ग्राम सेवा मंडल, गोपुरी में खादी उत्पादन के नये आयाम का सूत्रपात: देशी एवं जैविक कपास से धागा निर्माण शुरू, एक ही परिसर में पूरी होगी संपूर्ण प्रक्रिया
वर्धा: आचार्य विनोबा भावे द्वारा वर्ष 1934 में स्थापित ऐतिहासिक संस्था ग्राम सेवा मंडल, गोपुरी में खादी उत्पादन के क्षेत्र में एक नए युगांतरकारी अध्याय की शुरुआत हुई है। संस्था परिसर में देशी कपास के संशोधित बीजों से उत्पादित जैविक कपास से धागा तैयार करने वाले आधुनिक प्लांट ने विधिवत कार्य प्रारंभ कर दिया है। इसके साथ ही संस्था ने राष्ट्रपिता महात्मा गांधी और संत विनोबा भावे के ग्राम-स्वराज्य एवं आत्मनिर्भरता के संकल्प को साकार करते हुए बाह्य स्रोतों पर अपनी निर्भरता समाप्त करने की दिशा में ठोस कदम बढ़ाया है।
📌 गोपुरी खादी नवाचार: प्रमुख बिंदु
- देशी कपास से धागा निर्माण: संशोधित देशी व जैविक कपास से धागा बनाने का प्लांट शुरू, बाहरी निर्भरता घटी।
- ‘कपास से परिधान’ एक ही छत के नीचे: कपास उत्पादन, धागा निर्माण, कताई, बुनाई, रंगाई, सिलाई और विपणन की संपूर्ण एकीकृत व्यवस्था।
- मूल स्वदेशी अवधारणा: रासायनिक खादों और संकर बीजों से मुक्त शुद्ध जैविक कपास आधारित वस्त्र उत्पादन।
- प्राकृतिक रंगों का प्रयोग: वस्त्र निर्माण में पर्यावरण-अनुकूल प्राकृतिक व वानस्पतिक रंगों का उपयोग जारी रहेगा।
- संस्थागत नेतृत्व: ट्रस्टी एवं सचिव कौशल मिश्र ने कार्यकर्ताओं की निष्ठा और अध्यक्ष चिन्मय जी के मार्गदर्शन को सराहा।
📊 ग्राम सेवा मंडल गोपुरी: एकीकृत खादी उत्पादन चक्र
| उत्पादन चरण | परिसर में उपलब्ध एकीकृत प्रक्रिया |
|---|---|
| कच्चा माल | संशोधित देशी बीज एवं स्थानीय जैविक कपास की खेती |
| धागा निर्माण (नया आयाम) | परिसर में स्थापित नए प्लांट द्वारा शुद्ध देशी धागा तैयार करना |
| कताई एवं बुनाई | पारंपरिक एवं उन्नत चरखों पर कताई, हथकरघा (Handloom) पर वस्त्र बुनाई |
| प्रसंस्करण एवं रंगाई | पारंपरिक कपड़े की धुलाई और इको-फ्रेंडली प्राकृतिक रंगों से रंगाई |
| अंतिम उत्पाद एवं बिक्री | इन-हाउस सिलाई इकाई से रेडीमेड परिधान तैयार कर सीधे बिक्री |
पूरी हुई अधूरी कड़ी: अब बाहरी जैविक कपास पर निर्भरता खत्म
अब तक ग्राम सेवा मंडल को उच्च गुणवत्ता वाले खादी वस्त्रों के निर्माण हेतु बाहरी मंडियों और दूरस्थ स्रोतों से जैविक कपास की आपूर्ति पर निर्भर रहना पड़ता था। इस कारण उत्पादन लागत और समय दोनों प्रभावित होते थे। स्थानीय स्तर पर देशी कपास से धागा निर्माण का संयंत्र स्थापित होने से उत्पादन श्रृंखला की यह सबसे महत्वपूर्ण अधूरी कड़ी पूरी हो गई है।
“आपसी सहयोग, कार्यकर्ताओं के समर्पण और खादी के क्षेत्र में उपलब्ध उन्नत ज्ञान के समन्वय से ग्राम सेवा मंडल अपनी संपूर्णता को प्राप्त कर रहा है। हमारा ध्येय केवल वस्त्र बनाना नहीं, बल्कि प्रकृति और मनुष्य के सामंजस्य पर आधारित स्वावलंबी ग्रामीण अर्थतंत्र को गति देना है।”
— कौशल मिश्र (ट्रस्टी एवं सचिव, ग्राम सेवा मंडल)
गांधी-विनोबा के स्वावलंबी अर्थतंत्र का सशक्त उदाहरण
वर्धा जनपद स्वतंत्रता संग्राम से ही खादी और ग्रामोद्योग की वैश्विक राजधानी रहा है। ग्राम सेवा मंडल, गोपुरी द्वारा उठाया गया यह कदम दर्शाना है कि आधुनिक दौर में भी पारंपरिक स्वदेशी ज्ञान और देशी बीजों के संवर्धन से पर्यावरण-अनुकूल टिकाऊ मॉडल खड़ा किया जा सकता है।
- मिट्टी और स्वास्थ्य की सुरक्षा: देशी कपास की खेती में जहरीले कीटनाशकों की आवश्यकता नहीं होती, जिससे मिट्टी की उर्वरता सुरक्षित रहती है।
- स्थानीय रोजगार सृजन: धागा निर्माण से लेकर सिलाई तक के सभी चरण स्थानीय कारीगरों और महिला स्व-सहायता समूहों को आजीविका उपलब्ध कराते हैं।
- संस्था अध्यक्ष का मार्गदर्शन: सचिव कौशल मिश्र ने कार्यकर्ताओं को समय-समय पर तकनीकी मार्गदर्शन और प्रेरणा देने के लिए संस्था अध्यक्ष चिन्मय जी के प्रति विशेष आभार व्यक्त किया।
उद्घाटन अवसर पर वरिष्ठ विचारकों और कार्यकर्ताओं की रही उपस्थिति
धागा निर्माण प्लांट के शुभारंभ के इस ऐतिहासिक अवसर पर सर्वोदय आंदोलन से जुड़े वरिष्ठ चिंतक, पदाधिकारी एवं कार्यकर्ता बड़ी संख्या में उपस्थित रहे।
समारोह में संस्था के उपाध्यक्ष डॉ. तारक काटे, प्रसिद्ध लेखक, समाजसेवी एवं ट्रस्टी रविंद्र रुक्मिणी पंढरीनाथ, उपाध्यक्ष सुनील फर्सुले, नरहरी, एकाउंटेंट सूरज करलुके, कार्यालय प्रमुख उमेश पोकले, प्लांट मैनेजर भीमराव बावनकर, वस्त्र विभाग की संयोजक पल्लवी साठवणे, निकिता, रामकृष्ण पेटकर, परमधाम प्रकाशन (पवनार) के किशन सुरकार, पाटील और राहुल प्रभाकर डाखोडे सहित सभी कार्यकर्ता उपस्थित रहे। कार्यक्रम का सुचारू संचालन नेहारे ने किया।



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