीतर साफ-सफाई, वेंटिलेशन, तापमान नियंत्रण, फलों के भंडारण और इस्तेमाल की जा रही क्रेट्स व ट्रे की स्वच्छता की गहन पड़ताल की। अनेक केंद्रों पर स्वच्छता की स्थिति बेहद दयनीय मिली:
- अस्वच्छ ट्रे का उपयोग: फलों को रखने वाली ट्रे में फफूंद, पुरानी धूल और गंदगी जमा पाई गई, जिसे बिना धोए बार-बार उपयोग किया जा रहा था।
- संक्रमण का खतरा: अस्वच्छ परिसर और मक्खी-मच्छरों के बीच फलों को रखने से उपभोक्ताओं के स्वास्थ्य पर सीधा प्रतिकूल प्रभाव पड़ने का जोखिम था।
- समयबद्ध सुधार का अल्टीमेटम: 132 से अधिक संचालकों को नोटिस जारी कर तय समयसीमा के भीतर सफाई व्यवस्था दुरुस्त करने और दिशा-निर्देशों का पालन करने की हिदायत दी गई है।
फल पकाने की वैज्ञानिक विधि बनाम प्रतिबंधित रसायन: क्या कहता है नियम?
खाद्य सुरक्षा विशेषज्ञों के अनुसार, फलों को व्यावसायिक रूप से सुरक्षित तरीके से पकाने के लिए वैज्ञानिक प्रक्रिया का पालन आवश्यक है। नियमों की अनदेखी सीधे तौर पर मानव स्वास्थ्य से खिलवाड़ है:
“व्यावसायिक स्तर पर केले पकाने के लिए केवल एथिलीन गैस (Ethylene Gas) का नियंत्रित परिस्थितियों और मानक मात्रा में उपयोग ही मान्य है। इसके विपरीत कैल्शियम कार्बाइड (सफेद मसाला) से निकलने वाली एसिटिलीन गैस शरीर के लिए अत्यंत घातक और कार्सिनोजेनिक (कैंसर कारक) होती है, जो खाद्य सुरक्षा कानून के तहत पूरी तरह प्रतिबंधित है। एथेफोन का प्रयोग भी केवल कृषि नियमों के अनुरूप ही सीमित दायरे में होना चाहिए।”
बिना लाइसेंस कारोबार करने वालों पर चलेगा कानूनी चाबुक
खाद्य सुरक्षा एवं मानक अधिनियम (FSS Act) के अंतर्गत फल पकाने और थोक भंडारण का व्यवसाय करने वाले प्रत्येक कारोबारी के लिए खाद्य लाइसेंस अथवा पंजीकरण अनिवार्य है।
अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि 25 बिना लाइसेंस वाले केंद्रों को सील करने और उनके खिलाफ विधिक वाद दायर करने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। साथ ही लैब भेजे गए 20 नमूनों की रिपोर्ट में यदि किसी भी प्रकार के प्रतिबंधित रसायन अथवा हानिकारक तत्वों की पुष्टि होती है, तो संबंधित दोषियों पर कठोर कानूनी धाराओं में मुकदमे दर्ज किए जाएंगे।

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