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संजय गांधी PGI में टला आंदोलन: निदेशक संग वार्ता में मांगों पर बनी सहमति; FC/GB और शासन स्तर पर निस्तारित होंगे कार्मिकों के मुद्दे

संजय गांधी पीजीआई कर्मचारी महासंघ का 5 अक्टूबर से प्रस्तावित धरना स्थगित: निदेशक संग सकारात्मक वार्ता के बाद फैसला; सेवानिवृत्ति आयु 60 से 63 वर्ष करने का प्रस्ताव शासन को भेजा जाएगा

📍 स्थान: एसजीपीजीआई, रायबरेली रोड, लखनऊ | 📅 दिनांक: 03 अक्टूबर 2026 | 🏥 श्रेणी: एसजीपीजीआई, कर्मचारी संघ, स्वास्थ्य प्रशासन, सेवा विस्तार एवं प्रशासनिक वार्ता

लखनऊ: संजय गांधी स्नातकोत्तर आयुर्विज्ञान संस्थान (SGPGIMS) में नियमित कार्मिकों की लंबित मांगों को लेकर आगामी 5 अक्टूबर 2026 से प्रस्तावित धरना-प्रदर्शन को कर्मचारी महासंघ ने अग्रिम सूचना तक स्थगित कर दिया है। संस्थान के निदेशक और शीर्ष प्रशासनिक अधिकारियों के साथ संपन्न हुई मैराथन वार्ता में कर्मचारियों की मुख्य मांगों पर सहानुभूतिपूर्वक विचार करते हुए शीघ्र निस्तारण का ठोस आश्वासन दिया गया। विशेष रूप से नियमित कर्मचारियों की सेवानिवृत्ति आयु 60 वर्ष से बढ़ाकर 63 वर्ष करने के बहुप्रतीक्षित प्रकरण को उचित निर्णय हेतु उत्तर प्रदेश शासन के कार्मिक विभाग और आगामी गवर्निंग बॉडी (GB) की बैठक में रखने पर सहमति बनी है।

📌 पीजीआई प्रशासन व महासंघ वार्ता के प्रमुख बिंदु:

  • आंदोलन स्थगित: 5 अक्टूबर 2026 से प्रस्तावित अनिश्चितकालीन धरना-प्रदर्शन अग्रिम सूचना तक वापस लिया गया।
  • 63 वर्ष रिटायरमेंट आयु: 3 वर्ष के सेवा विस्तार (सेवानिवृत्ति आयु 60 से 63 वर्ष) का प्रस्ताव कार्मिक विभाग (UP शासन) को प्रेषित होगा, तत्पश्चात FC/GB में रखा जाएगा।
  • संस्थान स्तर की मांगें: आंतरिक स्तर के सभी प्रशासनिक और सेवा संबंधी मामलों का स्थानीय नियमानुसार त्वरित निस्तारण होगा।
  • शासन स्तर का समन्वय: चिकित्सा शिक्षा विभाग के अपर मुख्य सचिव के साथ निदेशक स्तर पर बैठक कर शासन संबंधी प्रकरण सुलझाए जाएंगे।
  • मरीज हित सर्वोपरि: अस्पताल की चिकित्सा सेवाएं निर्बाध रखने और सकारात्मक प्रशासनिक पहल को अवसर देने के उद्देश्य से लिया गया निर्णय।

📊 एसजीपीजीआई कर्मचारी महासंघ: वार्ता एवं सहमति का स्वरूप

मांग / विषय क्षेत्र सक्षम प्राधिकारी स्तर सहमति व आगामी कार्ययोजना
सेवानिवृत्ति आयु विस्तार (60 से 63 वर्ष) कार्मिक विभाग, UP शासन एवं FC/GB मामला शासन को संदर्भित होगा, फिर FC/GB में रखा जाएगा
संस्थान स्तरीय सेवा प्रकरण निदेशक, CMS, MS, FO, JDA नियमानुसार त्वरित निस्तारण के आदेश
नीतिगत एवं वित्तीय विषय फाइनेंस कमेटी एवं गवर्निंग बॉडी (FC/GB) आगामी FC/GB बैठक में एजेंडा के रूप में शामिल
मंत्रालय/शासन स्तरीय मामले अपर मुख्य सचिव, चिकित्सा शिक्षा निदेशक द्वारा ACS संग बैठक कर हल कराया जाएगा

