नर्सेस संघ का 23वें दिन भी जारी रहा आंदोलन: दो घंटे कार्य बहिष्कार कर मनाया काला दिवस, शासनादेश जारी न होने पर अनिश्चितकालीन हड़ताल की चेतावनी
लखनऊ: उत्तर प्रदेश के समस्त जिला चिकित्सालयों और स्वशासी राजकीय मेडिकल कॉलेजों में कार्यरत नर्सिंग संवर्ग का विरोध प्रदर्शन शनिवार को 23वें दिन भी जारी रहा। राजकीय नर्सेस संघ, उत्तर प्रदेश के प्रांतीय आह्वान पर आंदोलनरत नर्सिंग कर्मियों ने शनिवार को ‘काला दिवस’ मनाते हुए सुबह 8 बजे से 10 बजे तक दो घंटे का पूर्ण कार्य बहिष्कार किया। संघ ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि यदि उप मुख्यमंत्री और उच्चाधिकारियों के साथ बनी सहमति के बावजूद शासनादेश जारी करने में और देरी की गई, तो प्रदेशभर के अस्पताल अनिश्चितकालीन हड़ताल पर चले जाएंगे।
📌 नर्सेस संवर्ग आंदोलन: मुख्य बिंदु
- 23 दिनों से आंदोलन: 9 अक्टूबर 2026 से लगातार 13 सूत्रीय मांगों को लेकर धरनारत हैं प्रदेश के नर्सिंगकर्मी।
- काला दिवस व कार्य बहिष्कार: शनिवार सुबह 8 से 10 बजे तक बांह पर काली पट्टी बांधकर दो घंटे स्वास्थ्य सेवाएं रोकी गईं।
- सहमति पर अमल नहीं: डिप्टी सीएम ब्रजेश पाठक व अपर मुख्य सचिव अमित घोष के साथ वार्ता में तय बिंदुओं पर शासनादेश अब तक लंबित।
- अनिश्चितकालीन हड़ताल का अल्टीमेटम: मांगों का त्वरित निस्तारण न होने पर आपातकालीन सेवाओं सहित पूर्ण कार्यबंदी की चेतावनी।
- मुख्य मांगें: गृह जनपद में पारदर्शी स्थानांतरण, अस्पतालों में क्रेच, सवेतन अध्ययन अवकाश, पदोन्नति एवं एसीपी लाभ।
📊 राजकीय नर्सेस संघ की प्रमुख 13 सूत्रीय मांगें: एक नजर में
| मांग का विषय | कर्मचारियों की मुख्य अपेक्षा एवं प्रावधान |
|---|---|
| स्थानांतरण एवं पदस्थापन | पारदर्शी स्थानांतरण नीति लागू कर गृह जनपद में तैनाती की सुविधा। |
| पदोन्नति एवं करियर प्रगति | निदेशालय से लेकर अस्पताल स्तर तक रिक्त पदों पर समयबद्ध डीपीसी और पदोन्नति। |
| उच्च शिक्षा अध्ययन अवकाश | बीएससी व एमएससी नर्सिंग की तर्ज पर उच्च शिक्षा हेतु सवेतन अवकाश की मंजूरी। |
| महिला कर्मियों के लिए क्रेच | सभी प्रमुख जिला अस्पतालों व मेडिकल कॉलेजों में शिशु देखरेख केंद्र (क्रेच) की स्थापना। |
| अपग्रेडेड अस्पतालों में समायोजन | मेडिकल कॉलेजों में तब्दील जिला अस्पतालों के स्टाफ का वहीं समायोजन; पद समाप्त न करना। |
| समान भत्ते एवं वित्तीय लाभ | शीर्ष संस्थानों की तर्ज पर समान भत्ते एवं पात्र कर्मियों को समयबद्ध एसीपी (ACP) का लाभ। |
मंत्रालयी वार्ता के बाद भी आदेश न होने से गहराया असंतोष
संघ के पदाधिकारियों ने बताया कि स्वास्थ्य सेवाओं को निर्बाध रखने के उद्देश्य से कर्मचारी संगठनों ने हमेशा वार्ता का मार्ग खुला रखा। आंदोलन शुरू होने के बाद प्रदेश के उप मुख्यमंत्री एवं स्वास्थ्य मंत्री बृजेश पाठक तथा अपर मुख्य सचिव अमित घोष के साथ कई दौर की विस्तृत वार्ताएं हुईं।
“शासन स्तर पर हुई उच्चस्तरीय बैठकों में स्थानांतरण, क्रेच व्यवस्था, उच्च अध्ययन अवकाश और समायोजन जैसे कई प्रमुख बिंदुओं पर सहमति बन चुकी थी। इसके बावजूद हफ्तों बीत जाने के बाद भी चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग द्वारा औपचारिक शासनादेश जारी नहीं किया गया। शासन के इस टालमटोल वाले रवैये से कर्मियों में आक्रोश पनप रहा है।”
'वार्ता में बनी सहमति का हो सम्मान': अशोक कुमार
राजकीय नर्सेस संघ के महामंत्री अशोक कुमार ने स्पष्ट किया कि जब तक शासन द्वारा लिखित रूप में शासनादेश निर्गत नहीं किए जाते, तब तक प्रतिदिन दो घंटे का कार्य बहिष्कार बदस्तूर जारी रहेगा।
उन्होंने दो-टूक शब्दों में कहा कि यदि सरकार ने संवेदनशीलता नहीं दिखाई, तो संगठन पूरे प्रदेश में आपातकालीन सेवाओं सहित पूर्ण कार्यबंदी (अनिश्चितकालीन हड़ताल) पर जाने का निर्णय लेगा। मरीजों और आम जनता को होने वाली किसी भी प्रकार की असुविधा की संपूर्ण जिम्मेदारी शासन और प्रशासनिक अधिकारियों की होगी।





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