यूपी में 40 चैरिटेबल ब्लड सेंटरों की जांच, सात के संचालन पर तत्काल रोक: बिना ELISA जांच खून जारी करने और कोल्ड चेन में लापरवाही पर FSDA का कड़ा प्रहार
लखनऊ: उत्तर प्रदेश में मरीजों की जान से खिलवाड़ करने वाले चैरिटेबल ब्लड बैंकों के खिलाफ खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन (FSDA) ने बड़ा अभियान छेड़ा है। एफएसडीए आयुक्त डॉ. रोशन जैकब के निर्देश पर प्रदेश के 10 जिलों में ट्रस्ट और सोसायटियों द्वारा संचालित 40 चैरिटेबल ब्लड सेंटरों का औचक निरीक्षण किया गया। जांच के दौरान बिना अनिवार्य एलिसा (ELISA) जांच खून जारी करने, कोल्ड चेन व तापमान में गंभीर चूक और तकनीकी स्टाफ की अनुपस्थिति जैसी जानलेवा अनियमितताएं मिलने पर सात रक्त केंद्रों के संचालन पर तत्काल प्रभाव से रोक लगा दी गई है।
📌 एफएसडीए ब्लड बैंक जांच अभियान: प्रमुख बिंदु
- सख्त प्रशासनिक कदम: 10 जनपदों के 40 रक्त केंद्रों की जांच, 7 पर पूर्ण प्रतिबंध और शेष को कारण बताओ नोटिस।
- सीलबंद/निलंबित 7 केंद्र: लखनऊ के 3, आगरा, अलीगढ़, गोरखपुर और लखीमपुर खीरी के 1-1 ब्लड सेंटर का संचालन रोका गया।
- गंभीर मेडिकल लापरवाही: एचआईवी (HIV), हेपेटाइटिस (HBsAg/HCV), सिफलिस (VDRL) व मलेरिया जांच की अनदेखी और खराब मशीनों से खून की आपूर्ति।
- प्लाज्मा में खून के अंश: लखनऊ के एक सेंटर में एफएफपी (FFP) के भीतर लाल रक्त कोशिकाएं (RBC) पाई गईं।
- जिलाधिकारियों को एडवाइजरी: प्रतिबंधित केंद्रों में मौजूद रक्त घटकों के सुरक्षित वैज्ञानिक निस्तारण हेतु गाइडलाइन जारी।
📊 जिन सात चैरिटेबल ब्लड सेंटरों पर लगी तत्काल रोक: पूरी सूची व खामियां
| रक्त केंद्र का नाम व जिला | जांच में उजागर हुई प्रमुख गंभीर अनियमितताएं |
|---|---|
| 1. श्री बालाजी चैरिटेबल ब्लड सेंटर (आगरा) |
अनिवार्य ELISA और स्टरलिटी टेस्ट नदारद; रक्त प्राप्तकर्ताओं के नाम, फोन व हस्ताक्षर का विवरण नहीं; तापमान लॉग व स्टॉक रजिस्टर अपूर्ण। |
| 2. न्यू बापू रक्त सेंटर (अलीगढ़) |
अनिवार्य टीटीआई व ELISA जांच गायब; सीपीडीए सॉल्यूशन प्रक्रिया में खामियां; तापमान ग्राफ, स्टॉक रजिस्टर और योग्य तकनीकी स्टाफ का अभाव। |
| 3. मानया चैरिटेबल ब्लड सेंटर (गोरखपुर) |
प्रभारी चिकित्सा अधिकारी और तकनीकी कर्मी ड्यूटी से नदारद; तापमान रिकॉर्डिंग में भारी गड़बड़ी; रजिस्टरों का रखरखाव अधूरा। |
| 4. अनुभव चैरिटेबल ब्लड सेंटर (लखीमपुर खीरी) |
बायोमेडिकल वेस्ट निस्तारण अनुबंध नहीं; तापमान निगरानी व अलार्म सिस्टम ठप; ब्लड बैग और डायग्नोस्टिक किट का स्टॉक रजिस्टर गायब। |
| 5. लिटल स्टार ब्लड सेंटर (लखनऊ) |
