'ऑफिस-ऑफिस सीरियल की तरह न भटके आम आदमी, नागरिक संतुष्टि ही लोकसेवक का रिपोर्ट कार्ड': मिशन कर्मयोगी कार्यशाला में बोले सीएम योगी; कीं 3 बड़ी घोषणाएं
लखनऊ: मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने शुक्रवार को लोकभवन में मिशन कर्मयोगी के अंतर्गत आयोजित ‘साधना श्रृंखला’ की उत्तरी क्षेत्रीय कार्यशाला को संबोधित करते हुए दो-टूक कहा कि किसी आम नागरिक का अपने छोटे-छोटे कार्यों के लिए एक दफ्तर से दूसरे दफ्तर भटकना पूरी प्रशासनिक व्यवस्था पर प्रश्नचिह्न खड़ा करता है। उन्होंने प्रसिद्ध धारावाहिक 'ऑफिस-ऑफिस' का दृष्टांत देते हुए कहा कि जब तक किसी बुजुर्ग, महिला, किसान, युवा अथवा जरूरतमंद की समस्या का समयबद्ध निस्तारण नहीं होता, तब तक लोक सेवा का उद्देश्य अधूरा है। सीएम योगी ने स्पष्ट किया कि नागरिक संतुष्टि ही किसी भी लोकसेवक का वास्तविक रिपोर्ट कार्ड है और अब अधिकारियों के कार्य प्रदर्शन, सक्सेस स्टोरी तथा उपलब्धियों को सीधे उनकी वार्षिक गोपनीय आख्या (ACR) एवं पदोन्नति से जोड़ा जाएगा।
📌 मुख्यमंत्री संबोधन: मुख्य बिंदु व 3 प्रमुख घोषणाएं
- उपाम बनेगा AI सेंटर ऑफ एक्सीलेंस: डॉ. राम मनोहर लोहिया प्रशासन एवं प्रबंधन अकादमी (उपाम) को आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस व डेटा एनालिटिक्स के सेंटर ऑफ एक्सीलेंस के रूप में विकसित किया जाएगा।
- पंचायतों व नगर निकायों का क्षमता संवर्धन: शासन की बुनियादी इकाइयों (ग्राम, नगर पंचायत, पालिका, निगम) के कार्मिकों को आधुनिक तकनीकों से दक्ष बनाया जाएगा।
- ‘राइट पर्सन फॉर द राइट रोल’: सही पद पर सही अधिकारी की तैनाती सुनिश्चित होगी; प्रदर्शन और उपलब्धियों को ACR व प्रमोशन का पैमाना बनाया जाएगा।
- लापरवाही पर सख्त रुख: जिम्मेदार पद पर अयोग्य का बैठना और लापरवाह का टिके रहना दोनों ही व्यवस्था के लिए अत्यंत खतरनाक हैं।
- मिशन कर्मयोगी में यूपी अव्वल: प्रदेश के 19.26 लाख से अधिक कार्मिक iGOT पोर्टल पर पंजीकृत; 4 करोड़ से अधिक प्रशिक्षण पाठ्यक्रम पूरे किए।
📊 प्रशासनिक सुधार: तीन प्रमुख पहल एवं उत्तर प्रदेश मॉडल
| प्रमुख पहल / आयाम | प्रस्तावित सुधार एवं विजन | जमीनी प्रभाव एवं लक्ष्य |
|---|---|---|
| उपाम (UPAM) का कायाकल्प | AI सेंटर ऑफ एक्सीलेंस की स्थापना | डेटा एनालिटिक्स व डिजिटल तकनीक से त्वरित एवं पारदर्शी नीतिगत निर्णय |
| स्थानीय निकाय क्षमता विकास | पंचायत व नगर निगम कर्मियों का विशेष प्रशिक्षण | अंतिम पायदान पर खड़े नागरिक तक जन-कल्याणकारी योजनाओं की निर्बाध पहुंच |
| Right Person for Right Role | योग्यता आधारित पदस्थापन व मूल्यांकन | सक्सेस स्टोरी व कार्यक्षमता को ACR और पदोन्नति से जोड़कर जवाबदेही तय करना |
| iGOT कर्मयोगी प्रगति | 19.26 लाख कार्मिक पंजीकृत, 334+ संस्थान संबद्ध | प्रमाणपत्र हासिल करने से आगे बढ़कर सेवा गुणवत्ता में सुधार लाना |
'ऑफिस-ऑफिस' जैसी स्थिति से मुक्ति: संवेदनशील और उत्तरदायी प्रशासन की आवश्यकता
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अधिकारियों को चेताते हुए कहा कि आज भी बुजुर्गों को पेंशन के लिए अथवा सामान्य नागरिक को छोटे-छोटे प्रमाण पत्रों के लिए विभागों के चक्कर काटने पड़ते हैं। इस ढर्रे को हर हाल में बदलना होगा।
“एक अयोग्य व्यक्ति का जिम्मेदार पद पर बैठना भी समाज के लिए खतरनाक है और एक लापरवाह व्यक्ति का वहां बने रहना भी। कई बार कार्मिक अपने अधिकारों और प्रमोशन को लेकर तो बेहद सतर्क रहते हैं, लेकिन अपने कर्तव्यों के प्रति अपेक्षित गंभीरता नहीं दिखाते। यदि कोई पीड़ित निराश होकर लौटता है, तो लोक सेवा का उद्देश्य ही समाप्त हो जाता है। प्रशिक्षण का फल कागजी प्रमाणपत्रों में नहीं, जनता के चेहरों के संतोष में दिखना चाहिए।”
