जियोपीसी से पढ़ाई के लिए कम खर्च में मिलेगा कंप्यूटर: क्लाउड तकनीक से पुराने लैपटॉप और टीवी बनेंगे स्मार्ट पीसी; एआई व कोडिंग टूल्स से लैस
मुंबई: देश में डिजिटल शिक्षा और तकनीकी पहुंच को किफायती बनाने की दिशा में रिलायंस जियो (Reliance Jio) ने क्रांतिकारी कदम उठाते हुए अपनी वर्चुअल क्लाउड सेवा ‘जियोपीसी’ (JioPC) औपचारिक रूप से पेश कर दी है। इस सेवा के माध्यम से विद्यार्थियों, स्कूलों, कॉलेजों और कौशल विकास केंद्रों को नया व महंगा हार्डवेयर खरीदे बिना उच्च क्षमता वाले कंप्यूटर की सुविधाएं मिल सकेंगी। उपयोगकर्ता अपने पुराने लैपटॉप, सामान्य डेस्कटॉप मॉनिटर अथवा जियो सेट-टॉप बॉक्स (Jio STB) से जुड़े टीवी को क्लाउड के जरिए शक्तिशाली कंप्यूटर में बदल सकते हैं, जिसमें कोडिंग, ग्राफिक डिजाइनिंग, डेटा रिसर्च और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) से जुड़े जटिल कार्य आसानी से किए जा सकेंगे।
📌 जियोपीसी (JioPC) सेवा के मुख्य आकर्षण:
- सस्ता वर्चुअल कंप्यूटर: नया पीसी खरीदने के भारी खर्च से मुक्ति; सब्सक्रिप्शन आधारित मॉडल पर उच्च स्तरीय कंप्यूटिंग।
- सभी इंटरनेट यूजर्स के लिए खुला: जियो सिम या जियो ब्रॉडबैंड होना अनिवार्य नहीं; किसी भी नेटवर्क के वेब ब्राउजर से लॉगिन संभव।
- टीवी बना कंप्यूटर: जियो सेट-टॉप बॉक्स और कीबोर्ड-माउस जोड़कर टीवी स्क्रीन को सीधे पीसी की तरह इस्तेमाल करें।
- सॉफ्टवेयर व ओएस: उबंटू (Ubuntu) ओएस, लिब्रेऑफिस, माइक्रोसॉफ्ट 365 वेब और एडोबी एक्सप्रेस जैसे आधुनिक टूल्स का सपोर्ट।
- क्लाउड डेटा सुरक्षा: 'जीरो ट्रस्ट आर्किटेक्चर' और ऑटोमैटिक डेटा बैकअप; डिवाइस खराब होने पर भी सुरक्षित रहेगा डेटा।
📊 जियोपीसी सब्सक्रिप्शन प्लान्स एवं कीमतें
| प्लान का प्रकार | हार्डवेयर स्पेसिफिकेशन | वैधता एवं निर्धारित शुल्क (रुपये में) |
|---|---|---|
| जियोपीसी स्टैंडर्ड (Standard) | 8 GB रैम + 500 GB क्लाउड स्टोरेज |
• 2 माह: ₹1,000 • 5 माह: ₹2,000 • 10+2 माह (वार्षिक): ₹4,000 |
| जियोपीसी अल्ट्रा (Ultra) | 16 GB रैम + 1 TB क्लाउड स्टोरेज |
• 2 माह: ₹1,200 • 5 माह: ₹2,500 • 10+2 माह (वार्षिक): ₹5,000 |
| जियोहोम विशेष ऑफर | जियोहोम ब्रॉडबैंड ग्राहकों को ₹100 प्रति माह का वाउचर (बिल डिस्काउंट हेतु) | |
गैर-जियो यूजर्स के लिए भी सुलभ: किसी भी नेटवर्क पर करेगा काम
जियोपीसी की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि कंपनी ने इसे किसी खास टेलीकॉम नेटवर्क या हार्डवेयर से नहीं बांधा है। यदि किसी छात्र या संस्थान के पास एयरटेल, बीएसएनएल या किसी अन्य स्थानीय इंटरनेट प्रदाता का ब्रॉडबैंड अथवा मोबाइल इंटरनेट कनेक्शन है, तब भी वे सक्रिय जियोपीसी सब्सक्रिप्शन लेकर अपने सामान्य वेब ब्राउजर (Chrome, Edge, Firefox) से लॉगिन करके इसका लाभ उठा सकते हैं।
“क्लाउड कंप्यूटिंग का मूल दर्शन हार्डवेयर की सीमाओं को समाप्त करना है। जियोपीसी के जरिए किसी भी साधारण स्क्रीन पर वर्कस्टेशन जैसी गति और कार्यक्षमता प्राप्त की जा सकती है, जिससे ग्रामीण और निम्न-मध्यम वर्गीय छात्रों को तकनीकी शिक्षा से जुड़ना आसान होगा।”
स्कूलों, कॉलेजों और स्किल सेंटर्स की लागत में भारी कटौती
शैक्षणिक संस्थानों के लिए कंप्यूटर लैब स्थापित करना और हर तीन से चार साल में पुराने हो चुके सिस्टम को अपग्रेड करना भारी वित्तीय बोझ होता है। जियोपीसी इस समस्या का समाधान प्रस्तुत करता है:
- लैब अपग्रेडेशन का शून्य खर्च: संस्थान अपनी पुरानी मशीनों को बदले बिना क्लाउड के जरिए उनमें 8GB या 16GB रैम की क्षमता जोड़ सकते हैं।
- पायरेसी मुक्त सॉफ्टवेयर: उबंटू ओएस और ओपन-सोर्स लिब्रेऑफिस के साथ क्लाउड टूल्स जैसे माइक्रोसॉफ्ट 365 और एडोबी एक्सप्रेस का उपयोग कानूनी रूप से सुगम है।
- कोडिंग व एआई शिक्षा: पायथन, जावा, वेब डेवलपमेंट और डेटा साइंस जैसे एडवांस तकनीकी पाठ्यक्रम सीधे क्लाउड पर चलाए जा सकेंगे।
डेटा सुरक्षा: 'जीरो ट्रस्ट मॉडल' और ऑटो बैकअप
पारंपरिक कंप्यूटरों में हार्ड डिस्क क्रैश होने, वायरस अटैक या लैपटॉप चोरी होने पर छात्रों का प्रोजेक्ट वर्क और जरूरी डेटा हमेशा के लिए खोने का खतरा रहता है। जियोपीसी में सभी फाइलें सुरक्षित भारतीय डेटा सेंटरों के क्लाउड स्टोरेज में स्टोर होती हैं:
- जीरो ट्रस्ट सिक्योरिटी: प्रत्येक लॉगिन पर मल्टी-फैक्टर ऑथेंटिकेशन और सुरक्षित एन्क्रिप्शन लागू रहता है।
- डिजास्टर रिकवरी: डिवाइस क्षतिग्रस्त होने की स्थिति में छात्र किसी भी अन्य डिवाइस से लॉगिन कर अपना अधूरा काम वहीं से शुरू कर सकते हैं।


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