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भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण के दायरे में आए आयुर्वेद आहार

• विभाग ने आयुर्वेदिक आहार उत्पाद को लेकर जारी की नियमावली

• उत्पादों का निर्माण और विपणन सुरक्षा और मानक विनियम, 2022 के तहत होगा लागू
नई दिल्ली। भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण ने आयुष मंत्रालय के आयुर्वेदिक आहार उत्पाद को लेकर नियमावली जारी कर दी है। इसके तहत अब आयुर्वेदिक आहार उत्पाद फूड सेफ्टी के दायरे में आएंगे। इसके लिए विभाग से लाइसेंस लेना होगा। अब आयुर्वेदिक आहार को निर्माता और विक्रेता आयुर्वेदिक दवा के रूप में नहीं बेच सकेंगे। वहीं नियमावली का पालन न करने पर कंपनी के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। आयुर्वेदिक आहार उत्पादों का निर्माण और विपणन सुरक्षा और मानक विनियम, 2022 नियमाें के अनुसार किया जाएगा। वहीं इसमें आयुर्वेदिक दवाएं, मालिकाना आयुर्वेदिक दवाएं और औषधीय उत्पाद, सौंदर्य प्रसाधन, मादक और मनोदैहिक पदार्थ के साथ जड़ी बूटियां शामिल नहीं होंगी।  

कोरोना काल में बाजार में आयुर्वेदिक आहार उत्पादों की आमद बढ़ी  
मालूम हो कि कई आयुर्वेदिक आहार उत्पादों को लेकर खाद्य सुरक्षा मानकों का पालन नहीं किया जा रहा है। कोरोना महामारी के बाद से तो देश के विभिन्न राज्यों में बाजारों में आयुर्वेदिक दवा के नाम से आयुर्वेदिक आहार उत्पादों की बाढ़ सी आ गई है। इनमें देशी और विदेशी हजारों कंपनियां आयुर्वेद उत्पाद का निर्माण कर रही हैं और बिना किसी लाइसेंस के बाजार में उपलब्ध करा रही हैं। वहीं इन उत्पादों का कोई स्वास्थ्य पर प्रतिकूल प्रभाव न पड़ने पर लोग इसका सेवन करने से भी गुरेज नहीं कर रहे हैं। यही वजह है कि बाजार में आयुर्वेदिक आहार उत्पादों की भरमार हो गई है। ऐसे में खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण ने आयुर्वेदिक आहार उत्पाद को सर्टिफाइड करने के लिए नियमावली जारी कर दी है ताकि इसका लोगों पर विश्वास और बढ़ सके। नियमावली को लेकर विभाग का मुख्य उद्​देश्य इन उत्पादों को और बेहतर तरीके से लैब में टेस्ट करके ही बाजार में उतारने का है।  
निर्धारित मानक के आयुर्वेदिक उत्पाद न मिलने पर होगी सख्त कार्रवाई
वरिष्ठ खाद्य सुरक्षा अधिकारी डी.के.वर्मा ने अधिसूचना जारी करते हुए कहा कि अब आयुर्वेदिक आहार निर्माता और विक्रेताओं को खाद्य सुरक्षा विभाग से लाइसेंस लेना अनिवार्य होगा। इसके लिए आयुर्वेदिक औषधियों से अलग आयुर्वेदिक खाद्य उत्पादों की पैकेजिंग पर एफएसएसआई का लोगो लगाना अनिवार्य होगा। वहीं समय-समय पर खाद्य सुरक्षा विभाग आयुर्वेदिक उत्पादों की जांच करेगा। जांच के दौरान निर्धारित मापदंड पर उत्पाद खरा न होने पर निर्माता और विक्रेता कंपनी के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। इसको लेकर भारत सरकार की ओर से दिशा निर्देश जारी कर दिए गए हैं। 

इन दिशा-निर्देशों का पालन करना होगा अनिवार्य

- खाद्य कारोबारी आयुर्वेद आहार का उत्पादन इन विनियमों की अनुसूची (ख) में विहित प्रवर्गों और अपेक्षाओं के अनुसार करना है। 
-कोई व्यक्ति 24 माह तक के शिशुओं को खिलाने के लिए आयुर्वेद आहार का उत्पादन अथवा उसकी बिक्री नहीं करेगा। 
- खाद्य कारोबारियों द्वारा आयुर्वेद आहार का उत्पादन खाद्य सुरक्षा और मानक विनियम 2011 की अनुसूची 4 के अनुसार किया जाएगा।
 - आयुर्वेद आहार में विटामिनों, खनिजों और एमिनो एसिडों का योजन अनुमत नहीं है। तथापि आयुर्वेद आहार में प्राकृतिक खनिज मौजूद होने पर उन्हें लेबल पर घोषित किया जा सकता है।
 -खाद्य कारोबारी घटकों की शुद्धता संबंधी मानदंड बाद सुरक्षा और मानक विनियमों अथवा सामान्यत: मान्य भेषजकोश अथवा संबंधित बीआईएस विशिष्टियों अथवा भारतीय चिकित्सा अनुसंधान परिषद द्वारा प्रकाशित भारतीय चिकित्सय पौधों का गुणवत्ता मानक के अनुसार अंगीकृत कर सकते हैं। 
- आयुर्वेद आहार खाद्य सुरक्षा और मानक (पैकेजिंग) विनियमए 2018 के अनुरूप होना अनिवार्य हैं।
 - कोई व्यक्ति इन विनियमों में के अनुरूप सुनिश्चित कराए बिना आयुर्वेद आहार का उत्पादन, उसकी पैकिंग, बिक्री नहीं करेगा। उसे विक्रय के लिए पेश नहीं करेगा, उसका विपणन नहीं करेगा। 
- लेबलिंग, प्रस्तुतीकरण और विज्ञापन में यह दावा न किया जाए कि आयुर्वेद आहार में रोग से मुक्त मिलेगी।

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