— योगी आदित्यनाथ (मुख्यमंत्री, उत्तर प्रदेश)
उन्होंने गोरखपुर में सड़क चौड़ीकरण का उदाहरण साझा करते हुए कहा कि 2-लेन से 4-लेन बनाने के क्रम में अभियंताओं ने सड़क को जमीन से 3 मीटर ऊंचा कर दिया, जिससे आबादी का रास्ता रुक गया। मुख्यमंत्री ने कहा कि केवल डिग्री या नियुक्ति पत्र हासिल कर लेना किसी को दक्ष अभियंता या अधिकारी नहीं बनाता, बल्कि नागरिकों की जमीनी व्यावहारिक समस्याओं को समझने का विवेक होना अनिवार्य है।
तकनीक शासन को गति देगी, लेकिन संवेदनशीलता सेवा भाव से ही आएगी
उपाम और भारत सरकार के क्षमता विकास आयोग (CBC) के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित इस क्षेत्रीय कार्यशाला में आठ राज्यों एवं चार केंद्र शासित प्रदेशों के उच्चाधिकारी सम्मिलित हुए। कार्यशाला में क्षमता विकास आयोग की अध्यक्षा एस. राधा चौहान की भूमिका का उल्लेख करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तर प्रदेश तेजी से अपनी कार्यसंस्कृति बदल रहा है।
- 36 सेक्टोरल नीतियां: प्रदेश नीतिगत जड़ता से बाहर निकलकर 36 औद्योगिक व क्षेत्रीय नीतियों के माध्यम से निवेश और रोजगार के नए आयाम गढ़ रहा है।
- उन्नति पोर्टल: प्रदेश के 334 से अधिक प्रशिक्षण संस्थान उन्नति पोर्टल के माध्यम से एक-दूसरे के बेहतरीन नवाचारों और पद्धतियों को साझा कर रहे हैं।
- जवाबदेह नौकरशाही: विभागीय शिथिलता दूर करने के लिए तकनीक के साथ-साथ नैतिक सेवा भाव को प्रशिक्षण का मुख्य आधार बनाया जा रहा है।
इंसेफेलाइटिस नियंत्रण बना अंतर-विभागीय समन्वय की मिसाल
सीएम योगी ने अपने संसदीय कार्यकाल का स्मरण करते हुए बताया कि चार दशकों में पूर्वी उत्तर प्रदेश में इंसेफेलाइटिस (जापानी बुखार) से 50 हजार से अधिक मासूमों की जान गई। वर्षों तक इसे सिर्फ स्वास्थ्य विभाग की समस्या मानकर अन्य विभाग पल्ला झाड़ लेते थे।
वर्ष 2017 में सरकार बनने के बाद स्वास्थ्य, नगर विकास, पंचायती राज, ग्राम्य विकास, बेसिक शिक्षा, दिव्यांगजन व महिला कल्याण जैसे विभागों को एक मंच पर लाया गया। आशा, आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं से लेकर मेडिकल कॉलेजों तक की भूमिका तय कर सघन प्रशिक्षण दिया गया। इसका परिणाम रहा कि चार दशक पुरानी लाइलाज त्रासदी पूरी तरह समाप्त हो चुकी है और अब इंसेफेलाइटिस से होने वाली मौतें शून्य हैं। उन्होंने कहा कि जब विभाग तालमेल और स्पष्ट जिम्मेदारी के साथ काम करते हैं, तो असंभव परिणाम भी हासिल किए जा सकते हैं।
संभावनाओं से उपलब्धियों तक: विकास का नया उत्तर प्रदेश
मुख्यमंत्री ने पिछली व्यवस्थाओं की तुलना करते हुए कहा कि 2017 से पहले असीम संभावनाओं के बावजूद राजनीतिक इच्छाशक्ति के अभाव में राज्य की छवि उपद्रवग्रस्त क्षेत्र की बन गई थी और युवा भर्तियों में भ्रष्टाचार से त्रस्त थे।
विगत साढ़े नौ वर्षों में यूपी की अर्थव्यवस्था, बजट और प्रति व्यक्ति आय को तीन गुना करने में सफलता मिली है। आज देश के कुल एक्सप्रेसवे नेटवर्क का 60 फीसदी हिस्सा उत्तर प्रदेश में है। 65 लाख गरीबों को पक्के आवास, 3 करोड़ से अधिक शौचालयों का निर्माण, 15 करोड़ जरूरतमंदों को मुफ्त राशन और बुंदेलखंड व विंध्य क्षेत्र के हर घर तक नल से जल पहुंचाया गया है।

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