निदेशक की अध्यक्षता में हुई उच्चस्तरीय द्विपक्षीय बैठक

महासंघ द्वारा प्रस्तावित आंदोलन के मद्देनजर संस्थान प्रशासन ने संवेदनशीलता दिखाते हुए 30 सितंबर 2026 को कर्मचारी प्रतिनिधियों को वार्ता की मेज पर आमंत्रित किया था। इस महत्वपूर्ण बैठक में संस्थान के निदेशक के साथ मुख्य चिकित्सा अधीक्षक (CMS), चिकित्सा अधीक्षक (MS), वित्त अधिकारी (FO) और संयुक्त निदेशक प्रशासन (JDA) सहित कई प्रमुख प्रशासनिक अधिकारी मौजूद रहे।

बैठक में महासंघ के पदाधिकारियों ने एक-एक कर संवर्गवार विसंगतियों, प्रोन्नति, भत्तों और कार्यस्थल से जुड़ी समस्याओं का मांग-पत्र प्रस्तुत किया। प्रशासन ने प्रत्येक बिंदु पर विधिक एवं वित्तीय स्थिति की समीक्षा करते हुए समयबद्ध समाधान की प्रतिबद्धता दोहराई।

सेवानिवृत्ति आयु 60 से 63 वर्ष: शासन को जाएगा संदर्भ

कर्मचारियों की सबसे बहुप्रतीक्षित मांग संस्थान के सभी नियमित संवर्ग के कार्मिकों को 3 वर्ष का सेवा विस्तार देते हुए अधिवर्षता आयु को 60 वर्ष से बढ़ाकर 63 वर्ष किए जाने की रही है।

संस्थान प्रशासन ने स्पष्ट किया कि चूंकि यह एक नीतिगत विषय है, इसलिए इसका संपूर्ण प्रस्ताव तैयार कर कार्मिक विभाग, उत्तर प्रदेश शासन को मार्गदर्शन व स्वीकृति हेतु भेजा जा रहा है। शासन की संस्तुति प्राप्त होते ही इसे संस्थान की वित्त समिति (Finance Committee) और गवर्निंग बॉडी (Governing Body) की आगामी बैठक में अंतिम अनुमोदन के लिए रखा जाएगा।

"मरीज हित और संवाद को अवसर, ढिलाई पर तय होगी आगे की रणनीति"

कर्मचारी महासंघ ने अपने आधिकारिक बयान में कहा कि पीजीआई एक राष्ट्रीय स्तर का सुपर स्पेशलिटी चिकित्सा संस्थान है, जहां प्रतिदिन हजारों गंभीर मरीज इलाज के लिए आते हैं। मरीजों को किसी प्रकार की असुविधा न हो और प्रशासन द्वारा अपनाए गए सकारात्मक रुख का सम्मान करते हुए 5 अक्टूबर के धरने को फिलहाल स्थगित किया गया है।

"संस्थान हितों और मरीज सेवा को सर्वोपरि रखते हुए हमने यह निर्णय लिया है। यदि तय कार्यवृत्त और समयावधि के अनुसार अपेक्षित प्रशासनिक प्रगति नहीं दिखी, तो महासंघ अपने लोकतांत्रिक अधिकारों का उपयोग करते हुए आगे की कठोर रणनीति तय करने के लिए स्वतंत्र होगा।"
— संजय गांधी पीजीआई कर्मचारी महासंघ
निष्कर्ष: पीजीआई प्रशासन और कर्मचारी महासंघ के बीच बनी यह आपसी सहमति संस्थान के कार्य वातावरण और स्वास्थ्य सेवाओं की निरंतरता के लिए एक सकारात्मक कदम है।

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