डॉक्टर व तकनीकी स्टाफ लंबे समय से अनुपस्थित; ELISA मशीन खराब होने के बावजूद बिना जांच रक्त जारी; FFP में RBC के अंश मिले। |
| 6. रामा चैरिटेबल ब्लड सेंटर (लखनऊ) |
बिना ELISA पूरी किए खून जारी; FFP को नियमों के विपरीत प्लेटलेट एजिटेटर में रखा; निर्धारित दर से अधिक वसूली और स्टाफ गायब। |
| 7. केएचएस चैरिटेबल ब्लड सेंटर (लखनऊ) |
प्रभारी डॉक्टर व स्टाफ नदारद; मास्टर रजिस्टर व ELISA/TTI टेस्ट रिकॉर्ड बैकडेट में अधूरा; परिसर में अस्वच्छता की भरमार। |
10 जिलों में अंतरजनपदीय टीमों का छापा: राजधानी में सर्वाधिक 13 केंद्र रडार पर
औषधि निरीक्षकों की अंतरजनपदीय टीमों ने गोपनीयता बरतते हुए एक साथ छापेमारी की। इस जांच का मुख्य दायरा निम्नलिखित जनपदों में रहा:
- लखनऊ: सबसे अधिक 13 चैरिटेबल ब्लड सेंटरों की सघन जांच हुई, जिनमें से 3 में गंभीर खामियों के चलते काम बंद कराया गया।
- अन्य प्रमुख जिले: आगरा में 5, कानपुर में 5, मुजफ्फरनगर में 4, बिजनौर में 4, अलीगढ़ में 3, गाजियाबाद व वाराणसी में 2-2 तथा गोरखपुर व प्रयागराज में 1-1 केंद्र का निरीक्षण किया गया।
- जांच के मानक: लाइसेंस की वैधता, तापमान लॉग, स्टॉक रजिस्टर, प्रशिक्षित कर्मचारियों की मौजूदगी और रक्तदाताओं के संपूर्ण रिकॉर्ड की गहन पड़ताल की गई।
अनिवार्य जांचों की अनदेखी: मरीजों की जान पर सीधा खतरा
ब्लड ट्रांसफ्यूजन के राष्ट्रीय मानकों के अनुसार, किसी भी मरीज को रक्त चढ़ाने से पहले पांच जानलेवा संक्रमणों की जांच अनिवार्य है: HIV (एड्स), HBsAg (हेपेटाइटिस बी), HCV (हेपेटाइटिस सी), VDRL (सिफलिस) और मलेरिया।
“जांच में यह सामने आया कि कई ब्लड सेंटर बिना आधुनिक एलिसा (ELISA) जांच पूरी किए ही रक्त की थैलियां अस्पतालों को जारी कर रहे थे। इसके अलावा, कोल्ड चेन में तापमान का समुचित नियंत्रण न होने से रक्त घटकों की गुणवत्ता नष्ट हो जाती है, जो ट्रांसफ्यूजन के समय मरीज के लिए जानलेवा साबित हो सकती है।”
'लापरवाही पर जीरो टॉलरेंस': सुरक्षित निस्तारण हेतु डीएम को एडवाइजरी
यूपी एफएसडीए आयुक्त डॉ. रोशन जैकब ने स्पष्ट किया कि जनस्वास्थ्य और मरीजों की सुरक्षा के साथ किसी भी स्तर पर समझौता स्वीकार नहीं किया जाएगा।
जिन सात रक्त केंद्रों के संचालन पर रोक लगाई गई है, उनमें पहले से संग्रहित रक्त और रक्त घटकों को सुरक्षित रूप से निस्तारित करने के लिए सभी जिलाधिकारियों को विस्तृत एडवाइजरी भेजी गई है, ताकि अमानक रक्त बाजार में न पहुंच सके। शेष केंद्रों को मिली कमियों पर स्पष्टीकरण हेतु कारण बताओ नोटिस जारी किए गए हैं और संतोषजनक जवाब न मिलने पर कठोर दंडात्मक कदम उठाए जाएंगे।

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